मार्च में महंगा खीरा बेचने का मौका, पूसा बरखा से अगेती खेती, कर बनिए लखपति

जनवरी का महीना उत्तर भारत में खीरे की अगेती (extra-early) खेती के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। ठंड कम हो रही होती है, दिन लंबे होने लगते हैं और मौसम धीरे-धीरे गर्मी की ओर बढ़ता है, जो खीरे की बुवाई के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करता है। इस समय अगर सही वैरायटी का चुनाव किया जाए तो मार्च-अप्रैल में ही बाजार में ताजा खीरा भेजकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

ऐसी ही एक उन्नत, भरोसेमंद और उच्च पैदावार वाली वैरायटी है पूसा बरखा (Pusa Barkha) खीरा, जो ICAR-Indian Agricultural Research Institute (IARI), नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है और नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन (NSC) के प्रमाणित बीज के रूप में उपलब्ध है।

पूसा बरखा खीरा वैरायटी की मुख्य विशेषताएं

पूसा बरखा खीरा की सबसे बड़ी ताकत उसकी अगेती प्रकृति है। ये वैरायटी जनवरी-फरवरी में बुवाई करने पर 40 से 45 दिन में ही पहली तुड़ाई शुरू कर देती है। यानी अगर आप जनवरी के पहले या दूसरे सप्ताह में बीज बोते हैं, तो मार्च के मध्य तक बाजार में खीरा पहुंचा सकते हैं, जब भाव सबसे ज्यादा रहते हैं। फल लंबे (18-22 सेमी), सीधे, गहरे हरे रंग के और चमकदार होते हैं। औसत फल का वजन 200 से 250 ग्राम तक रहता है। कड़वाहट बहुत कम होती है, स्वाद मीठा-ताजा रहता है, जिससे बाजार में अच्छा दाम मिलता है।

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ये वैरायटी उच्च पैदावार वाली है। अच्छी देखभाल, संतुलित खाद और पानी के प्रबंधन पर प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल तक उत्पादन आसानी से मिल सकता है। पौधे मजबूत, बेल लंबी और फल क्लस्टर में लगते हैं, जिससे तुड़ाई आसान होती है। ये गर्मी सहन करने वाली वैरायटी है, इसलिए फरवरी-मार्च की शुरुआती गर्मी में भी अच्छी चलती है। डाउनी मिल्ड्यू और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे प्रमुख रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधक क्षमता होने से स्प्रे का खर्च कम होता है। ये वैरायटी उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में बहुत सफल साबित हुई है।

जनवरी में अगेती खीरा की बुवाई के लिए पूसा बरखा क्यों चुनें

जनवरी में अगेती खीरा उगाने का सबसे बड़ा फायदा बाजार में कम उपलब्धता का होता है। मार्च-अप्रैल में जब खीरा कम आता है, तब भाव 40 से 80 रुपये किलो तक पहुंच जाता है। पूसा बरखा की अगेती प्रकृति किसान को इस मौके का पूरा फायदा देती है। ये वैरायटी कम समय में ज्यादा उत्पादन देती है, जिससे पूंजी जल्दी घूमती है और नया निवेश करने का मौका मिलता है। NSC के प्रमाणित बीज होने से अंकुरण दर 85-90 प्रतिशत से ज्यादा रहती है और पैदावार भरोसेमंद मिलती है।

बड़े पैमाने पर खेती के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

जनवरी में बुवाई के लिए सबसे पहले खेत की तैयारी करें। खेत अच्छी तरह जुताई करें और 15 से 20 टन गोबर खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें। मिट्टी बलुई दोमट या दोमट होनी चाहिए, जिसमें जल निकासी अच्छी हो। pH 6.0 से 7.5 के बीच रखें।

बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर 800 से 1000 ग्राम काफी होती है। NSC से प्रमाणित बीज लें। बीज को थिरम या कैप्टान (2 ग्राम प्रति किलो) से उपचारित करें। बुवाई के लिए पंक्ति से पंक्ति 1.5 से 2 मीटर और पौधे से पौधे 45 से 60 सेमी दूरी रखें। गड्ढों में 2-3 बीज डालें और बाद में पतला करें। नर्सरी में बोकर 15-20 दिन में रोपाई भी कर सकते हैं।

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सिंचाई नियमित लेकिन हल्की रखें। पहली सिंचाई बुवाई के 7 से 10 दिन बाद। फूल आने पर पानी थोड़ा बढ़ाएं, लेकिन ज्यादा न होने दें। खाद के लिए बेसल में 80 से 100 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फॉस्फोरस और 60 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर डालें। टॉप ड्रेसिंग में बाकी खाद दें। फूल आने पर पोटाश ज्यादा दें ताकि फल मोटे और ज्यादा लगें।

तुड़ाई फल 8-10 इंच लंबे होने पर हर 2-3 दिन में करें। ज्यादा बड़े होने से स्वाद खराब होता है और बाजार में कम दाम मिलता है। अच्छी पैदावार से 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिल सकती है। बाजार में भाव 20 से 50 रुपये किलो तक रहता है, तो अच्छा मुनाफा होता है।

NSC से प्रमाणित बीज कैसे प्राप्त करें

NSC सरकारी कंपनी है, इसलिए बीज प्रमाणित, उच्च अंकुरण दर वाले और भरोसेमंद मिलते हैं। पूसा बरखा खीरे के 10 ग्राम पैकेट मात्र 84 रुपये में उपलब्ध है। बड़े पैमाने पर खेती के लिए 500 ग्राम से 1 किलो या ज्यादा मात्रा में ऑर्डर कर सकते हैं। ऑनलाइन ऑर्डर करने के लिए लिंक: https://mystore.in/en/product/nsc-cucumber-pusa-barkha-10gm

भाइयो, जनवरी में अगेती खीरा उगाने के लिए पूसा बरखा वैरायटी बहुत उत्तम है। ये जल्दी पैदावार देती है, बाजार में अच्छा दाम मिलता है और कम खर्च में ज्यादा कमाई होती है।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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