UP Free Mini Kit Yojana: उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों के लिए जनवरी 2026 की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर आई है। कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश ने उड़द, मूंग और मूंगफली के उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीजों की मिनीकिट मुफ्त में वितरित करने की योजना शुरू की है। यह कदम दलहन और तिलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार, खेती की लागत में कमी और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की गई जानकारी और प्रमाणित बीजों के पीले बोरे की तस्वीर से स्पष्ट है कि ये बीज उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण एजेंसी और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त स्रोतों से हैं, जो अंकुरण दर और उत्पादकता में विश्वसनीय हैं।
योजना का उद्देश्य और महत्व
योगी सरकार लगातार सहफसली खेती को बढ़ावा दे रही है ताकि किसान एक ही खेत से अधिक कमाई कर सकें। उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलें कम पानी में अच्छी पैदावार देती हैं और मिट्टी में नाइट्रोजन फिक्सेशन करती हैं, जिससे अगली फसल (जैसे गेहूं या अन्य) को प्राकृतिक उर्वरक मिलता है। मूंगफली तिलहन फसल के रूप में तेल उत्पादन बढ़ाती है और बाजार में अच्छा दाम भी मिलता है। मिनीकिट वितरण से किसानों को बीज खरीदने का खर्च बचेगा, जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत बड़ी राहत है।
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इस तरह की योजनाएं पहले भी जिला स्तर पर चलती रही हैं, जैसे अमरोहा में गन्ने के साथ उड़द-मूंग की मुफ्त किट, कन्नौज में उड़द और मूंगफली के लिए सीमित वितरण, या अन्य जिलों में जायद सीजन के लिए मिनीकिट। अब प्रदेश स्तर पर यह विस्तार हो रहा है, जिससे अधिक किसान लाभान्वित होंगे। प्रमाणित बीजों से पैदावार में 20-30 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है, और रोग-कीट प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर रहती है।
मिनीकिट कैसे प्राप्त करें और पात्रता
यह योजना मुख्य रूप से छोटे-सीमांत किसानों, सहफसली खेती करने वालों और दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने के इच्छुक किसानों के लिए है। आवेदन के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं:
- नजदीकी ब्लॉक कृषि अधिकारी, जिला कृषि कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।
- विभाग के आधिकारिक पोर्टल (जैसे upagriculture.com या agridarshan.up.gov.in) पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन चेक करें, जहां बुकिंग या आवेदन की प्रक्रिया बताई जाती है।
- कई मामलों में पोर्टल पर बुकिंग की अंतिम तिथि तय होती है, जैसे कुछ जिलों में 20 जनवरी तक। इसलिए जल्दी आवेदन करें, क्योंकि सीमित संख्या में किट उपलब्ध होती हैं।
बीज प्रमाणित होने से अंकुरण दर उच्च रहती है, और किसान को विश्वासपूर्वक बोआई करनी पड़ती है।
खेती में सफलता के लिए उपयोगी सुझाव
उड़द और मूंग जायद या खरीफ सीजन में अच्छी चलती हैं। रोपाई के लिए 30-45 सेमी की दूरी रखें, अच्छी दोमट मिट्टी में गोबर खाद मिलाएं। फूल आने पर पोटाश युक्त खाद दें ताकि फलियां ज्यादा भरें। मूंगफली के लिए रेतली दोमट मिट्टी बेहतर है, और फूल आने पर हल्की सिंचाई जरूरी होती है। कीट प्रबंधन के लिए नीम आधारित जैविक दवाओं का उपयोग करें। सहफसली खेती में गन्ना या गेहूं के साथ इन फसलों को लगाने से अतिरिक्त कमाई होती है।
यह योजना न केवल लागत कम करती है बल्कि देश को दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान देती है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य में ऐसी पहल से उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में स्थिरता आएगी।
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