जनवरी में रबी फसलों पर इस कीड़े का हमला! देसी उपाय नहीं अपनाए तो सरसों-गेहूं खतरे में

नए साल की शुरुआत होते ही रबी फसलों पर एक छोटा लेकिन खतरनाक कीट सक्रिय हो जाता है। नाम है माहू या एफिड। ये रस चूसने वाला कीट सरसों, गेहूं और चने जैसी फसलों को अपना निशाना बनाता है। जनवरी का मौसम हल्की ठंड, कोहरा और नमी इस कीट के पनपने के लिए सबसे मुफीद होता है। अगर शुरुआत में ही काबू न पाया जाए तो पौधों की बढ़वार रुक जाती है, पत्तियां मुड़ने लगती हैं और पैदावार में भारी गिरावट आ जाती है। किसान भाई अंशुमान सिंह बताते हैं कि माहू कीट तेजी से फैलता है, इसलिए जनवरी-फरवरी में खेतों पर नजर रखना बहुत जरूरी है। अच्छी बात ये है कि शुरुआती प्रकोप में देसी उपाय ही काफी हैं, रासायनिक दवाओं की जरूरत कम पड़ती है।

माहू कीट पौधों की कोमल पत्तियों, फूलों और नई टहनियों से रस चूसता है। इससे पौधा कमजोर हो जाता है, पत्तियां मुड़कर पीली पड़ने लगती हैं और बढ़वार ठप हो जाती है। सरसों में फूल अच्छे नहीं आते, गेहूं में बालियां कमजोर रहती हैं और चने में फलियां प्रभावित होती हैं। कुल मिलाकर मेहनत पर पानी फिर सकता है।

माहू कीट के लक्षण कैसे पहचानें

खेत में घूमते समय अगर पत्तियों पर छोटे-छोटे हरे, काले या भूरे कीड़े दिखें, पत्तियां चिपचिपी हो रही हों या मुड़ रही हों तो समझ जाएं कि माहू ने हमला कर दिया है। शुरुआती दिनों में ये कीट पत्तियों के नीचे छिपे रहते हैं, इसलिए अच्छे से देखें। जनवरी में कोहरे की वजह से नमी ज्यादा रहती है, जो इन कीटों को फैलने में मदद करती है।

सबसे कारगर देसी उपाय: नीम तेल का स्प्रे

किसान अंशुमान सिंह की सलाह है कि शुरुआती प्रकोप में नीम तेल का स्प्रे सबसे सुरक्षित और प्रभावी है। तरीका बहुत आसान है प्रति लीटर पानी में 50 मिलीलीटर नीम आधारित तेल घोलें। अच्छे से मिलाकर पूरे पौधे पर, खासकर प्रभावित हिस्सों पर छिड़काव करें। स्प्रे करने से पहले प्रकोप वाली पत्तियां या टहनियां छांटकर अलग कर दें, ताकि कीट और न फैलें। सुबह या शाम के समय स्प्रे करें, जब हवा कम हो और धूप हल्की हो। एक बार स्प्रे से आमतौर पर काबू हो जाता है, लेकिन अगर ज्यादा फैलाव हो तो 7-10 दिन बाद दोबारा करें।

नीम तेल कीटों को भगाता है, उनके अंडे मारता है और फसल को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। ये देसी उपाय सस्ता भी है और पर्यावरण के लिए सुरक्षित। कई किसान भाई इसे आजमा चुके हैं और कहते हैं कि रासायनिक दवाओं से बेहतर असर देता है।

अगर प्रकोप ज्यादा हो तो क्या करें

अगर देर हो गई और कीट बहुत फैल गए तो रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल अंतिम विकल्प है। इमिडाक्लोप्रिड या थायोमेथोक्साम जैसी दवाएं कारगर हैं, लेकिन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इस्तेमाल करें। देसी उपाय पहले आजमाएं, क्योंकि वो फसल की क्वालिटी बनाए रखते हैं और मिट्टी को भी नुकसान नहीं पहुंचाते।

किसान भाइयों, जनवरी में खेतों की रोज निगरानी करें। माहू कीट छोटा है, लेकिन नुकसान बड़ा कर सकता है। नीम स्प्रे जैसे देसी जुगाड़ से फसल को सुरक्षित रखें और बंपर पैदावार लें। अपने इलाके के कृषि केंद्र से भी सलाह लेते रहें।

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  • Shashikant

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