रबी के मौसम में सरसों की फसल अब फूल और फली बनाने की स्टेज पर पहुंच गई है। पीली-पीली फसल देखकर मन खुश होता है, लेकिन अगर दानों में तेल की मात्रा कम निकली तो सारा मुनाफा घट जाता है। सहारनपुर जैसे इलाकों में सरसों बड़े क्षेत्र में बोई जाती है, और किसान अक्सर शिकायत करते हैं कि पैदावार तो अच्छी हुई, लेकिन तेल कम निकला। वजह है मिट्टी में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आई.के. कुशवाहा जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ एक चीज डालकर तेल नहीं बढ़ता, बल्कि संतुलित पोषण से फसल स्वस्थ रहती है, फलियां मजबूत बनती हैं और दानों में तेल भरपूर आता है। सही तरीके अपनाएं तो पैदावार के साथ तेल की क्वालिटी भी बढ़ेगी, और बाजार में बेहतर दाम मिलेंगे।
सरसों एक तिलहनी फसल है, और इसके दानों से निकलने वाला तेल घरेलू इस्तेमाल से लेकर उद्योग तक जाता है। पौधा जितना हरा-भरा और स्वस्थ रहेगा, फूल उतने ही मजबूत होंगे, फलियां भरी-भरी बनेंगी और तेल की मात्रा अपने आप बढ़ जाएगी। लेकिन अगर मिट्टी में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी रही तो दाने खोखले रह जाते हैं।
तेल कम होने की मुख्य वजह क्या है?
डॉ. कुशवाहा बताते हैं कि सरसों में जिंक, पोटाश, बोरोन, सल्फर और कॉपर जैसे तत्वों की कमी से तेल का उत्पादन प्रभावित होता है। ये माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पौधे की जड़ों से लेकर फलों तक पोषण पहुंचाते हैं। NPK (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) तो देते हैं, लेकिन इन छोटे तत्वों को भूल जाते हैं। नतीजा फसल हरी-भरी दिखती है, लेकिन तेल कम निकलता है।
ये भी पढ़ें- सरसों की फसल पर माहू का अटैक? पीले स्टिकी ट्रैप लगाएं, बिना दवा के कीट होंगे खत्म
सही समय पर क्या डालें?
सबसे अच्छा तरीका है बुवाई के समय या बेसल डोज में ही सब कुछ मिला दें। NPK के साथ सुपर (सल्फर युक्त), पोटाश, बोरोन, सल्फर, जिंक और कॉपर जरूर डालें। इससे शुरू से फसल मजबूत बनेगी और तेल की मात्रा बढ़ेगी। डॉ. कुशवाहा की सलाह है कि “बेसल डोज में इन माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल करें, निश्चित रूप से अच्छा उत्पादन और तेल मिलेगा।”
फूल आने के समय किसी भी दवा या न्यूट्रिएंट का छिड़काव बिल्कुल न करें फूल टूटकर गिर जाएंगे और नुकसान हो जाएगा। अगर छिड़काव करना ही पड़े तो शाम 2 बजे के बाद करें, सुबह कभी नहीं।
खास टिप: जब फसल में 70 प्रतिशत फलियां बन जाएं, तब पोटाश और सल्फर का छिड़काव करें। इससे दाने का साइज बढ़ता है, चमक आती है और तेल की मात्रा काफी बढ़ जाती है।
दोहरा लाभ क्यों मिलेगा?
ये उपाय अपनाने से न सिर्फ तेल की मात्रा बढ़ेगी, बल्कि कुल पैदावार भी अच्छी होगी। दाने भारी और चमकदार बनेंगे, जो बाजार में ज्यादा दाम दिलाएंगे। लागत थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन मुनाफा कई गुना। कई किसानों ने इसे आजमाकर देखा है कि सल्फर और पोटाश का सही इस्तेमाल से तेल 2-4 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
किसान भाइयों, इस मौसम में फसल अब आखिरी स्टेज पर है, इसलिए जो संभव हो वो तुरंत करें। बेसल डोज मिस हो गई हो तो अब फलियों पर फोकस करें। स्थानीय कृषि केंद्र से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की सही मात्रा पता करें और अपनाएं।
ये भी पढ़ें- किसान अलर्ट! रबी फसलों पर पाले का असर बढ़ा, वैज्ञानिक ने बताए फसल बचाने के खास उपाय