उत्तराखंड सरकार किसानों की आय बढ़ाने और पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि को मजबूत बनाने के लिए तेजी से काम कर रही है। विशेष रूप से सेब की अति सघन बागवानी योजना को तेज गति दी जा रही है, जिसमें क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का फोकस सेब के साथ-साथ कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसे उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन को बढ़ाने पर है। ये कदम न केवल किसानों की कमाई बढ़ाएंगे, बल्कि पहाड़ों से पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी मदद करेंगे।
सेब की अति सघन बागवानी योजना, एक क्रांतिकारी कदम
उत्तराखंड में सेब की खेती सदियों से चली आ रही है, लेकिन पारंपरिक तरीकों से उत्पादन और आय सीमित रहती है। अब सरकार अति सघन बागवानी (High Density Plantation) को बड़े पैमाने पर लागू कर रही है। इस योजना के तहत एक हेक्टेयर में 2000-3000 पौधे लगाए जाते हैं (पारंपरिक में 400-500 पौधे), जिससे पैदावार 4-5 गुना तक बढ़ जाती है। पौधे जल्दी फल देने वाले (2-3 साल में उत्पादन शुरू) और कम जगह में ज्यादा उत्पादन देने वाले होते हैं।
मुख्य सचिव और कृषि विभाग की हालिया बैठकों में सेब की नवीनतम प्रजातियों के बागान स्थापित करने पर जोर दिया गया है। क्लस्टर आधारित एप्रोच अपनाई जा रही है, यानी एक क्षेत्र में कई किसानों को एक साथ जोड़कर बागान लगवाए जा रहे हैं। इससे सिंचाई, कीट प्रबंधन, मार्केटिंग और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं साझा रूप से आसान हो जाती हैं। सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक सेब के 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में अति सघन बागवानी करना है, जिससे सेब का सालाना टर्नओवर 200 करोड़ से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये तक पहुंचाया जा सके।
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कीवी और ड्रैगन फ्रूट की खेती को मिल रहा बढ़ावा
सेब के साथ-साथ उत्तराखंड की जलवायु कीवी और ड्रैगन फ्रूट के लिए बहुत उपयुक्त है। कीवी नीति 2030-31 तक लागू है, जिसमें 11 पर्वतीय जिलों में कीवी बागान लगाने पर 70 प्रतिशत सब्सिडी (12 लाख रुपये प्रति एकड़ की लागत पर) दी जा रही है। वर्तमान में 683 हेक्टेयर में कीवी उगाई जा रही है, जिसका उत्पादन 382 मीट्रिक टन है। सरकार का लक्ष्य 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र और 33,000 मीट्रिक टन उत्पादन तक पहुंचना है, जिससे लगभग 17,500 किसान लाभान्वित होंगे।
ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए अलग योजना चल रही है, जिसमें तराई क्षेत्र (उधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल आदि) में 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। वर्तमान में 35 एकड़ में उत्पादन हो रहा है, जिसे 225 एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य है। ये फसलें कम पानी में चलती हैं और उच्च मूल्य वाली होती हैं, इसलिए पहाड़ी किसानों की आय में बड़ा इजाफा होगा।
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कोल्ड स्टोरेज, नर्सरी अपग्रेड और दीर्घकालिक लक्ष्य
सरकार ने सिर्फ बागान लगाने तक सीमित नहीं रखा। सेब तुड़ाई उपरांत प्रबंधन योजना के तहत कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग इकाइयां और पैकेजिंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें 50-70 प्रतिशत सब्सिडी मिल रही है। नर्सरी अपग्रेड पर भी जोर है, ताकि किसानों को उन्नत रोपण सामग्री आसानी से मिले।
दीर्घकालिक लक्ष्य (2030-2050) के तहत सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन कई गुना बढ़ाना है। इससे किसानों की आय स्थिर होगी, पलायन रुकेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। क्लस्टर आधारित खेती से संसाधनों का बेहतर उपयोग, बाजार तक पहुंच और तकनीकी मदद आसान हो जाती है।
किसानों के लिए संदेश
भाइयो, उत्तराखंड सरकार की ये योजनाएं पहाड़ी किसानों के लिए सुनहरा अवसर हैं। सेब की अति सघन बागवानी, कीवी और ड्रैगन फ्रूट की खेती से कम जगह में ज्यादा कमाई संभव है। अगर आपके पास उपयुक्त भूमि है, तो नजदीकी उद्यान विभाग या कृषि केंद्र से संपर्क करें। सब्सिडी, प्रशिक्षण और बाजार सहायता उपलब्ध है।
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