आलू की खुदाई के तुरंत बाद लगाएं ये फसलें, कम समय में तैयार, दाम मिलेंगे दोगुने! एक्सपर्ट से जानें पूरा प्लान

जब खेत से आलू की खुदाई और सरसों की कटाई पूरी होने लगती है, तब किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अब अगली फसल कौन सी लगाई जाए। यही वह समय है जब सही फैसला किसान की आमदनी को नई दिशा दे सकता है। अक्सर देखा जाता है कि जब एक ही फसल बड़ी संख्या में एक साथ मंडी पहुंचती है, तो ज्यादा आवक के कारण दाम गिर जाते हैं। इस नुकसान से बचने का सबसे मजबूत तरीका अगेती खेती माना जाता है, यानी ऐसी फसल जो बाजार में दूसरों से पहले पहुंच जाए।

जायद की अगेती सब्जियां दे सकती हैं बढ़िया दाम

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आलू और सरसों के बाद खेत खाली छोड़ना समझदारी नहीं है। इसी समय जायद की सब्जियां लगाने से किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं। खीरा, ककड़ी, लौकी और मिर्च जैसी फसलें इस मौसम में अच्छी बढ़ती हैं और जल्दी तैयार हो जाती हैं। जब ये फसलें मंडी में पहुंचती हैं, तब बाजार में इनकी सप्लाई कम होती है। मांग ज्यादा और आवक कम होने से किसानों को सामान्य समय से बेहतर भाव मिल सकता है।

कम समय में तैयार होकर देती हैं जल्दी आमदनी

जायद की सब्जियों की एक खासियत यह भी है कि इनकी अवधि कम होती है। किसान मौसम के पूरी तरह बदलने से पहले ही उत्पादन ले सकते हैं। इससे खेत खाली नहीं रहता और साल में एक अतिरिक्त फसल से आमदनी बढ़ जाती है। जो किसान समय से पहले बाजार में फसल लेकर पहुंचते हैं, उन्हें अच्छा खरीदार मिल जाता है और दाम भी संतोषजनक मिलते हैं।

वैज्ञानिक तरीके अपनाना है जरूरी

अगेती खेती में सफलता तभी मिलती है जब शुरुआत से ही सावधानी बरती जाए। खेत की मिट्टी को बुवाई से पहले तैयार करना जरूरी होता है। मिट्टी में छिपे कीट और रोग कारकों को नियंत्रित करने से फसल की शुरुआती बढ़वार मजबूत होती है। बीज बोने से पहले बीज उपचार करना भी बहुत जरूरी माना जाता है। इससे बीज का अंकुरण अच्छा होता है और शुरुआती रोगों से बचाव होता है।

अगर किसान शुरुआती तैयारी पर ध्यान दें, तो पौधे स्वस्थ रहते हैं, उत्पादन बढ़ता है और सब्जियों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। अच्छी क्वालिटी की फसल बाजार में ज्यादा पसंद की जाती है, जिससे दाम भी बेहतर मिलते हैं।

कुल मिलाकर, आलू और सरसों के बाद खेत खाली रखने की बजाय अगेती जायद सब्जियां लगाना किसानों के लिए आय बढ़ाने का समझदारी भरा कदम हो सकता है। सही समय, सही फसल और वैज्ञानिक तरीका अपनाकर किसान कम समय में ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।

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  • Shashikant

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