बाढ़, ओला या सूखा? अब फसल का नुकसान नहीं – प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनी किसानों की ढाल!

Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: किसान भाइयों, खेती आपकी मेहनत का फल है। साल भर दिन-रात खेत में पसीना बहाते हैं, बीज बोते हैं, खाद-पानी देते हैं और फसल लहलहाती देखकर मन खुश होता है। लेकिन प्रकृति का मिजाज कभी-कभी रूठ जाता है। बाढ़ आ जाए, सूखा पड़ जाए, ओलावृष्टि हो जाए, तूफान आए या अतिवृष्टि हो – एक पल में सारी मेहनत मिट्टी में मिल जाती है। ऐसे में परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है, अगली फसल बोने के लिए पैसा नहीं बचता और जीवन मुश्किल हो जाता है। लेकिन अब सरकार ने एक मजबूत ढाल दी है – प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है और क्यों शुरू की गई

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जनवरी 2016 में शुरू हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य है कि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाया जाए और खेती में जोखिम कम हो। पहले की बीमा योजनाओं में प्रीमियम ज्यादा था और क्लेम मिलने में दिक्कतें थीं। PMFBY में ये सारी कमियाँ दूर की गई हैं। अब प्रीमियम बहुत कम है – खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी के लिए 1.5% और बागवानी फसलों के लिए 5%। बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं। योजना में सभी किसान शामिल हो सकते हैं – छोटे, सीमांत या बड़े। लोन लेने वाले किसानों के लिए यह अनिवार्य है, लेकिन गैर-लोन वाले भी स्वेच्छा से जुड़ सकते हैं।

यह योजना पूरे देश में चल रही है और लाखों किसानों को फायदा पहुँचा चुकी है। 2024-25 तक करोड़ों हेक्टेयर फसल का बीमा हो चुका है और हजारों करोड़ रुपये के क्लेम बाँटे जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में यह बहुत लोकप्रिय है, क्योंकि यहाँ बाढ़, सूखा और ओला जैसी आपदाएँ आम हैं।

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योजना में किन आपदाओं का कवर मिलता है

PMFBY में प्राकृतिक आपदाओं का पूरा कवर है। मुख्य रूप से:

  • बाढ़ और जलभराव
  • सूखा और कम बारिश
  • ओलावृष्टि
  • तूफान और चक्रवात
  • अतिवृष्टि
  • भूस्खलन
  • ठंड और पाला
  • कीट-रोग और फसल कटाई के बाद का नुकसान (सीमित)

अगर फसल खेत में खड़ी है या कटाई के बाद सूख रही है और आपदा आ जाए, तो क्लेम मिलता है। क्षेत्रीय आधार पर भी क्लेम होता है – अगर पूरे इलाके में पैदावार कम हुई तो सभी को फायदा मिलता है।

रबी फसलों में 1.5% प्रीमियम – कितना फायदा

रबी फसलों के लिए प्रीमियम सबसे कम है – सिर्फ 1.5%। उदाहरण से समझिए: अगर एक एकड़ गेहूँ की बीमित राशि 50,000 रुपये है, तो प्रीमियम सिर्फ 750 रुपये। यह राशि इतनी कम है कि हर किसान आसानी से दे सकता है। क्लेम मिलने पर पूरी बीमित राशि या नुकसान के हिसाब से पैसा मिलता है। पिछले सालों में कई किसानों को ओला या बाढ़ से लाखों रुपये का क्लेम मिला, जिससे उन्होंने कर्ज चुकाया और नई फसल बोई।

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बीमा कराने की प्रक्रिया – कितनी आसान है

बीमा कराना बहुत सरल है। नजदीकी बैंक, कृषि विभाग कार्यालय, सहकारी समिति या CSC सेंटर पर जाएँ। दस्तावेज: आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खसरा-खतौनी, फसल का विवरण। PM किसान से जुड़े किसान ऑनलाइन pmfby.gov.in पर या ऐप से करा सकते हैं। रबी सीजन के लिए बीमा दिसंबर तक कराना होता है – देर न करें। बैंक वाले खुद याद दिलाते हैं। क्लेम के लिए आपदा के 72 घंटे में सूचना दें – मोबाइल ऐप या हेल्पलाइन पर। सर्वे के बाद पैसा सीधे खाते में आता है। बीमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है जल्दी करें।

योजना के फायदे – क्यों हर किसान को जुड़ना चाहिए

  • कम प्रीमियम, पूरा कवर
  • मानसिक शांति – आपदा आए तो भी नुकसान की चिंता नहीं
  • आय स्थिर रहती है
  • कर्ज लेने में आसानी
  • छोटे किसानों को सबसे ज्यादा फायदा

पिछले सालों में उत्तर प्रदेश में ओला से हजारों किसानों को क्लेम मिला। बिहार में बाढ़ से प्रभावित किसानों ने योजना से नई शुरुआत की। यह योजना महिला किसानों और सीमांत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देती है।

बीमा कराते समय फसल का सही विवरण दें। सूचना समय पर दें। योजना से जुड़े रहने के लिए बैंक या विभाग से संपर्क रखें। अगर कोई समस्या हो तो हेल्पलाइन 1800-180-1551 पर कॉल करें।

बीमा कराएँ, मेहनत को सुरक्षित रखें

किसान भाइयों, फसल आपकी पूँजी है। प्राकृतिक आपदाएँ अनिश्चित हैं, लेकिन बीमा से आप इन्हें हरा सकते हैं। रबी फसलों में सिर्फ 1.5% प्रीमियम देकर पूरी सुरक्षा पाएँ। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आपके साथ है – आज ही बीमा कराएँ। आपकी मेहनत सफल हो, परिवार खुशहाल रहे और खेती समृद्ध हो – यही कामना है।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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