बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Banda University of Agriculture and Technology) उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में आधुनिक खेती के क्षेत्र में एक नया मिसाल कायम कर रहा है। विश्वविद्यालय ने पॉलीहाउस में उन्नत और लंबवत खेती (vertical farming) तकनीकों के माध्यम से सब्जी उत्पादन का एक सफल और प्रेरक मॉडल विकसित किया है, जो छोटे-मध्यम किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहा है। हाल ही में साझा की गई तस्वीरों में दिख रहा है कि पॉलीहाउस में टमाटर की फसल लद-फद कर रही है।
पॉलीहाउस में उन्नत खेती का मॉडल
बांदा कृषि विश्वविद्यालय ने पॉलीहाउस में लंबवत खेती (vertical farming) और हाइड्रोपोनिक/एरोपोनिक जैसी तकनीकों का सफल प्रयोग किया है। इस मॉडल में टमाटर के साथ रंगीन गोभी (purple, orange, green varieties), ब्रोकोली, गांठ गोभी (knol-khol), लेट्यूस, पालक, धनिया और अन्य लीफी सब्जियां एक ही जगह उगाई जा रही हैं। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
पॉलीहाउस में लंबवत जाली (Polyhouse Vegetable Farming) और मल्टी-टियर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिससे एक ही क्षेत्र में 3-4 गुना ज्यादा उत्पादन हो रहा है। टमाटर की फसल में हाइब्रिड वैरायटी का उपयोग किया गया है, जो रोग प्रतिरोधक है और फल चमकदार, एकसमान आकार के और लंबे समय तक ताजा रहते हैं। रंगीन गोभी और ब्रोकोली जैसी विदेशी सब्जियां स्थानीय बाजारों में अच्छा दाम दे रही हैं, क्योंकि इनकी मांग होटलों, रेस्तरां और सुपरमार्केट में तेजी से बढ़ रही है।
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तकनीकी नवाचार और फायदे
विश्वविद्यालय ने ड्रिप सिंचाई, फर्टिगेशन (खाद पानी के साथ देने की प्रणाली), मल्चिंग और IPM (Integrated Pest Management) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया है। इससे पानी और खाद का खर्च 40-60% तक कम हुआ है। पॉलीहाउस में तापमान और नमी नियंत्रित रहती है, इसलिए सर्दी-गर्मी दोनों मौसम में उत्पादन जारी रहता है। कीट-रोग का हमला बहुत कम होता है, क्योंकि पॉलीहाउस में हवा का संचार नियंत्रित रहता है और जैविक स्प्रे का उपयोग किया जाता है।
इस मॉडल से प्रति एकड़ उत्पादन सामान्य खेती से 4-5 गुना ज्यादा है। टमाटर की पैदावार 400-500 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच रही है। रंगीन गोभी और ब्रोकोली का भाव बाजार में 80-150 रुपये किलो तक मिल रहा है। गांठ गोभी और अन्य सब्जियां भी अच्छा दाम दे रही हैं। इससे किसानों की आय में कई गुना वृद्धि हो रही है।
किसानों के लिए प्रेरणा और अवसर
बांदा कृषि विश्वविद्यालय ने इस मॉडल को किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण शिविर, किसान मेला और डेमो प्लॉट का आयोजन किया है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक किसानों को पॉलीहाउस निर्माण, वैरायटी चयन, खाद प्रबंधन और बाजार जुड़ाव पर मुफ्त सलाह दे रहे हैं। बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्र में ये मॉडल बहुत उपयोगी है, क्योंकि पानी की बचत और उच्च मूल्य वाली फसलें उगाई जा रही हैं।
अगर आप भी पॉलीहाउस या संरक्षित खेती में रुचि रखते हैं, तो बांदा कृषि विश्वविद्यालय से संपर्क करें। वहां के वैज्ञानिक आपको उन्नत वैरायटी, तकनीक और सरकारी योजनाओं (जैसे NHM, MIDH) का लाभ उठाने में मदद करेंगे।
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