पोल्ट्री किसानों के लिए जादुई देसी घास, दाने का खर्च 70% तक घटाएं, मुर्गियां स्वस्थ और अंडे ज्यादा

पोल्ट्री फार्मिंग में सबसे बड़ा खर्चा तो दाना ही होता है। महंगे दाने में मिलावट की समस्या अलग से सिरदर्द बनती है, जिससे मुर्गियों की ग्रोथ रुक जाती है और अंडे कम आते हैं। लेकिन अब एक सस्ता और पूरी तरह देसी समाधान है – अजोला घास। यह हरी जलीय घास पोल्ट्री के लिए सुपरफूड है, जो प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन से भरपूर होती है।

कृषि विज्ञान केंद्र इसे बढ़ावा दे रहे हैं क्योंकि अजोला से दाने का खर्च 70 प्रतिशत तक कम हो जाता है। कई किसान सिर्फ 30 प्रतिशत सामान्य दाना और 70 प्रतिशत अजोला देकर मुर्गियों को स्वस्थ रख रहे हैं। इससे न सिर्फ खर्चा बचता है, बल्कि मुर्गियां तेजी से बढ़ती हैं, अंडे ज्यादा आते हैं और देसी नस्लों जैसे कड़कनाथ की ग्रोथ भी दोगुनी हो जाती है।

अजोला एक छोटी फर्न जैसी जलीय पौधा है, जो पानी की सतह पर तैरती हुई तेजी से बढ़ती है। यह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है, मिलावट का कोई डर नहीं।

पोल्ट्री में अजोला के फायदे क्या हैं?

किसान भाई, अजोला को मुर्गियों के दाने में मिलाकर देने से कमाल के नतीजे मिलते हैं। दाने का 70 प्रतिशत हिस्सा अजोला से रिप्लेस कर सकते हैं, यानी खर्च सीधे 70 प्रतिशत तक गिर जाता है। मुर्गियां स्वस्थ रहती हैं, बीमारियां कम लगती हैं। ग्रोथ तेज होती है, खासकर देसी नस्लों में। अंडे की उत्पादन बढ़ जाती है और क्वालिटी अच्छी रहती है। मिलावटी दाने से बचाव होता है, जो आजकल बड़ी समस्या है। कुल मिलाकर, पोल्ट्री फार्मिंग सस्टेनेबल और मुनाफेदार बन जाती है।

अजोला में प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, साथ ही जरूरी मिनरल्स और विटामिन्स। यह मुर्गियों को पूरा पोषण देती है।

अजोला की खेती कैसे करें?

अजोला उगाना बहुत आसान और सस्ता है। पानी वाले टैंक, टब या छोटे गड्ढे में शुरू कर सकते हैं। एक बार लगा दी तो रोजाना कटाई करके मुर्गियों को खिला सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र ट्रेनिंग देते हैं, वहां से सीखें। पानी की सतह पर यह तेजी से फैलती है, इसलिए जगह कम में भी अच्छी मात्रा मिल जाती है। रोजाना ताजा काटकर खिलाएं, मुर्गियां शौक से खाती हैं।

किसान भाइयों, आजकल दाने के दाम आसमान छू रहे हैं, ऐसे में अजोला जैसा देसी और सस्ता विकल्प अपनाना समझदारी है। 70 प्रतिशत दाना अजोला से बदलें, खर्चा बचाएं और मुर्गियां स्वस्थ रखें। अपने नजदीकी कृषि केंद्र से संपर्क करें, ट्रेनिंग लें और शुरू हो जाएं। यह छोटा कदम आपकी पोल्ट्री फार्मिंग को नई ऊंचाई देगा।

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  • Shashikant

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