रबी का मौसम चल रहा है और ठंड बढ़ने के साथ पाला पड़ने का खतरा भी जोर पकड़ रहा है। झारखंड, बिहार और उत्तर भारत के कई इलाकों में कुहासा और शीतलहर की मार पड़ रही है। अगर समय पर सावधानी न बरती तो गेहूं, सरसों, चना, जौ और सब्जियों की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। पाला पड़ते ही तापमान तेजी से गिरता है, पौधों की बढ़वार रुक जाती है, बालियां और दाने प्रभावित होते हैं।
सरसों में दाने सिकुड़ जाते हैं या फट जाते हैं, आलू पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है, जबकि टमाटर, बैंगन, गोभी जैसी सब्जियों की ग्रोथ ठप हो जाती है। लेकिन घबराएं नहीं, देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के सीनियर वैज्ञानिक डॉ राजन ओझा ने कुछ आसान और कारगर उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी मेहनत बचा सकते हैं।
डॉ राजन ओझा का कहना है कि पाले की स्थिति में फसल को बचाना आसान है, बस सही समय पर सही कदम उठाएं। खासकर जब न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए, उत्तर दिशा से ठंडी हवाएं चल रही हों और आसमान बिल्कुल साफ हो ऐसे में अलर्ट रहें।
गेहूं और अन्य फसलों के लिए स्प्रे का कमाल
सबसे कारगर उपाय है दोपहर के समय फसल की सूखी पत्तियों पर स्प्रे करना। गंधक के तेजाब या डाईमिथाइल सल्फोऑक्साइड का 0.1 प्रतिशत घोल बनाएं। इसके लिए 1 मिलीलीटर दवा को 1 लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार करें। प्रति बीघा 100 से 125 लीटर घोल का छिड़काव करें। यह स्प्रे पौधों की बढ़वार को बनाए रखता है और बालियों पर पाले का बुरा असर नहीं पड़ने देता। पाले की संभावना जितने दिन रहे, उतने दिन यह छिड़काव दोहराते रहें। कई किसानों ने इसे आजमाकर अच्छे नतीजे देखे हैं।
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आसान देसी तरीके भी आजमाएं
अगर स्प्रे की दवा उपलब्ध न हो तो पुराने देसी नुस्खे काम आएंगे। पाला पड़ने से पहले खेत में हल्की सिंचाई कर दें। नमी वाली मिट्टी देर तक गर्मी पकड़कर रखती है, जिससे पाला कम नुकसान करता है। खेत के किनारे सूखी पत्तियां या भूसा जलाकर धुआं करें यह धुआं तापमान को थोड़ा बढ़ा देता है और फसल को सुरक्षा देता है।
सब्जियों और आलू की फसल का खास ख्याल
किचन गार्डन या सब्जी वाली फसल में पौधों के आसपास पुआल, सूखी घास या मल्चिंग की परत बिछा दें। इससे पौधों को गर्माहट मिलती रहती है। आलू के लिए बुवाई के समय जिंक का इस्तेमाल करें, अगर नहीं किया तो अब सिंचाई के बाद जिंक का छिड़काव जरूर करें। यह पाले के असर को कम करता है।
किसान भाइयों, मौसम विभाग की चेतावनी पर नजर रखें और इन उपायों को तुरंत अपनाएं। डॉ राजन ओझा जैसे वैज्ञानिकों की सलाह से आपकी फसल सुरक्षित रहेगी और पैदावार अच्छी होगी। अगर कोई समस्या हो तो नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।
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