महाराष्ट्र सरकार ने खेती की दिशा बदलने वाला एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि अगले दो वर्षों में राज्य की 25 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को पूरी तरह प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाया जाएगा। यह नेचुरल फार्मिंग मिशन को मिशन मोड पर चलाने की योजना है, जो सस्टेनेबल और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देगी।
आजकल जलवायु परिवर्तन, सूखा, बाढ़ और मिट्टी की घटती उर्वरता से किसान परेशान हैं। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर ज्यादा खर्च हो रहा है, कर्ज बढ़ रहा है। प्राकृतिक खेती इन सब समस्याओं का स्थायी समाधान है। सरकार इसे पूरे जोर से लागू कर रही है, ताकि किसान आत्मनिर्भर बनें और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी सुरक्षित रहे।
यह मिशन साल 2014 से चल रहा है और अब तक राज्य में करीब 14 लाख हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती सफलतापूर्वक हो रही है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी मुंबई में एक सम्मेलन में इसे तेज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऑर्गेनिक और नेचुरल फार्मिंग में अंतर समझें नेचुरल फार्मिंग ज्यादा आसान और सस्ती है। सीएम फडणवीस ने बताया कि प्राकृतिक खेती स्थानीय संसाधनों पर आधारित है, जिसमें जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत जैसे देसी इनपुट इस्तेमाल होते हैं। इससे बाहर से महंगे रासायनिक उर्वरक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।
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प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों को क्या-क्या लाभ?
किसान भाई, रासायनिक खेती से मिट्टी की जान निकल रही है, कीड़े-मकोड़े मर रहे हैं, पानी की जरूरत बढ़ रही है। प्राकृतिक खेती से सब कुछ बदल जाएगा। मुख्य फायदे हैं खेती की कुल लागत 50-70 प्रतिशत तक कम हो जाएगी, क्योंकि देसी गोबर, गौमूत्र और स्थानीय सामग्री से सब बन जाता है। मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ेगा, पानी सोखने की क्षमता सुधरेगी, सूखे का असर कम होगा।
फसलें बीमारियों और कीटों से मजबूत लड़ेंगी, क्योंकि प्राकृतिक तरीके से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पैदावार शुरू में थोड़ी कम लग सकती है, लेकिन 2-3 साल बाद ज्यादा और बेहतर क्वालिटी की फसल मिलेगी। फसलें बाजार में ऑर्गेनिक के दाम पर बिकेंगी, मुनाफा डबल हो सकता है।
इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में सर्कुलर इकोनॉमी बनेगी – गोबर से खाद, खाद से फसल, फसल से आय। गांवों में रोजगार बढ़ेगा, युवा खेती की तरफ लौटेंगे। पर्यावरण बचेगा, कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में मदद मिलेगी। कई किसानों ने इसे अपनाकर देखा है कि पानी की बचत होती है, मिट्टी भुरभुरी रहती है और फसल हरी-भरी दिखती है।
आसान तरीके से प्राकृतिक खेती कैसे शुरू करें?
किसान भाई, शुरू करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं चाहिए। जीवामृत बनाएं 10 किलो देसी गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो दाल का आटा और मुट्ठी भर मिट्टी को 200 लीटर पानी में मिलाकर 3 दिन छाया में रखें। यह फसल पर छिड़कें। बीजामृत से बीज उपचारित करें। मल्चिंग करें फसल के अवशेष मिट्टी पर बिछा दें, नमी बनी रहेगी। फसल चक्र अपनाएं, मिश्रित खेती करें। सरकार प्रशिक्षण और मदद दे रही है।
सरकार दो मुख्य आधारों पर काम कर रही है प्राकृतिक तरीकों का प्रचार और संस्थाओं के साथ साझेदारी। अब तक की प्रगति अच्छी है, और 25 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य पूरा करने के लिए पूरी टीम लगी हुई है।
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