उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। अब केला उत्पादक किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (NSC), नई दिल्ली के सहयोग से बाराबंकी जिले के राजकीय कृषि प्रक्षेत्र मालिनपुर में 31.82 हेक्टेयर क्षेत्र में केला उत्तक संवर्धन लैब (टिश्यू कल्चर लैब) की स्थापना की जाएगी। यह लैब उत्तर प्रदेश में केला खेती को नई ऊँचाई देगी, क्योंकि इससे उच्च गुणवत्ता वाले, रोगमुक्त और एकसमान पौधे किसानों को उपलब्ध होंगे।
टिश्यू कल्चर लैब क्यों जरूरी है
केला एक ऐसी फसल है जो उत्तर प्रदेश में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। राज्य में केले का उत्पादन लाखों टन है, लेकिन पारंपरिक तरीके से पौधे लगाने से रोग (जैसे फ्यूजेरियम विल्ट, सिगाटोका) फैलते हैं और पैदावार कम हो जाती है। टिश्यू कल्चर तकनीक से पौधे लैब में तैयार किए जाते हैं, जो पूरी तरह रोगमुक्त, एकसमान और उच्च उत्पादन देने वाले होते हैं। एक टिश्यू कल्चर पौधा पारंपरिक पौधे से 20-30% ज्यादा फल देता है और फल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। यह लैब (Banana Tissue Culture Lab Uttar Pradesh) किसानों को सस्ते दाम पर ऐसे पौधे उपलब्ध कराएगी, जिससे खेती की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
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बाराबंकी में लैब की स्थापना – क्या होगा फायदा
बाराबंकी का मालिनपुर राजकीय कृषि प्रक्षेत्र पहले से ही उन्नत खेती के लिए जाना जाता है। अब 31.82 हेक्टेयर क्षेत्र में यह आधुनिक टिश्यू कल्चर लैब बनेगी, जो NSC की तकनीकी विशेषज्ञता से सुसज्जित होगी। NSC भारत सरकार का उपक्रम है, जो उच्च गुणवत्ता वाले बीज और पौधे किसानों तक पहुँचाता है। इस लैब से सालाना लाखों टिश्यू कल्चर केला पौधे उत्पादित होंगे, जो बाराबंकी सहित लखनऊ, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोंडा जैसे आसपास के जिलों के किसानों को मिलेंगे।
फायदे:
- रोगमुक्त पौधे से फसल का नुकसान कम
- एकसमान फल, बाजार में बेहतर दाम
- कम समय में ज्यादा पैदावार
- निर्यात योग्य केला उत्पादन बढ़ेगा
योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को केला उत्पादन में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य में केला खेती का क्षेत्रफल बढ़ रहा है और यह लैब किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी।
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टिश्यू कल्चर केला पौधों की विशेषताएँ
टिश्यू कल्चर से बने पौधे ग्रैंड नेन, G-9 जैसी उन्नत वैरायटी के होते हैं। ये पौधे 9-12 महीने में फल देने लगते हैं और एक पौधा 40-50 किलो तक फल देता है। पारंपरिक पौधों की तुलना में ये जल्दी तैयार होते हैं और रोगों से लड़ने की क्षमता ज्यादा होती है। किसान इन्हें लगाकर कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
किसानों के लिए क्या करें
यह लैब शुरू होने पर किसान NSC या कृषि विभाग से संपर्क करके पौधे प्राप्त कर सकते हैं। अभी से केला खेती की तैयारी शुरू करें – मिट्टी की जाँच कराएँ, ड्रिप सिंचाई का इंतजाम करें। सरकार की अन्य योजनाओं जैसे नंदिनी कृषक समृद्धि या PM किसान से भी जुड़ें।
योगी सरकार का यह कदम साबित करता है कि उत्तर प्रदेश खेती में नई क्रांति ला रहा है। बाराबंकी की यह टिश्यू कल्चर लैब केला किसानों के लिए वरदान बनेगी। उच्च गुणवत्ता वाले पौधों से फसल बढ़ेगी, कमाई बढ़ेगी और राज्य का नाम रोशन होगा।
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