संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सामने दावा किया है कि फसलों को गारंटीड न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) न मिलने से किसानों को 43 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। ये बात SKM के संयोजक जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कमेटी के सामने कही। कमेटी की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस नवाब सिंह कर रहे हैं, जिसे सितंबर 2024 में किसानों की शिकायतों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए बनाया गया था।
डल्लेवाल ने कहा, “फसलों की गारंटीड कीमत न मिलने के कारण किसानों को 43 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ है।” उन्होंने बताया कि MSP अभी मुख्य रूप से गेहूं और धान तक सीमित है। अन्य फसलों जैसे बाजरा, मक्का, ज्वार और कपास में MSP पर खरीद बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बाजरा MSP से 1000 रुपये प्रति क्विंटल कम बिका, जबकि प्राइस डिफरेंस सिर्फ 575 रुपये का दिया गया। धान में नमी के झूठे दावों से 150-250 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ। मक्का तो MSP पर खरीदा ही नहीं गया।
कई राज्यों के किसान नेताओं ने भी अपनी बात रखी
कमेटी के सामने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु के किसान नेता मौजूद थे। अभिमन्यु कोहाड़ (हरियाणा) ने कहा कि पंजाब में प्रति एकड़ धान खरीद पर सीमा लगा दी जाती है। राजिंदर सिंह और अनिल तालान (उत्तर प्रदेश) ने बताया कि वहां भी फसलें MSP से कम दाम पर बिक रही हैं। अनिल पटेल (मध्य प्रदेश) ने किसानों की बढ़ती आत्महत्या का जिक्र किया। किसान नेता बोले कि MSP पर कानूनी गारंटी और सभी फसलों की सरकारी खरीद जरूरी है। भावांतर योजनाओं में मिलने वाला मुआवजा MSP के बराबर नहीं होता।
किसान संगठनों की मांग
किसान नेता MSP को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना गारंटी के MSP सिर्फ कागजी घोषणा है। अगर सभी फसलों पर MSP की गारंटी हो और सरकार पूरी खरीद करे तो किसानों की आय स्थिर होगी और कर्ज का बोझ कम होगा। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि बाजार में भाव गिरने से किसान मजबूर होकर कम दाम पर बेचते हैं, जिससे घाटा बढ़ता है। कई जगहों पर फसलें खरीद ही नहीं जातीं।
कुल मिलाकर ये बैठक किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को फिर से सामने लाई है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी अब इन बातों पर विचार कर रही है। किसान भाइयों, अगर आप भी MSP से जुड़ी समस्या झेल रहे हैं तो अपने संगठनों से जुड़ें और आवाज उठाएं।
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