फसल में पोषण की कमी के लक्षण पहचानिए – पत्तियों से जानें कौन-सा उर्वरक डालें

Fasal Mein Poshan Ki Kami Ke Lakshan: किसान भाइयों, फसल की अच्छी बढ़वार, हरी-भरी पत्तियाँ और भरपूर पैदावार के लिए मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बहुत जरूरी है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग (प्रसार शिक्षा एवं प्रशिक्षण ब्यूरो) द्वारा जारी एक उपयोगी इन्फोग्राफिक में मक्का की पत्तियों के माध्यम से विभिन्न पोषक तत्वों की कमी के स्पष्ट लक्षण दिखाए गए हैं। ये लक्षण देखकर किसान भाई आसानी से समझ सकते हैं कि उनकी फसल में किस पोषक तत्व की कमी है। अगर समय रहते इनकी कमी पूरी कर दी जाए, तो फसल की पैदावार 20-30% तक बढ़ सकती है। आइए इन लक्षणों को विस्तार से समझते हैं और उनके समाधान भी जानते हैं।

स्वस्थ पत्ता कैसा होता है

स्वस्थ पत्ता गहरे हरे रंग का, चमकदार और पूरी तरह हरा होता है। इसमें कोई पीला या भूरा धब्बा नहीं होता। अगर आपकी फसल की पत्तियाँ ऐसी दिख रही हैं, तो पोषक तत्वों का संतुलन सही है। लेकिन जब पत्तियाँ पीली, भूरी, बैंगनी या सफेद होने लगती हैं, तो समझ लीजिए कि मिट्टी में किसी पोषक तत्व की कमी है।

Fasal Mein Poshan Ki Kami Ke Lakshan

नाइट्रोजन (Nitrogen) की कमी के लक्षण

नाइट्रोजन की कमी सबसे आम है। पत्तियाँ नीचे से ऊपर की ओर पीली पड़ने लगती हैं। पुरानी पत्तियाँ सबसे पहले प्रभावित होती हैं। पौधा कमजोर, पतला और फूट कम आती है। समाधान: पहली और दूसरी सिंचाई में यूरिया 45-50 किलो प्रति हेक्टेयर (18-20 किलो प्रति एकड़) डालें।

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पोटैशियम (Potassium) की कमी

पत्तियाँ किनारों से पीली या भूरी पड़ने लगती हैं, बीच का हिस्सा हरा रहता है। पत्तियाँ झुलसी हुई दिखती हैं और किनारे जलने लगते हैं। तने कमजोर हो जाते हैं। समाधान: MOP (म्यूरेट ऑफ पोटाश) 50-60 किलो प्रति हेक्टेयर दें।

फॉस्फेट (Phosphate) की कमी

पत्तियाँ बैंगनी या लाल-बैंगनी हो जाती हैं। पुरानी पत्तियाँ सबसे पहले प्रभावित होती हैं। जड़ें कमजोर रहती हैं और पौधा छोटा रहता है। समाधान: बुवाई में DAP या SSP 60-80 किलो प्रति हेक्टेयर डालें।

बोरॉन (Boron) की कमी

पत्तियाँ मुड़ जाती हैं, किनारे पीले पड़ते हैं और बीच में भूरा धब्बा बन जाता है। फूल और फल बनने में दिक्कत होती है। समाधान: बोरॉन 20% 1-2 किलो प्रति हेक्टेयर स्प्रे या मिट्टी में मिलाएँ।

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मैग्नीशियम (Magnesium) की कमी

पत्तियाँ हल्की पीली पड़ जाती हैं, लेकिन बीच की नस हरी रहती है। पत्तियाँ धारीदार दिखती हैं। समाधान: मैग्नीशियम सल्फेट 5-10 किलो प्रति हेक्टेयर स्प्रे करें।

आयरन (Iron) की कमी

पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं, लेकिन नसें हरी रहती हैं। नई पत्तियाँ सबसे पहले प्रभावित होती हैं। समाधान: फेरस सल्फेट 5-10 किलो प्रति हेक्टेयर स्प्रे करें।

इन लक्षणों से कैसे बचें – संतुलित उर्वरक का उपयोग

किसान भाइयों, ये लक्षण मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के स्पष्ट संकेत हैं। इनकी कमी से फसल कमजोर हो जाती है, पैदावार घटती है और कीट-रोग आसानी से लग जाते हैं। इनसे बचाव के लिए:

  • मिट्टी की जाँच जरूर कराएँ।
  • बुवाई में गोबर खाद 20-25 टन प्रति हेक्टेयर मिलाएँ।
  • संतुलित उर्वरक (NPK) का उपयोग करें।
  • जिंक, बोरॉन, आयरन जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट स्प्रे करें।
  • नियमित सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण करें।

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की यह जानकारी किसानों के लिए बहुत उपयोगी है। अगर आपके खेत में भी ये लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत मिट्टी टेस्ट कराएँ और संतुलित उर्वरक डालें। इससे फसल हरी-भरी रहेगी, पैदावार बढ़ेगी और मुनाफा ज्यादा होगा।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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