Winter Animal Care: सर्दी का मौसम पशुपालकों के लिए चुनौती भरा होता है। गाय-भैंस हो या भेड़-बकरी, ठंड और कोहरे से सभी पशु तनाव में आ जाते हैं। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड का तनाव पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है – दूध उत्पादन कम हो जाता है, बीमारियाँ बढ़ जाती हैं और चारे की खपत ज्यादा हो जाती है। नतीजा, पशुपालक को उत्पादन घटने और लागत बढ़ने का नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन अगर अक्टूबर से फरवरी तक कुछ आसान उपाय अपनाए जाएँ, तो पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध-ऊन का उत्पादन भी बना रहेगा।
ठंड से पशुओं पर क्या असर पड़ता है
ठंड में पशु शरीर की गर्मी बनाए रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा खर्च करते हैं। इससे दूध देने वाली गाय-भैंस में उत्पादन 20-30% तक कम हो जाता है। भेड़-बकरी में ऊन की गुणवत्ता प्रभावित होती है और बछड़े-मेमने कमजोर पैदा होते हैं। कोहरा और नमी से फफूंद जनित रोग, साँस की तकलीफ और जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है। छोटे पशुपालक अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर सावधानी बरतने से नुकसान रोका जा सकता है।
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पशु शेड का सही निर्माण और प्रबंधन
पशु शेड फसल की तरह पशुपालन की नींव है। इसे इलाके की जलवायु के हिसाब से बनवाएँ। शेड तीन तरफ से 5 फीट ऊँची दीवार से घिरा हो, ताकि ठंडी हवा सीधे न आए। छत मजबूत और पानी रिसाव रहित हो। अगर तापमान 0 से 10 डिग्री तक गिरता है, तो शेड के खुले हिस्से को मोटे पर्दे, प्लास्टिक शीट या बोरे से कवर करें। बड़े शेड में गर्म हवा के लिए ब्लोअर या रेडिएटर का इंतजाम करें। पशुओं की पीठ को पुरानी बोरी या कंबल से ढक दें। बिस्तर हमेशा सूखा रखें – गीला बिस्तर ठंड बढ़ाता है।
चारा और पानी का विशेष ध्यान
ठंड में पशु ज्यादा चारा खाते हैं, क्योंकि शरीर गर्म रखने के लिए ऊर्जा चाहिए। हरा चारा और सूखा चारा भरपूर दें। सरसों का तेल खुराक का 2 प्रतिशत मिलाएँ – यह शरीर को गर्मी देता है। गुड़ का शीरा 5-10 प्रतिशत तक डालें। देर शाम भी हरा चारा दें, ताकि रात में पशु भूखे न रहें। पीने का पानी गुनगुना रखें – ठंडा पानी तनाव बढ़ाता है। अगर तापमान 10-20 डिग्री है, तो 10 प्रतिशत अतिरिक्त सप्लीमेंट दें। दिन में 3-4 बार खुराक बाँटें और 24 घंटे साफ पानी उपलब्ध रखें।
तापमान के हिसाब से उपाय
अगर आपके इलाके में तापमान 0-10 डिग्री तक गिरता है, तो शेड को पूरी तरह बंद रखें, गर्मी का इंतजाम करें और चारे में तेल-गुड़ ज्यादा मिलाएँ। 10-20 डिग्री में भी लापरवाही न बरतें – पर्दे लगाएँ, पानी गुनगुना रखें और चारा नियमित दें। ठंड से तनाव कम करने से पशु बीमार कम पड़ते हैं और दूध-ऊन का उत्पादन बना रहता है।
सर्दी में पशुओं को ठंड से बचाना पशुपालक की जिम्मेदारी है। सही शेड, गुनगुना पानी, सूखा बिस्तर और पौष्टिक चारा – ये छोटे उपाय पशु का तनाव कम करते हैं और आपकी आय बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों की सलाह मानें, स्थानीय पशु चिकित्सक से संपर्क रखें। इस सर्दी में पशु स्वस्थ रहें, तो आपका पशुपालन भी समृद्ध रहेगा।
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