Chana Wilt: रबी के मौसम में चना भारत के किसानों की पसंदीदा फसल है। कम खर्च में अच्छी पैदावार और बाजार में हमेशा मांग रहने से हर राज्य के गांवों में इसकी बुवाई होती है। लेकिन एक ऐसी बीमारी है जो रातों-रात पूरी फसल को सूखा सकती है वो है चना विल्ट या उकठा रोग। अगर समय पर ध्यान न दिया तो 30-60 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है, और कभी-कभी तो पूरा खेत बर्बाद हो जाता है। किसान भाइयों, इस रोग से बचाव आसान है, बस सही जानकारी और सतर्कता चाहिए।
यह रोग एक फफूंद से होता है, जिसका नाम है फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम। यह मिट्टी में सालों तक जिंदा रहता है और पौधे की जड़ों से घुसकर अंदर पहुंच जाता है। एक बार संक्रमण हो गया तो पौधा पानी और पोषक तत्व नहीं ले पाता, और धीरे-धीरे मुरझा जाता है। कई बार तो पौधा हरा-भरा दिखता है, लेकिन अचानक सूखकर गिर जाता है।
रोग के लक्षण कैसे पहचानें?
किसान भाई, खेत में रोज घूमकर फसल देखते रहें। विल्ट रोग के शुरुआती संकेत फसल की बढ़वार के समय या फली बनते वक्त दिखते हैं। सबसे पहले पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, खासकर नीचे वाली। दिन में पौधा मुरझाया-सा लगता है, जैसे पानी की कमी हो। शाम को थोड़ा ठीक होता है, लेकिन धीरे-धीरे पूरा तना सूखने लगता है। जड़ें सड़ जाती हैं और अगर पौधे को उखाड़कर तने को चीरा लगाएं तो अंदर की नसें भूरी या काली हो जाती हैं यही इस रोग की पक्की निशानी है।
खेत में छोटे-छोटे हिस्सों में पहले पौधे सूखते दिखेंगे, फिर अगर नहीं रोका तो पूरा खेत फैल जाता है। कई किसानों का अनुभव है कि अगर एक-दो पौधे ऐसे दिखें तो तुरंत कार्रवाई करें, वरना नुकसान बड़ा हो जाता है।
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यह रोग क्यों और कैसे फैलता है?
यह फफूंद मिट्टी में लंबे समय तक रहती है। मुख्य कारण हैं संक्रमित बीज से बुवाई करना, एक ही खेत में साल-दर-साल चना बोते रहना, खेत में पानी की अच्छी निकासी न होना और ज्यादा नमी वाली मिट्टी। इसके अलावा मौसम का अचानक गर्म होना या ठंडा पड़ना भी रोग को बढ़ावा देता है। अगर खेत भारी मिट्टी का है या जलभराव रहता है तो खतरा और ज्यादा। कई बार पुराने संक्रमित खेत से हवा या पानी के जरिए भी फफूंद फैलती है। इसलिए फसल चक्र न अपनाने से मिट्टी में रोग का बोझ बढ़ता जाता है।
बचाव के आसान और कारगर उपाय
सबसे अच्छा तरीका है रोकथाम। किसान भाई, बुवाई से पहले ही तैयारी करें तो रोग का प्रकोप बहुत कम हो जाता है। सबसे पहले रोग प्रतिरोधी किस्में चुनें। जैसे अवरोधी, विजय, पूसा चमत्कार, जेजी 63, आरएसजी 888 या हाल की नई किस्में जैसे पूसा चना 4037 अश्विनी। ये किस्में विल्ट के खिलाफ मजबूत होती हैं और अच्छी पैदावार भी देती हैं।
बीज जरूर उपचारित करें। ट्राइकोडर्मा या जैविक फफूंदनाशक से बीज भिगोएं। सड़ी गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाकर खेत में डालें यह मिट्टी के हानिकारक फफूंद को कम करता है। नीम की खली भी बहुत फायदेमंद है।
फसल चक्र अपनाएं कम से कम तीन-चार साल तक उसी खेत में चना न बोएं। सरसों, अलसी या गेहूं के साथ मिश्रित खेती करें। खेत में पानी जमा न होने दें, अच्छी जल निकासी रखें। गर्मियों में गहरी जुताई करें तो फफूंद के बीजाणु मर जाते हैं। अगर खेत में संक्रमित पौधे दिखें तो जड़ समेत उखाड़कर बाहर जला दें या गाड़ दें, ताकि रोग न फैले।
ये उपाय अपनाने से न सिर्फ विल्ट से बचाव होता है, बल्कि फसल स्वस्थ रहती है और पैदावार बढ़ती है। किसान भाइयों, सतर्क रहें और अच्छी फसल लें। अगर कोई समस्या हो तो स्थानीय कृषि अधिकारी से सलाह लें।
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