रबी के मौसम में गेहूं बोने वाले किसान भाइयों के लिए इन दिनों सबसे बड़ी चिंता पाला पड़ना है। दिसंबर-जनवरी में कड़ाके की ठंड से फसल मुरझा सकती है, बालियां कमजोर पड़ सकती हैं। लेकिन एक सस्ता और देसी उपाय है जो न सिर्फ पाले से सुरक्षा देता है, बल्कि फसल को मजबूत बनाकर अच्छी उपज भी दिलाता है वो है सरसों की खली। यह जैविक खाद किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि कम खर्च में ज्यादा फायदा देती है। कई अनुभवी किसानों का कहना है कि सरसों की खली डालने से गेहूं के दाने भारी और चमकदार होते हैं, और मिट्टी भी सालों तक उपजाऊ रहती है।
सरसों की खली सरसों के तेल निकालने के बाद बची हुई सामग्री है, जो पूरी तरह प्राकृतिक होती है। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश के अलावा खास तौर पर सल्फर भरपूर मात्रा में होता है। सल्फर की वजह से गेहूं के दानों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है और वे चमकदार दिखते हैं। यह खाद मिट्टी में धीरे-धीरे घुलती है, इसलिए फसल को लंबे समय तक पोषण मिलता रहता है। रासायनिक उर्वरकों की तरह जल्दी असर नहीं दिखाती, लेकिन टिकाऊ फायदा देती है।
सरसों की खली डालने के मुख्य फायदे
किसान भाई, सरसों की खली सिर्फ खाद नहीं, फसल का पूरा रक्षक है। इसकी गर्म तासीर सर्दी में पाले के असर को कम करती है। ठंड से पौधे की पत्तियां पीली नहीं पड़तीं और बालियां अच्छे से भरती हैं। मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जड़ें गहराई तक फैलती हैं, जिससे पौधा मजबूत रहता है और तेज हवा में भी नहीं गिरता।
ये भी पढ़ें- आलू का साइज़ नहीं बढ़ रहा? जड़ में डालें ये ₹50 की चीज़, मंडी में मिलेगा सबसे ऊँचा भाव!
इसके अलावा सरसों की खली की तीखी महक दीमक, सफेद लट और मिट्टी के कीड़ों को दूर रखती है। फफूंद जनित बीमारियां भी कम होती हैं क्योंकि यह प्राकृतिक कीटनाशक की तरह काम करती है। कई किसानों ने देखा है कि इसके इस्तेमाल से दानों का वजन बढ़ता है और पैदावार 10-15 प्रतिशत तक ज्यादा हो जाती है। सबसे अच्छी बात यह पूरी तरह जैविक है, इसलिए फसल स्वस्थ और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।
कब और कैसे डालें सरसों की खली
समय सबसे जरूरी है। अगर बुवाई के वक्त खेत तैयार कर रहे हैं तो 20 से 30 किलो प्रति एकड़ की दर से सरसों की खली को मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें। इससे शुरू से ही फसल मजबूत बनेगी। अगर बुवाई हो चुकी है और आपने नहीं डाली तो घबराएं नहीं पहली या दूसरी सिंचाई से ठीक पहले इसे बारीक पीसकर खेत में छिटक दें। यूरिया के साथ मिलाकर डालें तो असर और अच्छा होता है।
खली को हमेशा अच्छी क्वालिटी की लें, जो ताजी हो। बाजार में आसानी से 20-30 रुपये किलो मिल जाती है। एक एकड़ के लिए 500-800 रुपये का खर्चा, लेकिन फायदा हजारों में। सिंचाई के बाद यह धीरे-धीरे काम करना शुरू कर देगी।
किसान भाइयों, ज्यादा मात्रा न डालें वरना शुरुआत में पौधे को नुकसान हो सकता है। सही मात्रा और समय का ध्यान रखें। अगर खेत में गोबर की खाद भी मिला सकें तो और बेहतर। कई विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सरसों की खली के साथ थोड़ा नीम खली मिलाकर डालें तो कीटों से और अच्छी सुरक्षा मिलती है।
इस मौसम में पाला पड़ने से पहले सरसों की खली जरूर डालें। आपकी मेहनत रंग लाएगी, फसल हरी-भरी रहेगी और गोदाम दानों से भर जाएगा।
ये भी पढ़ें- गेहूं में कम जमाव से हैं परेशान? पहली सिंचाई के बाद इस विधि से गैप फिलिंग से बचाइए अपनी 25% पैदावार