रबी के मौसम में सरसों की फसल अच्छी चल रही है, लेकिन दिसंबर-जनवरी में एक छोटा सा कीट पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है। वो है माहू या एफिड कीट। यह छोटे हरे रंग के कीड़े फसल के फूलों और नई फलियों का रस चूस लेते हैं, जिससे पैदावार आधी से भी कम हो जाती है। इस साल सरसों की बुवाई का रकबा बढ़कर 87 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, लेकिन कोहरे, नमी और बादलों वाले मौसम में माहू का हमला तेज हो जाता है।
कई किसान इसे रोकने के लिए महंगे कीटनाशक डालते हैं, जो न सिर्फ खर्च बढ़ाते हैं बल्कि खाने में जहर घोलकर सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन एक सस्ता और पर्यावरण अनुकूल तरीका है – पीला स्टिकी ट्रैप। इसे लगाने से बिना किसी रसायन के कीट नियंत्रित हो जाते हैं और फसल स्वस्थ रहती है।
माहू कीट का हमला आमतौर पर फसल के फूल आने और फली बनने के समय होता है। ये कीड़े पौधे की कोमल हिस्सों पर चिपककर रस पीते हैं, फूल झड़ जाते हैं और फलियां ठीक से नहीं भरतीं। अगर समय पर ध्यान न दिया तो नुकसान बहुत बड़ा हो जाता है।
माहू कीट के लक्षण कैसे पहचानें?
किसान भाई, खेत में रोज चक्कर लगाते रहें। माहू के हमले के संकेत साफ दिखते हैं – पौधों की नई पत्तियां, फूल और फलियां पर छोटे-छोटे हरे या काले कीड़े जमा हो जाते हैं। पत्तियां मुड़ने लगती हैं, पीली पड़ जाती हैं और चमक खत्म हो जाती है। फूलों से शहद जैसा चिपचिपा पदार्थ टपकता है, जिस पर काली फफूंदी लग जाती है। फलियां छोटी रह जाती हैं और दाने कम बनते हैं। अगर कोहरा ज्यादा है तो खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि नमी में ये कीड़े तेजी से फैलते हैं।
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पीला स्टिकी ट्रैप क्यों और कैसे काम करता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, माहू कीट पीले रंग की तरफ बहुत आकर्षित होता है। स्टिकी ट्रैप एक पीली शीट होती है, जिस पर चिपचिपा गोंद लगा रहता है। कीट इसे देखकर उड़कर आते हैं और चिपककर मर जाते हैं। यह तरीका पूरी तरह इको-फ्रेंडली है – कोई जहर नहीं, कोई अवशेष नहीं। इससे मिट्टी और खाने की शुद्धता बनी रहती है। कई किसानों ने इसे आजमाकर कीटनाशकों का खर्च 70 प्रतिशत तक कम कर लिया है।
ट्रैप लगाने का तरीका बहुत आसान है। फसल से 1-2 फीट ऊंचाई पर बांस या लकड़ी के सहारे ट्रैप बांध दें। एक एकड़ में 10 से 15 ट्रैप काफी होते हैं। बाजार में तैयार ट्रैप मिल जाते हैं, लेकिन घर पर भी बना सकते हैं। पीली पॉलीथीन या कार्डबोर्ड की शीट लें और उस पर पुराना मोबिल ऑयल या अरंडी का तेल लगा दें। एक ट्रैप का खर्च सिर्फ 15-20 रुपये। हर 20-25 दिन में जब शीट कीटों से भर जाए तो बदल दें। ध्यान रखें कि सफेद मक्खी और माहू के लिए पीला ट्रैप बेस्ट है, जबकि थ्रिप्स जैसे कीटों के लिए नीला ट्रैप इस्तेमाल करें।
अन्य आसान बचाव के उपाय
ट्रैप के साथ कुछ और सावधानियां बरतें तो असर और अच्छा होगा। फसल चक्र अपनाएं, एक ही खेत में बार-बार सरसों न बोएं। संतुलित खाद डालें, ज्यादा नाइट्रोजन से कीट बढ़ते हैं। खेत में पक्षियों को आकर्षित करें, वे कीटों को खाते हैं। अगर हमला ज्यादा हो तो जैविक स्प्रे जैसे नीम तेल का घोल आजमाएं। रसायन अंतिम विकल्प रखें।
किसान भाइयों, स्टिकी ट्रैप जैसी तकनीकें अपनाकर हम अपनी फसल को जहरमुक्त रख सकते हैं। इससे सेहत भी अच्छी रहेगी और बाजार में अच्छे दाम मिलेंगे। इस मौसम में तुरंत ट्रैप लगाएं, फसल बचेगी और पैदावार बढ़ेगी।
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