Gerbera Flower Cultivation in Hindi: आजकल हमारे किसान भाई पारंपरिक खेती को छोड़कर कुछ नया और मुनाफे वाला करने की सोच रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी है बिहार के भोजपुर जिले के भेडरी गाँव की, जहाँ दो किसान मित्र शिया राम मौर्या और कृष्णा सिंह ने पॉलीहाउस में जरबेरा फूल की खेती शुरू करके लाखों की कमाई कर दिखाई है। इनका मकसद सिर्फ अपनी जेब भरना नहीं, बल्कि गाँव के बाकी किसानों को भी आधुनिक खेती की राह दिखाना है।
जरबेरा फूल की खेती न सिर्फ कम लागत में शुरू हो सकती है, बल्कि शादी-विवाह और सजावट के लिए इसकी बढ़ती माँग इसे किसानों के लिए सोने की खान बना रही है। आइए, जानते हैं कि जरबेरा की खेती कैसे शुरू करें और इसके क्या फायदे हैं।
जरबेरा फूल की खासियत
जरबेरा फूल देखने में इतना सुंदर और रंग-बिरंगा होता है कि इसे देखते ही मन खुश हो जाता है। यह पीले, लाल, गुलाबी, सफेद, नारंगी जैसे कई रंगों में मिलता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह 15-20 दिन तक ताजा रहता है। बस इसे पानी की बोतल में रख दो, और यह शादी-विवाह, होटल, ऑफिस या गुलदस्ते की सजावट में चार चाँद लगा देता है।
गाँव के लोग बताते हैं कि इस फूल को देखकर तनाव भी कम होता है। इसके पत्तों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयों में भी होता है। भोजपुर के शिया राम मौर्या बताते हैं कि उनके पास पटना, लखनऊ, कोलकाता और बलिया तक से लोग ऑर्डर देने आते हैं। खासकर शादी के सीजन में इसकी कीमत 8-10 रुपये प्रति फूल से भी ज्यादा हो जाती है।

पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती
जरबेरा की खेती के लिए पॉलीहाउस या शेड नेट हाउस जरूरी है, क्योंकि यह फूल गर्मी और कीड़ों से बचाने के लिए खास माहौल माँगता है। शिया राम और कृष्णा सिंह ने मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत सरकारी सब्सिडी लेकर 2000 वर्ग मीटर में 18.70 लाख रुपये की लागत से पॉलीहाउस बनवाया। सरकार ने इसमें बड़ी मदद की, क्योंकि कई राज्यों में पॉलीहाउस के लिए 50-70% तक सब्सिडी मिलती है।
पॉलीहाउस में तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस रखा जाता है, ताकि फूल अच्छे से बढ़ें। ठंड के मौसम में इसका उत्पादन थोड़ा कम होता है, लेकिन पॉलीहाउस की मदद से साल भर फूल मिलते हैं। इसमें कीड़ों से बचाने के लिए जैविक कीटनाशक और ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पानी और मेहनत दोनों की बचत होती है।
खेती की शुरुआत और लागत
जरबेरा की खेती शुरू करना ज्यादा मुश्किल नहीं है। इसके बीज दो हफ्ते में अंकुरित हो जाते हैं और 90 दिन में फूल देना शुरू कर देते हैं। एक बार पौधा लगाने के बाद यह 2-3 साल तक फूल देता है। भोजपुर में इस खेती की शुरुआत महिला किसान कांति किरण ने की थी, लेकिन अब उनके दामाद शिया राम और मित्र कृष्णा सिंह ने इसे संभाल लिया है।
पॉलीहाउस बनाने का खर्चा सबसे बड़ा होता है, लेकिन सरकार की सब्सिडी इसे आसान बनाती है। उदाहरण के लिए, 2000 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में 3200-3300 पौधे लगाए जा सकते हैं। अगर एक फूल 8 रुपये में भी बिके, तो हर महीने 10 बार तुड़ाई से 30,000-35,000 रुपये की कमाई हो सकती है। शिया राम और कृष्णा सिंह की जोड़ी सालाना 11-12 लाख रुपये कमा रही है, जो गाँव के लिए बड़ी बात है।

जरबेरा की माँग और बाजार
जरबेरा फूल की माँग सिर्फ गाँव तक सीमित नहीं है। यह शादी-विवाह, होटल, रेस्तरां, ऑफिस और सजावट के लिए बड़े शहरों में खूब बिकता है। खासकर शादी के सीजन में इसकी कीमत बढ़ जाती है। शिया राम बताते हैं कि उनके फूल पटना के बाजारों में खूब चलते हैं। कई बार तो कोलकाता और लखनऊ के व्यापारी सीधे उनके खेत पर आकर ऑर्डर बुक करते हैं। गाँव के किसान भाई अगर इस खेती को शुरू करना चाहते हैं, तो पहले अपने नजदीकी शहर के फूल बाजार से संपर्क करें। वहाँ होटल या इवेंट मैनेजर से बात करके डिमांड का पता लगाएँ। एक बार बाजार बन जाए, तो कमाई की कोई कमी नहीं रहती।
किसानों के लिए सलाह
जरबेरा की खेती शुरू करने से पहले अपने नजदीकी बागवानी विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें। पॉलीहाउस के लिए सब्सिडी की जानकारी लें, क्योंकि कई राज्यों में 50-70% तक अनुदान मिलता है। अच्छी नस्ल के बीज चुनें और मिट्टी का पीएच 5.5-6.5 के बीच रखें। ड्रिप इरिगेशन और जैविक खाद का इस्तेमाल करें, ताकि खर्चा कम हो।
शुरुआत छोटे स्तर पर करें, जैसे 500-1000 वर्ग मीटर से। फूलों की देखभाल के लिए पहले 21 दिन हाथ से पानी दें, उसके बाद ड्रिप सिस्टम शुरू करें। कीड़ों से बचाने के लिए पीले या नीले स्टिकी ट्रैप लगाएँ। अगर आप गाँव में हैं और पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं, तो जरबेरा की खेती आपके लिए बड़ा मौका है।
जरबेरा की खेती न सिर्फ मुनाफा देती है, बल्कि गाँव के किसानों को नई राह दिखाती है। शिया राम और कृष्णा सिंह की तरह आप भी इस खेती से अपनी किस्मत बदल सकते हैं।
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