गेहूं की पहली सिंचाई के बाद ये गलती की तो फसल हो जाएगी बर्बाद! लग सकते हैं खतरनाक रोग

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में रबी सीजन में गेहूं की बुवाई हो चुकी है और अब पहली सिंचाई का समय आ गया है। बुवाई के करीब 21 से 25 दिन बाद जब फसल ताज मूल अवस्था यानी CRI स्टेज में पहुंचती है, तब पहला पानी दिया जाता है। ये पानी फसल की अच्छी बढ़वार के लिए बहुत जरूरी होता है, लेकिन यही नमी कई खतरनाक रोगों को न्योता भी दे देती है।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा समस्तीपुर के पौध सुरक्षा विभाग के प्रमुख डॉ. एसके सिंह बताते हैं कि पहली सिंचाई के बाद खेत में अचानक नमी का स्तर बढ़ जाता है और तापमान में बदलाव आता है। ये हालात फफूंद जनित रोगों के लिए सबसे मुफीद हो जाते हैं।

अगर इस समय थोड़ी सी लापरवाही हुई तो पीला रस्ट, भूरा रस्ट, पत्ती झुलसा और जड़ सड़न जैसे रोग फसल पर हावी हो सकते हैं। डॉक्टर सिंह चेतावनी देते हैं कि इन रोगों से पैदावार में 20 से 40 फीसदी तक का नुकसान हो सकता है। कई किसान भाई तो पहली सिंचाई के बाद खेत की तरफ ध्यान ही नहीं देते, और जब रोग फैल जाता है तब पछतावा करते हैं। लेकिन अगर शुरुआत में ही सतर्क रहें तो फसल को बड़ा नुकसान होने से रोका जा सकता है।

नमी बढ़ने से रोग क्यों पनपते हैं, क्या होते हैं लक्षण

गेहूं की फसल जब घनी हो जाती है और सिंचाई के बाद खेत में नमी बनी रहती है, तो फफूंद के बीजाणु आसानी से फैलने लगते हैं। मध्यम तापमान और नमी का ये मेल रोगों को तेजी से बढ़ाता है। सबसे आम रोग पीला रस्ट है, जिसमें पत्तियों पर हल्दी जैसा पीला पाउडर नजर आने लगता है। पत्ती झुलसा रोग में पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं और पौधा कमजोर होकर सूखने लगता है। भूरा रस्ट और जड़ सड़न भी इसी समय हमला करते हैं, जिससे पौधे की जड़ें गल जाती हैं और पूरा पौधा मुरझा जाता है।

इन रोगों का असर ये होता है कि पौधा भोजन बनाने की प्रक्रिया यानी फोटोसिंथेसिस धीमी पड़ जाती है। नतीजा ये कि दाने छोटे रह जाते हैं, पिचके हुए भरते हैं और पैदावार कम हो जाती है। कई बार तो फसल पूरी तरह खराब हो जाती है। डॉक्टर सिंह कहते हैं कि पहली सिंचाई के बाद खेत में जलभराव बिल्कुल न होने दें, क्योंकि पानी खड़ा रहने से रोगों को और बल मिलता है।

ये भी पढ़ें- गेहूं में अधिक फुटाव (कल्ले) कैसे निकालें! ये वैज्ञानिक टिप्स अपनाएं, एक पौधे से 50-80 कल्ले तक पाएं

पहली सिंचाई के बाद खेत की नियमित जांच करें

किसान भाइयों को सलाह है कि पहली पानी देने के 7 से 10 दिन बाद खेत का अच्छे से मुआयना करें। सुबह या शाम के समय खेत में घूमकर देखें कि कहीं पत्तियों पर पीली या भूरी धारियां तो नहीं दिख रही हैं। छोटे-छोटे काले या भूरे धब्बे बन रहे हों या पत्तियां समय से पहले पीली पड़कर सूख रही हों तो समझ जाएं कि रोग की शुरुआत हो गई है। शुरुआती दौर में ही लक्षण पकड़ में आ जाएं तो इलाज बहुत आसान हो जाता है और दवा का खर्चा भी कम लगता है।

सिंचाई हमेशा हल्की और जरूरत के मुताबिक करें। अगर मिट्टी भारी है तो दो सिंचाइयों के बीच ज्यादा अंतर रखें। जलभराव होने से बचाएं, क्योंकि ये रोगों की जड़ है। कई किसान भाई ज्यादा पानी दे देते हैं सोचकर कि फसल अच्छी होगी, लेकिन इससे उल्टा नुकसान हो जाता है।

खाद का संतुलित इस्तेमाल करें

डॉक्टर एसके सिंह का कहना है कि रोगों से बचाव का सबसे बड़ा तरीका पौधों को अंदर से मजबूत बनाना है। इसके लिए खाद का सही संतुलन बहुत जरूरी है। कई किसान केवल यूरिया के पीछे भागते हैं, जिससे पौधा हरा तो हो जाता है लेकिन कमजोर रहता है और रोग आसानी से लग जाते हैं। नाइट्रोजन के साथ फास्फोरस, पोटाश और जिंक जैसे सूक्ष्म तत्व जरूर डालें। खासकर पोटाश पौधों की बाहरी दीवार को मजबूत बनाता है, जिससे फफूंद अंदर घुस नहीं पाती।

जैविक तरीके से भी बचाव कर सकते हैं। सीवीड यानी समुद्री शैवाल आधारित खाद पौधों की ताकत बढ़ाती है। बीज और मिट्टी का उपचार ट्राइकोडर्मा से करें, ये फफूंद को नियंत्रित करता है। अगर फिर भी रोग दिखे तो वैज्ञानिक सलाह लेकर दवा का छिड़काव करें। पीला रस्ट के लिए प्रोपिकोनाज़ोल और पत्ती झुलसा के लिए मैंकोज़ेब जैसी दवाएं कारगर हैं। मौसम का पूर्वानुमान देखकर समय पर स्प्रे करें तो रोग रुक जाता है।

छोटी सावधानी से बचाएं फसल

कुल मिलाकर पहली सिंचाई के बाद खेत की निगरानी बढ़ा दें, पानी और खाद का बैलेंस रखें और जैविक तरीकों को प्राथमिकता दें। इससे न सिर्फ रोगों से बचाव होगा, बल्कि पैदावार भी अच्छी मिलेगी। अपने इलाके के कृषि केंद्र या विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ से संपर्क करके और जानकारी लें।

ये भी पढ़ें- पाले से गेहूं को बचाने का देसी जुगाड़! सरसों की खली डालते ही बढ़ेगी पैदावार, दाने होंगे चमकदार

Author

  • Shashikant

    नमस्ते, मैं शशिकांत। मैं 2 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती से सम्बंधित सभी विषय में विशेषज्ञता प्राप्‍त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी एकदम सटीक ताजा खबरें बताऊंगा। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको 'काम की खबर' दे सकूं। जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप Krishitak.com के साथ जुड़े रहिए।

    View all posts

Leave a Comment