भारत के कई राज्यों में यूरिया की भारी कमी और कालाबाजारी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मध्य प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में किसानों को यूरिया के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, और कई बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। भारतीय किसान संघ ने केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि सब्सिडी वाली खाद को उद्योगों में डायवर्ट किया जा रहा है। इस बीच, कालाबाजारी के चलते खुले बाजार में यूरिया की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे किसानों की कमर टूट रही है। यह संकट खरीफ सीजन के बीच में फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
यूरिया की कमी का कारण
स्वास्थ्य मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल यूरिया की आपूर्ति में कमी के कई कारण हैं। वैश्विक स्तर पर कोयले और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल ने यूरिया उत्पादन को प्रभावित किया है, क्योंकि ये इसके मुख्य कच्चे माल हैं। इसके अलावा, चीन और रूस जैसे प्रमुख यूरिया निर्यातक देशों ने अपने निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर असर पड़ा है। हाल ही में एक X पोस्ट में दावा किया गया कि चीन ने भारत के लिए यूरिया निर्यात प्रतिबंधों में ढील दी है, लेकिन इसका प्रभाव अभी तक जमीनी स्तर पर नहीं दिखा है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में किसानों ने बताया कि सीमित स्टॉक के कारण उन्हें कूपन सिस्टम के तहत भी यूरिया नहीं मिल पा रहा है।
कालाबाजारी का गहराता जाल
किसानों का कहना है कि यूरिया की कमी का फायदा उठाकर कुछ लोग कालाबाजारी में लिप्त हैं। पंजाब में एक X पोस्ट के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए उर्वरकों को कथित तौर पर काले बाजार में बेचा जा रहा है। मध्य प्रदेश के पाटन तहसील में किसान सुबह चार बजे से कतारों में खड़े हो रहे हैं, लेकिन स्टॉक खत्म होने की वजह से उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। कई किसानों को मजबूरन खुले बाजार से दोगुनी कीमत पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है। भारतीय किसान संघ ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि अगर जल्द ही पर्याप्त यूरिया की आपूर्ति नहीं की गई, तो सड़कों पर बड़ा आंदोलन होगा।
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सरकार का जवाब और कार्रवाई
केंद्र सरकार ने यूरिया संकट को गंभीरता से लेते हुए आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिलाया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में कहा कि कृषि मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय मिलकर राज्यों को यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी वादा किया कि कालाबाजारी की शिकायतों की जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। मध्य प्रदेश के जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना ने कहा कि यूरिया की नई खेप जल्द पहुंच रही है, और दो-तीन दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि, किसानों का कहना है कि यह आश्वासन तब तक बेकार है, जब तक जमीन पर राहत न मिले।
किसानों की चिंता और भविष्य
यूरिया की कमी का सबसे बड़ा असर खरीफ सीजन की फसलों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर यूरिया न मिलने से धान और अन्य फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि यूरिया की आपूर्ति को पारदर्शी बनाया जाए और कालाबाजारी पर सख्ती से लगाम लगाई जाए। बंगाल में गैस संकट के कारण यूरिया कारखानों के बंद होने की खबरें भी सामने आई हैं, जिसने वैश्विक आपूर्ति को और जटिल बना दिया है। किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो इसका असर उनकी आजीविका और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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