पंजाब में धान सीजन 2025 किसानों के लिए बुरा सपना साबित हो गया है। बेमौसम बारिश, बाढ़, कटाई में देरी, और फसल में नमी व रोगों से कुल 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। लंबे इंतजार के बाद भी मंडियों में धान की आवक घटी, और खराब दाने (5% से दोगुना) व नमी (17% से अधिक) से MSP पर बिक्री मुश्किल हो गई। अमृतसर से दोआबा तक मंडियों में निराशा छाई है। आइए जानते हैं नुकसान के कारण, प्रभावित क्षेत्र, और किसानों को क्या राहत मिल रही है।
4 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद
पंजाब में 23 जिलों में बाढ़ ने कहर बरपाया। रावी, ब्यास, और सतलुज नदियाँ खतरे के स्तर पर बह रही हैं, जिससे 4 लाख हेक्टेयर से अधिक धान खेत पानी में डूब गए। सितंबर में 300 मिमी से अधिक बारिश (तीन गुना औसत) ने फसल को चौपट कर दिया। लुधियाना, फाजिल्का, फेरोजपुर, गुरदासपुर, अमृतसर, कपूरथला, तरनतारन, मोगा, मनसा, और बठिंडा जैसे जिले सबसे प्रभावित हैं। किसान जसपाल सिंह ने कहा, “पानी से फसल डूबी, और कटाई में देरी से नमी बढ़ गई हर बोरे में 5-10 किलो अतिरिक्त देना पड़ रहा है।” दक्षिण मालवा में 5-15% उपज घट गई।
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खरीद में देरी से दोगुना नुकसान
कटाई में देरी से धान में नमी 17% से ऊपर चली गई, जबकि MSP के लिए 17% सीमा है। खराब दाने 5% से बढ़कर 10% हो गए। फाल्स स्मट जैसे रोग ने 1.21 लाख हेक्टेयर प्रभावित किया। मंडियों में खरीद सितंबर 16 से शुरू हुई, लेकिन अब तक 7.6 लाख टन खरीदा गया, जबकि 6.8 लाख उठाया। किसानों को कम दाम मिल रहे हैं। गुरचेत सिंह ने कहा, “बारिश से कटाई रुकी, मंडियों में भीड़ नहीं, और नुकसान 20-25%।” कुल नुकसान 7,500-10,000 करोड़, जिसमें बासमती 20-25% प्रभावित।
केंद्र से 8,000 करोड़ पैकेज, मुआवजा 50,000/एकड़
किसान नेता हरचंद सिंह बरसात ने केंद्र से 8,000 करोड़ राहत पैकेज की माँग की। प्रति एकड़ मुआवजा 6,800 से बढ़ाकर 50,000 रुपये करें। पंजाब सरकार ने फसल बीमा क्लेम तेज करने और नुकसान सर्वे का वादा किया। 37% धान प्रभावित, और बाढ़ से 3.54 लाख लोग विस्थापित। किसानों को सलाह: फसल बीमा क्लेम करें, और अगले सीजन के लिए जल निकासी सुधारें।
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