रबी सीजन में गेहूं उगाने वाले किसान भाइयों के लिए अब दूसरी सिंचाई का मौका है। खासकर नवंबर में अगेती किस्में बोने वालों के खेतों में फसल अच्छी बढ़वार ले चुकी है। लेकिन इसी समय अगर सिंचाई में थोड़ी सी चूक हुई तो पत्तियां पीली पड़ सकती हैं, जड़ें कमजोर हो सकती हैं और पूरी फसल पर असर पड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रदीप बिसेन बताते हैं कि दूसरी सिंचाई फसल की सेहत और पैदावार के लिए बहुत अहम होती है। सही तरीके से पानी दिया जाए तो दाने मोटे भरते हैं, बालियां लंबी बनती हैं और उपज बढ़ जाती है। लेकिन जलभराव या गलत टाइमिंग से बड़ा नुकसान हो सकता है।
उत्तर भारत के कई इलाकों जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में किसान इसी स्टेज पर पहुंच चुके हैं। डॉ बिसेन कहते हैं कि अगेती गेहूं में बुवाई के 40 से 45 दिन बाद दूसरी सिंचाई करना सबसे अच्छा रहता है। इस समय पौधे कल्ले फूटने और बढ़वार की अवस्था में होते हैं, पानी मिलने से नई ताकत आती है। लेकिन कई किसान भाई जल्दबाजी में या ज्यादा पानी दे देते हैं, जो उल्टा नुकसान करता है।
जलभराव सबसे बड़ी गलती
डॉ प्रदीप बिसेन की सबसे बड़ी सलाह यही है कि दूसरी सिंचाई में खेत में पानी जमा बिल्कुल न होने दें। जलभराव से जड़ों को सांस लेने में दिक्कत होती है, पौधे की पकड़ ढीली पड़ जाती है और तेज हवा चलने पर फसल गिर सकती है। गिरने से दाने अच्छे नहीं भरते और पैदावार काफी कम हो जाती है। इसलिए पानी इतना ही दें कि मिट्टी गीली हो जाए, लेकिन कीचड़ न बने। खेत की मेढ़ें मजबूत रखें और पानी का निकास अच्छा हो। कई किसानों ने पिछले सालों में जलभराव की वजह से बड़ा घाटा उठाया है।
शाम का समय सिंचाई के लिए सबसे बढ़िया है। शाम को पानी देने से रात भर नमी बनी रहती है और सुबह तक खेत सूख जाता है। दिन में तेज धूप में पानी देने से पौधे झुलस सकते हैं। हल्की सिंचाई करें, ज्यादा पानी एक बार में न डालें। अगर मिट्टी भारी है तो और भी सावधानी बरतें।
पत्तियां पीली पड़ने की वजह और तुरंत इलाज
अगर दूसरी सिंचाई के बाद पत्तियां पीली दिखने लगें तो घबराएं नहीं, लेकिन देरी भी न करें। डॉ बिसेन बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में ये जलभराव या फफूंद जनित रोग की वजह से होता है। नमी ज्यादा होने से रोग फैलते हैं। समाधान आसान है मैन्कोज़ेब आधारित दवा का छिड़काव कर दें। ये दवा सस्ती और आसानी से मिल जाती है, रोग पर तुरंत काबू पा लेती है। साथ ही खेत की अच्छे से निगरानी करें, अगर कहीं धब्बे या पीला पाउडर दिखे तो वैज्ञानिक सलाह लें।
यूरिया का सही इस्तेमाल
सिंचाई के साथ खाद का बैलेंस भी जरूरी है। डॉक्टर साहब की सलाह है कि दूसरी सिंचाई के 3-4 दिन बाद यूरिया की बाकी मात्रा जरूर डालें। इससे पौधे नाइट्रोजन पाकर हरे-भरे रहते हैं, पत्तियां पीली नहीं पड़तीं और बढ़वार तेज होती है। कई किसान ये भूल जाते हैं और बाद में फसल कमजोर हो जाती है। संतुलित खाद से दाने मोटे और चमकदार बनते हैं, बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।
कुल मिलाकर दूसरी सिंचाई फसल की सेहत का टर्निंग पॉइंट है। हल्का पानी, शाम का समय, जलभराव से बचाव और समय पर यूरिया इन छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो गेहूं की फसल लहलहाएगी। अपने इलाके के कृषि विशेषज्ञ से भी बात करें और मौसम का पूर्वानुमान देखते रहें। इस रबी सीजन में सतर्क रहकर बंपर पैदावार लें।
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