खेती और मधुमक्खी पालन, फूल वाली फसलों में 20% तक उत्पादन बढ़ाने का प्राकृतिक तरीका

Kheti Aur Madhumakkhi Palan: किसान भाइयों, आज का समय खेती में नई तकनीकों और प्राकृतिक तरीकों को अपनाने का है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग (प्रसार शिक्षा एवं प्रशिक्षण ब्यूरो) द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण संदेश में बताया गया है कि फूल वाली फसलों में मधुमक्खियों द्वारा परागण (pollination) की क्रिया से उत्पादन में लगभग 20% की वृद्धि हो सकती है। यह एक छोटी सी लेकिन बहुत बड़ी बात है। मधुमक्खियाँ न केवल शहद का उत्पादन करती हैं, बल्कि फसलों की पैदावार बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। अगर हम मधुमक्खियों का सही तरीके से संरक्षण करें, तो खेती में लागत कम होगी और आय ज्यादा होगी। साथ ही शहद जैसी औषधि भी मिलेगी, जो स्वास्थ्य के लिए रामबाण है।

मधुमक्खियाँ फसल उत्पादन कैसे बढ़ाती हैं

मधुमक्खियाँ फूलों से रस (नेक्टर) और पराग (pollen) इकट्ठा करती हैं। इस दौरान वे एक फूल से दूसरे फूल पर जाती हैं, जिससे परागण होता है। सरसों, सूरजमुखी, कपास, मूँगफली, चना, मटर, आम, अमरूद, लीची, सब्जियाँ जैसे टमाटर, बैंगन, मिर्च और फूलों की फसलों में मधुमक्खियों का परागण बहुत जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन फसलों में मधुमक्खियों की मौजूदगी से उत्पादन 15 से 30% तक बढ़ सकता है। औसतन 20% की वृद्धि बहुत आम है। बिना मधुमक्खियों के परागण में कमी से फूल झड़ जाते हैं, फल छोटे रहते हैं और पैदावार घट जाती है।

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फूल आने के समय कीटनाशक का उपयोग न करें

कई किसान भाई फूल आने के समय कीटों से बचाव के लिए कीटनाशक छिड़कते हैं। लेकिन यह मधुमक्खियों के लिए घातक होता है। कीटनाशक मधुमक्खियों को मार देते हैं या उन्हें कमजोर कर देते हैं, जिससे परागण रुक जाता है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की सलाह है कि फूल आने के समय (फूल की अवस्था में) किसी भी कीटनाशक का उपयोग न करें। अगर कीट बहुत ज्यादा हैं, तो नीम आधारित या जैविक कीटनाशक का इस्तेमाल करें। इससे मधुमक्खियाँ सुरक्षित रहती हैं और फसल का परागण अच्छा होता है।

मधुमक्खी पालन से किसानों की आय दोगुनी

मधुमक्खी पालन (beekeeping) न केवल फसल उत्पादन बढ़ाता है, बल्कि शहद से अतिरिक्त आय भी देता है। एक छोटा बॉक्स (beehive) से साल में 15-25 किलो शहद मिल सकता है। शहद का बाजार भाव 300-600 रुपये किलो तक होता है। एक किसान 10-20 बॉक्स से सालाना 50,000 से 2 लाख रुपये तक कमा सकता है। शहद एक प्राकृतिक औषधि है – यह खाँसी, जुकाम, पाचन, इम्यूनिटी और त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद है। बाजार में शुद्ध शहद की डिमांड बहुत है।

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मधुमक्खी पालन की लागत बहुत कम है। एक बॉक्स 5,000-8,000 रुपये का आता है, लेकिन सरकार की योजनाओं से 50-80% सब्सिडी मिलती है। उत्तर प्रदेश में मधुमक्खी पालन योजना के तहत प्रशिक्षण और उपकरण मुफ्त या सस्ते मिलते हैं।

मधुमक्खी पालन कैसे शुरू करें

  • पहले 5-10 बॉक्स से शुरुआत करें।
  • स्थानीय कृषि विभाग या मधुमक्खी पालन केंद्र से प्रशिक्षण लें।
  • सरसों, सूरजमुखी, चना, आम जैसे फूलों वाले खेतों के पास बॉक्स रखें।
  • बॉक्स को छाया में रखें और पानी का इंतजाम करें।
  • फसल कटाई के बाद बॉक्स को सुरक्षित स्थान पर रखें।

मधुमक्खी पालन अपनाएँ, खेती और आय दोनों बढ़ाएँ

किसान भाइयों, मधुमक्खियाँ हमारी फसलों की दोस्त हैं। फूल वाली फसलों में परागण से 20% उत्पादन बढ़ाने के साथ शहद से अतिरिक्त कमाई का रास्ता भी खुलता है। फूल आने के समय कीटनाशक का उपयोग बंद करें, मधुमक्खियों को बचाएँ और मधुमक्खी पालन शुरू करें। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में है। इस सर्दी में सरसों की फसल में मधुमक्खियाँ लाएँ, फसल हरी-भरी रहेगी और आपकी जेब भी भारी होगी।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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