शिवराज सिंह चौहान का तीखा हमला, कांग्रेस का “मनरेगा बचाओ संग्राम” असल में “भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम” है

Shivraj Singh Chauhan Manrega Statement: केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस के “मनरेगा बचाओ संग्राम” को सीधे “भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम” करार दिया। मंत्री जी ने बहुत सरल और स्पष्ट शब्दों में समझाया कि कांग्रेस को इसलिए इतनी परेशानी हो रही है क्योंकि अब मनरेगा में गलत काम करने के रास्ते बंद हो गए हैं। अब पैसा सही जगह, सही लोगों तक पहुँच रहा है और पारदर्शिता के साथ काम हो रहा है।

कांग्रेस को गांव, काम और राम से परेशानी है

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से विकास का विरोध करती आई है। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि कांग्रेस को गांव से परेशानी है, काम से परेशानी है और राम से भी परेशानी है। यही तीन चीजें कांग्रेस की सोच को पूरी तरह उजागर करती हैं। जब भी गांव, गरीब और मजदूर के लिए अच्छा काम होता है, कांग्रेस उसका विरोध करती है। मंत्री जी ने कहा कि विकास की राह में रोड़े अटकाने की कांग्रेस की पुरानी आदत अब भी जारी है।

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लोकसभा में हंगामा, बात सुनने का मौका नहीं

मंत्री ने लोकसभा की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि संसद बातचीत के लिए होती है, शोर-शराबे के लिए नहीं। उन्होंने बताया कि जब वह अपनी बात रखना चाहते थे, तब उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि अगर हिम्मत थी तो पूरी बात ध्यान से सुननी चाहिए थी। सच से डरकर हंगामा करना सही तरीका नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वे सच सुनना नहीं चाहते, क्योंकि सच उनके भ्रष्टाचार को उजागर कर देता है।

मनरेगा में पहले कैसा भ्रष्टाचार होता था

शिवराज सिंह चौहान ने बहुत आसान भाषा में पुरानी व्यवस्था की सच्चाई बताई। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा में कई गलत काम होते थे। मजदूरों की जगह मशीनों से काम कराया जाता था, लेकिन पैसा मजदूरों के नाम पर निकाल लिया जाता था। कई बार एक ही सड़क को हर साल नई बताकर पैसा लिया गया। यहां तक कि 80 साल के लोगों के नाम मजदूरों की सूची में मिले। ग्राम सभाओं के सोशल ऑडिट में 10 लाख 91 हजार से ज्यादा शिकायतें सामने आईं। इससे साफ होता है कि पहले व्यवस्था में बहुत गड़बड़ी थी।

मोदी सरकार ने किया रिकॉर्ड निवेश और पारदर्शिता

मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण विकास पर अब तक 8 लाख 48 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जबकि यूपीए सरकार के समय सिर्फ 2 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि इतना पैसा खर्च होने के बाद क्या गांवों में पक्की और काम की चीजें बनीं? मोदी सरकार का लक्ष्य है कि खर्च किया गया हर पैसा गांव और मजदूर की जिंदगी बदले। अब मनरेगा में DBT, आधार लिंकिंग और जियो टैगिंग से पैसा सही लोगों तक पहुँच रहा है। भ्रष्टाचार के रास्ते बंद हो गए हैं, इसलिए कांग्रेस परेशान है।

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‘विकसित भारत जी राम जी योजना’ – मनरेगा से कई कदम आगे

शिवराज सिंह चौहान ने नई ‘विकसित भारत जी राम जी योजना’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह मनरेगा से कई कदम आगे है। इस योजना में 100 दिन की जगह 125 दिन के काम की कानूनी गारंटी दी गई है। अगर किसी को काम नहीं मिला तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। अगर मजदूरी देने में देर हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। गांव की पंचायत खुद तय करेगी कि कौन सा काम करना है, यानी गांव अपना विकास खुद तय करेगा।

अब सिर्फ मिट्टी खोदने का काम नहीं होगा, बल्कि गांव के लिए जरूरी काम किए जाएंगे। जैसे पानी बचाने के काम, सड़क बनाना, स्कूल और आंगनबाड़ी बनाना, अस्पताल, खेत-तालाब, चेक डैम और आपदा से बचाव के काम। इससे गांव मजबूत और आत्मनिर्भर बनेंगे। इसके लिए 1 लाख 51 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

खेती और रोजगार में संतुलन

मंत्री ने बताया कि अब काम खेती के मौसम को देखकर दिया जाएगा। जब खेतों में काम ज्यादा होगा, तब खेती को प्राथमिकता मिलेगी। और जब खेतों में काम कम होगा, तब गांव के विकास के काम दिए जाएंगे। इससे किसान और मजदूर दोनों को फायदा होगा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस को भ्रम फैलाना बंद करना चाहिए और सच को स्वीकार करना चाहिए। यह समय लड़ाई का नहीं, मिलकर काम करने का है। ‘विकसित भारत जी राम जी योजना’ का सपना है – विकसित गांव, स्वावलंबी लोग और मजबूत भारत।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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