रबी सीजन की बुवाई अब लगभग खत्म है, लेकिन ठंड बढ़ते ही उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों के सामने एक बड़ी दिक्कत साफ दिख रही है नवंबर में बोई गई गेहूं की फसल कई जगहों पर ठीक से जम नहीं पाई। पहली सिंचाई का समय आ चुका है, पर खेतों में खाली जगहें देखकर किसान चिंता में हैं। अच्छी खबर ये है कि यह समस्या जितनी बड़ी दिखती है, उतनी है नहीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि थोड़ी सी मेहनत से किसान अपनी 20–25 प्रतिशत पैदावार अभी भी बचा सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर के विशेषज्ञ डॉ. एनपी गुप्ता बताते हैं कि खराब अंकुरण के पीछे अक्सर दो ही वजहें होती हैं बुवाई की कुछ छोटी गलतियां या मौसम का हल्का सा बदलाव। लेकिन यह चिंता की बात नहीं है। पहली सिंचाई के बाद गैप फिलिंग करके आप खेत में पौधों की संख्या फिर से बराबर कर सकते हैं और मार्चअप्रैल में फसल एकसाथ काट सकते हैं।
गेहूं में कम जमाव की समस्या क्यों होती है
गेहूं की फसल में कम जमाव की समस्या आम है, खासकर जब बुवाई नवंबर के पहले हफ्ते में हो जाती है। डॉ. एनपी गुप्ता बताते हैं कि कई बार किसान अच्छी तैयारी के बावजूद बीज की गहराई ज्यादा रख देते हैं, मिट्टी में नमी कम रहती है या हल्के मौसम बदलाव से अंकुरण प्रभावित हो जाता है। नतीजा ये होता है कि खेत में पौधों की संख्या कम रह जाती है और उत्पादन पर असर पड़ता है। लेकिन ये समस्या छोटी है और पहली सिंचाई के बाद आसानी से सुलझाई जा सकती है। घबराने की बजाय खेत में खाली जगहों को चिन्हित करें ये गैप फिलिंग का सबसे अच्छा समय है। इससे न सिर्फ पौधों की संख्या बढ़ जाएगी बल्कि फसल की ग्रोथ भी तेज हो जाएगी।
पहली सिंचाई के बाद गैप फिलिंग कैसे करें
पहली सिंचाई के बाद जब खेत में हल्की नमी यानी ओट आ जाती है, तब गैप फिलिंग का सही समय होता है। सबसे पहले खेत में घूमें और खाली स्थान चिन्हित करें। इसके बाद कुदाल या नुकीले लोहे की मदद से हल्की नाली बना लें। इस नाली में एक-एक बीज डालकर बुवाई कर दें। डॉ. गुप्ता कहते हैं कि ये बीज मार्च-अप्रैल में बाकी पौधों के साथ ही पककर तैयार हो जाएँगे। फसल एक साथ कटाई के योग्य रहेगी और उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। गैप फिलिंग से खेत हरा-भरा दिखने लगेगा और पैदावार में इजाफा होगा।
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गैप फिलिंग करते समय ये बातें ध्यान रखें
गैप फिलिंग करते समय एक महत्वपूर्ण बात का खास ध्यान रखना चाहिए। खेत में खाली जगह भरते समय पहले बोई गई उसी किस्म के बीज ही इस्तेमाल करें। डॉ. गुप्ता की सलाह है कि इससे उपज में मिलावट नहीं होगी। कुछ मामलों में नए बोए दाने थोड़े सिकुड़ सकते हैं, लेकिन फसल की क्वालिटी और कुल उत्पादन पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ता। अगर आप गेहूं को बीज उत्पादन के लिए बो रहे हैं तो ये बात और भी जरूरी है। हमेशा प्रमाणित बीज लें ताकि अंकुरण अच्छा हो।
बीज उत्पादन के लिए बोने वालों के लिए खास टिप्स
कई किसान गेहूं को बीज उत्पादन के लिए बोते हैं, इसलिए गैप फिलिंग में एक ही किस्म का बीज इस्तेमाल करना अनिवार्य है। इससे फसल की शुद्धता बनी रहती है और बाजार में अच्छा दाम मिलता है। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि केंद्र से सलाह लें वहाँ प्रमाणित बीज भी उपलब्ध हैं। डॉ. गुप्ता कहते हैं कि सही समय पर गैप फिलिंग से फसल की क्वालिटी बरकरार रहती है और किसान अच्छी पैदावार पा लेते हैं।
गेहूं की फसल में कम जमाव की समस्या छोटी लगती है लेकिन नजरअंदाज करने से नुकसान बड़ा हो जाता है। पहली सिंचाई के बाद गैप फिलिंग अपनाकर आप अपना उत्पादन बचा लें। अभी मौका है, आज ही खेत में उतरें और ये आसान तरीका आजमाएँ मार्च-अप्रैल में जब कटाई होगी, तब आप मुस्कुराएँगे।
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