देश में रबी सीजन की बुवाई ने इस बार रिकॉर्ड तोड़ दिया है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 9 जनवरी 2026 तक रबी फसलों का कुल रकबा 644.29 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। ये पिछले साल की समान अवधि से 17.65 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। दलहन और तिलहन की खेती में आई इस बढ़ोतरी को सरकार की आयात निर्भरता कम करने वाली रणनीति के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। किसान भाइयों में भी खुशी है क्योंकि इन फसलों की अच्छी पैदावार से उनकी आमदनी बढ़ने की संभावना मजबूत हुई है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में बताया कि रबी फसलों की प्रगति लगातार अच्छी चल रही है। कुल रकबे में आई ये वृद्धि मुख्य रूप से गेहूं, चना और सरसों जैसी प्रमुख फसलों से आई है। पिछले साल की तुलना में गेहूं की बुवाई में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है, जबकि दलहन और तिलहन में पहले गिरावट की आशंका थी लेकिन अब स्थिति सुधर गई है। सरकार लगातार दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा दे रही है ताकि देश को दालों और तेल के आयात पर कम निर्भर होना पड़े।
दलहन की बुवाई में 3.74 लाख हेक्टेयर का इजाफा
दलहन फसलों का रकबा इस बार 136.36 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की समान अवधि के 132.61 लाख हेक्टेयर से 3.74 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। चने की बुवाई में सबसे ज्यादा तेजी आई है – 4.66 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी के साथ अब चना का क्षेत्र 95.88 लाख हेक्टेयर हो गया है। मसूर की बुवाई में भी हल्की बढ़ोतरी हुई है। मटर और कुल्थी में थोड़ी गिरावट है लेकिन कुल मिलाकर दलहन का रकबा अच्छा है। ये बढ़ोतरी किसानों के लिए राहत की बात है क्योंकि दालों की कीमतें हमेशा ऊंची रहती हैं और अच्छी पैदावार से उनकी कमाई मजबूत होगी।
सरकार की नीतियां भी इसमें मदद कर रही हैं। MSP में बढ़ोतरी और अन्य प्रोत्साहन से किसान दलहन की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। अगर मौसम साथ देता है तो इस साल दलहन का उत्पादन पिछले साल से काफी बेहतर रहने की उम्मीद है।
तिलहन में भी अच्छी बढ़ोतरी
तिलहन फसलों का रकबा 96.86 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के 93.33 लाख हेक्टेयर से 3.53 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। सरसों और रेपसीड में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है – करीब 2.79 लाख हेक्टेयर का इजाफा। मूंगफली, कुसुम और अरंडी में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले तिलहन में गिरावट की आशंका थी लेकिन अब स्थिति सुधर गई है। तिलहन की अच्छी बुवाई से देश में खाद्य तेल की आयात निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
किसान भाइयों के लिए ये अच्छा संकेत है क्योंकि सरसों जैसी फसलें कम पानी में अच्छी पैदावार देती हैं और बाजार में भाव भी अच्छे मिलते हैं। अगर मौसम अनुकूल रहा तो तिलहन का उत्पादन इस साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।
अन्य फसलों की स्थिति
गेहूं की बुवाई में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। धान के रबी क्षेत्र में भी उछाल आया है। श्रीअन्न और मोटे अनाजों के रकबे में दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा की वृद्धि हुई है। ज्वार में थोड़ी गिरावट है लेकिन बाजरा और मक्का में अच्छी स्थिति है। कुल मिलाकर रबी फसलों की प्रगति स्थिर और सकारात्मक है।
कृषि मंत्रालय का कहना है कि बेहतर मानसून और समय पर बारिश ने बुवाई को मदद की है। किसान भाइयों ने भी सरकार की योजनाओं और MSP में बढ़ोतरी का फायदा उठाया है। अगर मौसम साथ देता रहा तो इस साल रबी फसलों का उत्पादन पिछले साल से काफी बेहतर रहने की उम्मीद है।
किसान भाइयों के लिए क्या मतलब
ये आंकड़े बताते हैं कि दलहन और तिलहन की खेती बढ़ रही है, जो देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय के लिए अच्छा है। अगर आप भी दलहन या तिलहन उगा रहे हैं तो अपनी फसल की अच्छी देखभाल करें। रोग-कीट से बचाव और समय पर सिंचाई से पैदावार और बढ़ सकती है।
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