BHU के पशु चिकित्सकों का कमाल! देसी से पैदा कराई साहीवाल, अब एक गाय से होंगी 50 बछिया

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पशु चिकित्सा विज्ञान संकाय ने सरोगेट मदर तकनीक से एक बड़ी सफलता हासिल की है। नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी को मिर्जापुर के राजीव गांधी साउथ कैंपस के डेयरी फार्म में एक देसी गाय ने साहीवाल नस्ल की स्वस्थ मादा बछिया को जन्म दिया। ये छठवीं साहीवाल बछिया है जो इस तकनीक से पैदा हुई है। ये उपलब्धि देशी नस्लों जैसे गंगातिरी और साहीवाल के संरक्षण और अनुवांशिक उन्नयन के लिए चल रहे प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो भारत सरकार के राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत चल रहा है।

डॉ. मनीष कुमार, जो इस प्रोजेक्ट के प्रमुख हैं, बताते हैं कि सामान्य तरीके से एक गाय पूरे जीवन में सिर्फ 8 से 10 बच्चे देती है। लेकिन सरोगेट मदर तकनीक से अब एक ही गाय से 40 से 50 बछियां पैदा की जा सकती हैं। ये तकनीक 95 प्रतिशत तक सफल रही है। सबसे खास बात ये कि लिंग परीक्षित सीमन (सेक्स-सॉर्टेड सीमन) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे सिर्फ मादा बछियां ही जन्म ले रही हैं। बछड़े नहीं पैदा हो रहे, जो किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है।

सरोगेट तकनीक कैसे काम करती है

इस विधि में साहीवाल नस्ल की बेहतरीन गाय से अंडे निकाले जाते हैं, फिर उन्हें फर्टिलाइज कर एम्ब्रियो बनाया जाता है। ये एम्ब्रियो देसी गाय (सरोगेट मदर) के गर्भ में ट्रांसफर कर दिया जाता है। सरोगेट गाय बच्चे को सिर्फ 9 महीने तक पालती है, लेकिन बच्चे में सरोगेट के गुण नहीं आते। बच्चा पूरी तरह साहीवाल नस्ल का होता है। डॉ. कौस्तुभ किशोर सर्राफ और डॉ. अजीत जैसे वैज्ञानिकों की टीम ने आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन (एआई) और एम्ब्रियो ट्रांसफर की मदद से ये सफलता हासिल की।

डॉ. मनीष कुमार कहते हैं, “सरोगेट मदर तकनीक से जिस गाय में बच्चा पलता है, उसका एक भी गुण बच्चे में नहीं आता। जिस ब्रीड का सीमन डालेंगे, वही बच्चे पैदा होंगे।” ये तकनीक पर्यावरण अनुकूल है और दूध उत्पादन बढ़ाने में बहुत उपयोगी साबित होगी। साहीवाल नस्ल दूध देने में बेहतरीन है, और अब देसी गायों से भी ऐसी बछियां पैदा की जा रही हैं।

किसानों के लिए क्या फायदा

ये प्रयोग किसानों के लिए वरदान साबित होगा। पशुपालन करने वाले भाइयों को अब सिर्फ बछियां मिलेंगी, जो दूध देंगी। बछड़ों का बोझ नहीं रहेगा। दूध उत्पादन बढ़ेगा, आय बढ़ेगी और देशी नस्लों का संरक्षण भी होगा। ये तकनीक आने वाले समय में किसानों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि वे भी बेहतर नस्ल की गायें रख सकें। डॉ. कुमार कहते हैं कि ये नई तकनीक से एक-एक स्वस्थ गाय से कई बछियां पैदा की जा सकती हैं।

किसान भाइयों, ये सफलता पशुपालन में क्रांति ला सकती है। अगर आप गाय-भैंस पालते हैं तो नई तकनीकों की जानकारी लेते रहें। बीएचयू के वैज्ञानिकों की ये उपलब्धि देशी नस्लों को बचाने और किसानों को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

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  • Shashikant

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