Tomato Farming Tips: टमाटर की खेती का सही समय आ गया! एक्सपर्ट की ये सलाह जान लें, मुनाफा होगा दोगुना

Tomato Farming Tips: किसान भाइयों के लिए टमाटर की खेती हमेशा फायदे का सौदा रही है। रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली ये सब्जी बाजार में भी अच्छे दाम दिलाती है। खासकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बसंत-ग्रीष्म की फसल के लिए अभी तैयारी का सही समय है। पूसा दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को चेतावनी दी है कि अगर नर्सरी से रोपाई तक छोटी-छोटी बातों का ध्यान न रखा तो पैदावार पर असर पड़ सकता है। लेकिन अगर वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं तो कम खर्च में शानदार उपज ली जा सकती है और परिवार की आमदनी बढ़ सकती है।

टमाटर की मांग साल भर बनी रहती है, चाहे ताजी सब्जी हो या प्रोसेसिंग के लिए। कई किसान भाई इसे मुख्य फसल की तरह उगा रहे हैं और अच्छा फायदा कमा रहे हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि सही समय पर सही कदम उठाएंगे तो फसल लहलहाएगी और फल बड़े-बड़े, लाल-लाल आएंगे।

नर्सरी और रोपाई का सही समय न चूकें

उत्तर भारत में सर्दियों की टमाटर फसल के लिए पौधशाला में बीज बोने का काम चल रहा है। दिसंबर से जनवरी के बीच रोपाई करना सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन अगर ठंड बहुत ज्यादा हो या पाला पड़ने की आशंका हो तो थोड़ा इंतजार करें। तापमान जब थोड़ा सामान्य हो जाए तब रोपाई करें, नहीं तो पौधे कमजोर हो सकते हैं। एक खास टिप ये है कि शाम के समय रोपाई करें तो पौधों का जमाव बहुत अच्छा होता है। सुबह की धूप से पौधे झुलस सकते हैं।

अच्छी किस्में चुनें, पैदावार अपने आप बढ़ेगी

किस्म का चुनाव बहुत मायने रखता है। अपने इलाके के मौसम और मिट्टी को देखकर उन्नत या हाइब्रिड किस्में लें। पूसा हाइब्रिड-1, पूसा उपहार, पूसा-120, पूसा शीतल और पूसा सदाबहार जैसी किस्में किसानों में काफी लोकप्रिय हैं। ये न सिर्फ अच्छी उपज देती हैं, बल्कि फल की क्वालिटी भी बेहतरीन रहती है। बाजार में इनके दाम अच्छे मिलते हैं। हाइब्रिड किस्मों में बीज कम लगता है, लेकिन पैदावार ज्यादा होती है।

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मिट्टी और खेत की तैयारी पर पूरा ध्यान दें

टमाटर को रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी सबसे पसंद है, जहां पानी का निकास अच्छा हो। जलभराव बिल्कुल न हो, वरना जड़ें सड़ सकती हैं। खेत तैयार करते समय जैविक खाद जरूर मिलाएं। रोपाई से एक महीना पहले 20 से 25 टन सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डाल दें। इससे मिट्टी की ताकत बढ़ती है और पौधे मजबूत बनते हैं।

रोपाई की दूरी भी सही रखें। अगर किस्म सीमित बढ़वार वाली है तो 60 गुणा 60 सेंटीमीटर और असीमित बढ़वार वाली है तो 75 से 90 गुणा 60 सेंटीमीटर की दूरी ठीक रहती है। इससे पौधों को हवा और धूप अच्छी मिलती है।

खाद और पानी का बैलेंस रखें

पोषक तत्वों का सही प्रबंधन फसल की सफलता की कुंजी है। गोबर खाद के अलावा नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा किस्म के मुताबिक डालें। टॉप ड्रेसिंग दो बार में करें तो पौधे अच्छे फलते-फूलते हैं। पानी की बात करें तो जल निकास का पूरा ख्याल रखें। सूखी घास या पुआल से मल्चिंग कर लें तो नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पानी की बचत भी होती है।

रोगों और खरपतवारों से बचाव जरूरी

टमाटर में झुलसा रोग सबसे बड़ी समस्या है। इसके लिए स्वस्थ बीज लें, फसल चक्र अपनाएं और समय पर फफूंदनाशक का छिड़काव करें। निराई-गुड़ाई करते रहें और असीमित बढ़वार वाली किस्मों में बांस या रस्सी से सहारा दें, ताकि फल जमीन को न छुएं। इससे रोग कम लगते हैं। खरपतवारों को हाथ से या दवा से नियंत्रित करें।

किसान भाइयों, इन आसान टिप्स को अपनाकर आप सर्दियों की टमाटर फसल से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। कम लागत, वैज्ञानिक तरीका और थोड़ी मेहनत बस इतना ही काफी है।

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  • Shashikant

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