किसान भाइयों के लिए मौसम की मार बढ़ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य में अगले पांच दिनों तक शुष्क मौसम रहने का अनुमान जताया है। न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे रहेगा, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास। सबसे बड़ी चिंता घने से बहुत घने कोहरे, शीतलहर और पाले की है। बारिश की कोई संभावना नहीं है (10 जनवरी तक), लेकिन ये ठंडी स्थितियां रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। IMD ने खास कृषि संबंधी सलाह जारी की है, ताकि किसान भाई समय पर उपाय अपनाकर फसल बचाएं।
IMD के अनुसार, शीतलहर तब होती है जब अधिकतम तापमान मौसमी सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री कम हो। अगर ये 6.5 डिग्री से ज्यादा गिर जाए तो अत्यधिक शीतलहर मानी जाती है। राज्य में न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना है, जिससे पाला जमने का खतरा बढ़ गया है।
रबी फसलों पर क्या असर पड़ सकता है
गेहूं, सरसों, आलू और गन्ना जैसी फसलें इस समय संवेदनशील अवस्था में हैं। पाला और शीतलहर से पत्तियां जड़ सकती हैं, कंद विकास रुक सकता है और पैदावार में 20-40% तक की कमी आ सकती है। घना कोहरा नमी बढ़ाता है, जिससे फफूंद जनित रोग जैसे तना सड़न और सफेद रतुआ फैल सकते हैं। किसान भाई अंशुमान सिंह जैसे विशेषज्ञ कहते हैं कि जनवरी का ये दौर फसल की सेहत के लिए निर्णायक है।
IMD की कृषि सलाह
IMD ने किसानों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
कोहरे और पाले से बचाव के लिए दोपहर के समय सिंचाई करें। गेहूं की कलियां निकलने की अवस्था में, सरसों में फूल आने पर और सब्जियों की फसलों के लिए ये बहुत जरूरी है। सुबह-सुबह सिंचाई बिल्कुल न करें, क्योंकि ठंडी नमी से रोग फैल सकते हैं।
सरसों की फसल में तना सड़न और सफेद रतुआ रोग का खतरा है। निर्धारित चरणों में उचित फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
आलू और गन्ने में उचित जल निकास सुनिश्चित करें। रोगग्रस्त खेतों से पानी का बहाव सीमित रखें, ताकि रोग न फैले।
पशुपालकों के लिए खास सलाह: ठंड से बचाने के लिए रात में पशुओं को घर के अंदर रखें। गर्म पानी दें, ठंडी हवाओं से बचाएं और पर्याप्त वेंटिलेशन रखें। खनिज मिश्रण और आयोडीन युक्त नमक का पूरक आहार दें।
किसान भाइयों, मौसम अपडेट पर नजर रखें। IMD की आधिकारिक वेबसाइट या कृषि विभाग से नियमित जानकारी लें। ये छोटे उपाय अपनाकर आप अपनी फसल को बड़ा नुकसान होने से बचा सकते हैं। पाला और कोहरे से सतर्क रहें, ताकि रबी की मेहनत बेकार न जाए।
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