उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में बासमती धान उगाने वालों के लिए एक ऐसी खुशखबरी है जो उनकी कमाई और फसल की गुणवत्ता दोनों को नई ऊंचाई देगी। केंद्र सरकार की एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) ने यहां देश का दूसरा बासमती बीज उत्पादन और प्रशिक्षण केंद्र खोलने का फैसला किया है।
यह केंद्र न सिर्फ शुद्ध बीजों का उत्पादन करेगा, बल्कि किसानों को आधुनिक खेती के गुर भी सिखाएगा। अमरिया तहसील के टांडा बिजैसी गांव में करीब सात एकड़ जमीन पर यह सेंटर बनेगा, जो जैविक खेती का भी प्रदर्शन फार्म होगा। पीलीभीत सांसद जितिन प्रसाद के प्रयासों से यह संभव हुआ, और अब बासमती निर्यात को नई दिशा मिलेगी।
यह केंद्र बासमती धान के शोध, बीज बनावट, किसानों की ट्रेनिंग और जैविक तरीकों के प्रदर्शन के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनेगा। पहले यह केंद्र दिल्ली के पास था, लेकिन अब पीलीभीत में दूसरा बनने से उत्तर भारत के किसानों को घर के पास ही मदद मिलेगी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के सहयोग से एपीडा ने प्रस्ताव को हरी झंडी दी, और यूपी सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने जमीन आवंटित कर दी। जल्द ही यहां रिसर्च लैब, ट्रेनिंग हॉल, बीज प्रोसेसिंग यूनिट और जैविक फार्म का काम शुरू हो जाएगा।
किसानों को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?
किसान भाई, बासमती धान की खेती में सबसे बड़ी दिक्कत तो घटिया बीजों से होती है फसल कमजोर पड़ जाती है, रोग लग जाते हैं और बाजार में कम दाम मिलते हैं। इस सेंटर से शुद्ध और प्रमाणित बीज आसानी से मिलेंगे, जिससे आपकी लागत घटेगी और उपज की क्वालिटी चमकेगी। यहां उन्नत किस्मों जैसे पूसा बासमती 1121 या 1509 का प्रदर्शन होगा, साथ ही कीट-रोग प्रबंधन, जैविक खाद बनाना और बीज उत्पादन के तरीके सिखाए जाएंगे। व्यावहारिक ट्रेनिंग से आप आधुनिक टूल्स सीखेंगे, जैसे ट्रेसिबिलिटी और अवशेष कंट्रोल, जो निर्यात के लिए जरूरी हैं।
पीलीभीत और आसपास के जिलों के साथ-साथ उत्तराखंड के किसान भी फायदा लेंगे। निर्यातक, बीज बेचने वाले, प्रोसेसर और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) यहां क्वालिटी चेक, डीएनए टेस्टिंग और बाजार की जानकारी पा सकेंगे। इससे बासमती के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरने में आसानी होगी, और प्रीमियम दाम मिलने का रास्ता खुलेगा। कई किसान बता रहे हैं कि अच्छे बीज से उनकी पैदावार 20-25 प्रतिशत बढ़ गई, और अब निर्यात का सपना साकार होगा।
सेंटर कैसे बदलेगा इलाके की तस्वीर?
यह सेंटर सिर्फ बीज नहीं, बल्कि पूरे चेन को मजबूत करेगा। यहां विश्वस्तरीय लैब बनेगी, जहां बीज की जांच होगी। ट्रेनिंग से युवा एग्री-बिजनेस में कूदेंगे, रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। अप्रत्यक्ष रूप से गांवों में छोटे उद्योग लगेंगे, जैसे पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट। जितिन प्रसाद ने कहा, केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों का जीवन आसान बनाने, उनकी आय दोगुनी करने और बासमती जैसी ऊंची कीमत वाली फसलों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। पीलीभीत का यह सेंटर इसी दिशा में एक मजबूत कदम है।
स्थानीय किसान और एफपीओ वाले इसे ऐतिहासिक मान रहे हैं। उनका कहना है कि वैज्ञानिक मदद से बासमती का निर्यात बढ़ेगा, और पीलीभीत बासमती का गढ़ बन जाएगा।
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