जानिए क्यों किसान इस नस्ल के मुर्गे को “मुनाफे की मशीन” कहते हैं, 2 साल में कमाई होगी 15 लाख रूपये तक

Brahma Chicken Breed: किसान भाइयों, आज हम बात करेंगे एक ऐसी चिकन नस्ल की, जो भारत की मिट्टी से निकली है और आज पूरी दुनिया में अपनी ताकत दिखा रही है – ब्रह्मा चिकन। इसका नाम ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़ा है, जो असम, अरुणाचल और चीन के दक्षिणी हिस्से से होकर बहती है। 19वीं सदी में इस इलाके की बड़ी-बड़ी देसी मुर्गियों को अमेरिका और यूरोप ले जाया गया। वहाँ अंग्रेजी और अमेरिकी ब्रीडर्स ने इसे और मजबूत बनाया। लेकिन असल में यह हमारी अपनी देसी नस्ल है – विशाल शरीर, शांत स्वभाव और अच्छी मांस क्षमता वाली।

ब्रह्मा चिकन की खासियतें – क्या है इसमें खास

ब्रह्मा चिकन अपनी विशालता के लिए मशहूर है। यह दुनिया की सबसे बड़ी चिकन नस्लों में से एक है। तीन मुख्य रंगों में मिलती है – लाइट, डार्क और बफ। वयस्क मुर्गा (कॉक) का वजन 6 से 7 किलोग्राम तक और मुर्गी (हेन) का 4 से 5 किलोग्राम तक होता है। कंधे की ऊँचाई 60-70 सेमी तक पहुँचती है। पंख बहुत घने, मुलायम और पैरों तक फैले हुए होते हैं, जिससे यह ठंड में अच्छी रहती है। सिर छोटा, मजबूत और “पी कॉम्ब” (pea comb) वाला होता है। स्वभाव बहुत शांत, मिलनसार और बच्चों के लिए भी सुरक्षित। भारी शरीर की वजह से यह उड़ना कम पसंद करती है।

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जिम्बाब्वे में ब्रह्मा चिकन क्यों पसंद की जा रही है

जिम्बाब्वे में पोल्ट्री फार्मिंग मुख्य रूप से मांस और अंडे के लिए होती है। ब्रह्मा चिकन यहाँ दो बड़े कारणों से पसंद की जा रही है। पहला – इसका स्वभाव बहुत शांत है। अन्य नस्लों की तुलना में ब्रह्मा भीड़-भाड़ वाले फार्म में भी अच्छी तरह रहती है और झगड़े कम करती है। दूसरा – इसका बहुत बड़ा आकार और मांस उत्पादन। 6-7 किलो वजन वाला मुर्गा मांस के लिए बहुत अच्छा होता है। एक ब्रह्मा मुर्गा से 4-5 किलो तक मांस मिल सकता है, जो स्थानीय बाजार में अच्छा दाम देता है।

हालाँकि यह नस्ल धीरे परिपक्व होती है और 8-12 महीने में पूरी तरह तैयार होती है, लेकिन इसका मांस स्वादिष्ट और मुलायम होता है। जिम्बाब्वे के किसान इसे मिश्रित खेती (dual-purpose) के लिए इस्तेमाल करते हैं। इससे सालाना 150-200 अंडे भी मिलते हैं, जो बड़े और भूरे रंग के होते हैं। इस वजह से यह नस्ल किसानों को मांस और अंडे दोनों में फायदा देती है।

जिम्बाब्वे की गर्मी में ब्रह्मा चिकन कैसे पालें

ब्रह्मा चिकन भारी शरीर और घने पंखों की वजह से गर्मी में थोड़ी परेशानी महसूस करती है। लेकिन जिम्बाब्वे के किसान इसे आसानी से अनुकूलित कर रहे हैं। मुख्य सावधानियाँ रखने से यह नस्ल वहाँ की गर्म जलवायु में भी अच्छी तरह चलती है। पर्याप्त छाया और हवादार शेड बनाना जरूरी है। दिन में 2-3 बार ताज़ा पानी दें। फर्श पर नमी न रहने दें। गर्मी के दिनों में हल्का चारा दें और दिन के सबसे गर्म समय में छाया में रखें। इन सावधानियों से ब्रह्मा चिकन जिम्बाब्वे की गर्मी में भी अच्छा प्रदर्शन करती है।

ब्रह्मा चिकन पालन के फायदे

ब्रह्मा चिकन पालन से किसानों को कई फायदे मिलते हैं। इसका मांस उत्पादन बहुत अच्छा है – 6-7 किलो तक वजन और बाजार में अच्छा भाव। अंडे सालाना 150-200 मिलते हैं, जो बड़े और भूरे होते हैं। स्वभाव बहुत शांत होने से बच्चे और परिवार के लिए सुरक्षित रहती है। उड़ान कम होने से फेंस से बाहर नहीं निकलती। यह नस्ल जिम्बाब्वे की गर्म जलवायु में भी अनुकूलित हो जाती है। इन सभी कारणों से यह नस्ल किसानों की पहली पसंद बन रही है।

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ब्रह्मा चिकन पालन की लागत (1000 चूजों के लिए)

ब्रह्मा चिकन की खेती शुरू करने में सबसे पहले चूजे खरीदने पड़ते हैं। 1 दिन पुराने चूजे का भाव 80-120 रुपये तक होता है। 1000 चूजे के लिए औसत खर्च 1 लाख रुपये।

शेड और उपकरण: 1000 चूजों के लिए 500-600 वर्ग फीट का शेड चाहिए। शेड बनाने में 1.5-2 लाख रुपये लगते हैं (लकड़ी, जाली, छत, फर्श)। फीडर, वाटरर और अन्य सामान में 30-50 हजार रुपये। कुल शुरुआती लागत 3-4 लाख रुपये। अगर आप सिर्फ मांस के लिए पालते हैं और अंडे नहीं बेचते, तो भी 15-18 लाख का मुनाफा आसानी से हो सकता है।

ब्रह्मा चिकन का पालन कैसे शुरू करें

अगर आप ब्रह्मा चिकन पालन शुरू करना चाहते हैं, तो पहले 50-100 चूजे से शुरुआत करें। अच्छा वेंटिलेशन वाला शेड बनाएँ। संतुलित चारा दें – मक्का, सोयाबीन और हरा चारा। 8-12 महीने में बेचने लायक हो जाते हैं। बाजार में मांस और अंडे दोनों बेच सकते हैं। सही देखभाल से यह नस्ल आपको अच्छा मुनाफा दे सकती है।

ब्रह्मा चिकन ब्रह्मपुत्र घाटी की देसी नस्ल से निकली है, लेकिन आज यह जिम्बाब्वे जैसे देशों में भी सफल हो रही है। इसका शांत स्वभाव, बड़ा आकार और अच्छा उत्पादन इसे किसानों की पसंद बनाता है। अगर आप मांस और अंडे के लिए अच्छी नस्ल ढूंढ रहे हैं, तो ब्रह्मा एक बेहतरीन विकल्प है। सही देखभाल और प्रबंधन से यह नस्ल आपको अच्छा मुनाफा दे सकती है।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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