किसान भाइयों, रबी के मौसम में अगर धान की कटाई या बारिश की वजह से गेहूं की बुवाई देर हो गई है तो घबराने की जरूरत नहीं। दिसंबर बीत रहा है और जनवरी शुरू हो रहा है, लेकिन अभी भी अच्छी फसल ली जा सकती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही किस्में चुनकर और थोड़ी एक्स्ट्रा देखभाल से पछेती बुवाई में भी बंपर उपज मिल सकती है। आमतौर पर देर से बोया गया गेहूं कम पैदावार देता है, लेकिन उन्नत किस्मों से यह कमी पूरी हो जाती है। आज हम बात करेंगे दो ऐसी खास किस्मों की जो जनवरी में बोने के लिए बेस्ट हैं।
पछेती बुवाई का मतलब है नवंबर के बाद, खासकर दिसंबर या जनवरी में बोना। ऐसे में फसल को कम समय मिलता है बढ़ने का, गर्मी जल्दी पड़ती है, लेकिन कुछ किस्में ऐसी हैं जो कम दिनों में पक जाती हैं और अच्छे दाने देती हैं। अगर आप उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में खेती करते हैं तो ये किस्में आपके लिए रामबाण हैं।
पहली बेहतरीन किस्म: HD 3298
यह किस्म देर से बुवाई के लिए विशेष रूप से बनाई गई है। आप 1 जनवरी से 15 जनवरी तक इसकी बुवाई कर सकते हैं। उत्तर-पश्चिम भारत जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के मैदानी हिस्सों में यह बहुत अच्छा प्रदर्शन करती है। सबसे बड़ी खासियत कम समय में तैयार हो जाती है और पैदावार प्रति हेक्टेयर 47 क्विंटल तक देती है। दाने चमकदार और भारी होते हैं, बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। कई किसानों का अनुभव है कि इस किस्म से देर से बोने पर भी नुकसान नहीं होता, बल्कि अच्छी उपज आती है।
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दूसरी शानदार किस्म: हलना
यह किस्म चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर ने विकसित की है। जनवरी के पहले सप्ताह तक बुवाई कर सकते हैं। यह भी पछेती बुवाई के लिए परफेक्ट है और प्रति हेक्टेयर 40 से 50 क्विंटल तक पैदावार देती है। फसल मजबूत रहती है, बीमारियों से लड़ने की अच्छी क्षमता और कम पानी में भी अच्छी ग्रोथ। उत्तर भारत के किसानों के लिए यह एक भरोसेमंद विकल्प है।
देर से बुवाई के आसान टिप्स
किसान भाई, किस्म तो अच्छी चुन ली, लेकिन कुछ और बातों का ध्यान रखें तो पैदावार और बढ़ जाएगी। सबसे पहले जीरो टिलेज मशीन का इस्तेमाल करें बिना जुताई के सीधे बुवाई करें। इससे समय बचता है और फसल को सही तापमान मिलता है।
बीज की मात्रा थोड़ी ज्यादा रखें प्रति हेक्टेयर 125 किलो बीज डालें। खाद में 120 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फॉस्फोरस और 40 किलो पोटाश डालें। आधी नाइट्रोजन बुवाई के समय और बाकी सिंचाई के साथ।
सिंचाई का खास ध्यान रखें कुल 5 सिंचाइयां करें। पहली बुवाई के 20-25 दिन बाद, फिर 40-45 दिन बाद और बाकी फसल की जरूरत के हिसाब से। पानी समय पर मिले तो दाने अच्छे भरते हैं।
ये उपाय अपनाएंगे तो देर से बुवाई का कोई नुकसान नहीं होगा। बीज प्रमाणित दुकान से लें और कृषि केंद्र से सलाह जरूर लें। इस मौसम में अभी मौका है, जल्दी तैयारी करें और बंपर फसल लें। आपकी मेहनत जरूर रंग लाएगी!
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