गेहूं में अधिक फुटाव (कल्ले) कैसे निकालें! ये वैज्ञानिक टिप्स अपनाएं, एक पौधे से 50-80 कल्ले तक पाएं

रबी की गेहूं की फसल अब फुटाव की स्टेज पर है। एक पौधे से जितने ज्यादा कल्ले (तना विभाजन या स्प्लिट) निकलेंगे, उतनी ही बालियां भरेंगी और पैदावार बढ़ेगी। लेकिन कई बार मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी से फुटाव कम हो जाता है, पौधा कमजोर रहता है और उत्पादन घट जाता है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि सही समय पर सही स्प्रे और उर्वरक डालें तो फुटाव में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है। दाने की क्वालिटी भी बेहतर बनती है और मुनाफा कई गुना हो जाता है। आइए जानते हैं क्या करें।

फुटाव का समय बुवाई के 20-40 दिन बाद होता है। इस स्टेज पर पौधे में नाइट्रोजन, जिंक, कैल्शियम और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की जरूरत सबसे ज्यादा रहती है। कमी हुई तो कल्ले कम निकलेंगे।

सबसे कारगर स्प्रे: जिंक और यूरिया का मिश्रण

विशेषज्ञों की पहली सलाह है जिंक सल्फेट का स्प्रे। प्रति एकड़ 500 ग्राम जिंक सल्फेट (21% जिंक वाला, 1-2 साल पुराना बेहतर) और 2.5 किलो यूरिया लें। इसे 100 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर छिड़काव करें। इससे फुटाव तेजी से बढ़ता है, पौधे सामान रूप से बढ़ते हैं और दाने भारी-चमकदार बनते हैं। एक महीने बाद दुबारा स्प्रे करें तो असर और अच्छा होगा।

कैल्शियम और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का ध्यान रखें

कैल्शियम की कमी से भी फुटाव प्रभावित होता है। प्रति एकड़ 10 किलो कैल्शियम नाइट्रेट डालें। इससे पौधे पोषक तत्व बेहतर सोखते हैं। इसके अलावा माइक्रो न्यूट्रिएंट्स का स्प्रे करें – चिलेटेड जिंक 100 ग्राम, मैग्नीशियम सल्फेट 1 किलो, मैंगनीज सल्फेट 500 ग्राम और यूरिया 1 किलो को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़कें। यह मिश्रण फुटाव को बूस्ट देता है और उत्पादन बढ़ाता है।

सिंचाई और अन्य टिप्स

फुटाव शुरू होने पर एक बार हल्की सिंचाई जरूर करें। इससे मिट्टी से पोषक तत्व जड़ों तक आसानी से पहुंचते हैं। खेत में नमी बनाए रखें, लेकिन जलभराव न होने दें। संतुलित खाद डालें, ज्यादा नाइट्रोजन से बचें वरना पौधा सिर्फ हरा रहेगा, कल्ले कम निकलेंगे।

किसान भाइयों, ये उपाय अपनाने से एक पौधे से 50-80 कल्ले तक निकल सकते हैं। पैदावार बढ़ेगी, दाने की क्वालिटी सुधरेगी और मुनाफा हाथ में आएगा। स्प्रे शाम के समय करें, सुबह नहीं। अगर मिट्टी की जांच करा लें तो और सटीक मात्रा पता चलेगी। नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह लें और इस मौसम में ट्राई करें।

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  • Shashikant

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