देश में अरहर (तुवर) दाल के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ गए हैं। केंद्र सरकार ने रबी 2025-26 के लिए अरहर का MSP 7150 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था लेकिन वर्तमान में मंडियों में भाव 6200 से 6800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहे हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भाव MSP से 300 से 900 रुपये तक कम हैं। किसान भाई परेशान हैं क्योंकि लागत बढ़ गई है लेकिन दाम नहीं मिल रहे।
कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश की इंदौर और उज्जैन मंडियों में अरहर का औसत भाव 6300-6500 रुपये प्रति क्विंटल है। महाराष्ट्र के लातूर और नांदेड़ में 6200-6400 रुपये के बीच चल रहा है। कर्नाटक के रायचूर और गुलबर्गा में भाव 6350-6600 रुपये तक हैं। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी यही हाल है – भाव MSP से नीचे या बराबर हैं। व्यापारी भाव दबा रहे हैं क्योंकि बाजार में स्टॉक ज्यादा है और मांग कम है।
किसान संगठनों का कहना है कि MSP सिर्फ घोषणा बनकर रह गया है। सरकारी खरीद कम होने से व्यापारी कम दाम पर खरीद रहे हैं। कई किसानों ने बताया कि लागत 6500-7000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है लेकिन दाम MSP से नीचे मिल रहे हैं। इससे कर्ज बढ़ रहा है और खेती में रुचि कम हो रही है।
सरकार ने शुरू की MSP पर खरीद
केंद्र सरकार ने स्थिति को देखते हुए MSP पर अरहर की खरीद शुरू कर दी है। खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है और किसानों को तुरंत भुगतान का वादा किया गया है। मध्य प्रदेश में भावांतर योजना के तहत MSP और बाजार भाव के अंतर की राशि सीधे किसानों के खाते में भेजी जा रही है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी सरकारी एजेंसियां खरीद कर रही हैं।
किसान भाइयों को सलाह दी जा रही है कि अगर आपके पास अरहर का स्टॉक है तो सरकारी खरीद केंद्र पर तुरंत बेच दें। बाजार भाव MSP से नीचे हैं लेकिन सरकारी खरीद में पूरा MSP मिलेगा। अगर भावांतर योजना लागू है तो अंतर की राशि भी मिलेगी।
अन्य राज्यों में अरहर के ताजा भाव
राजस्थान में कोटा और जोधपुर मंडियों में भाव 6250-6450 रुपये प्रति क्विंटल हैं। उत्तर प्रदेश में कानपुर और लखनऊ में 6300-6600 रुपये के बीच चल रहे हैं। बिहार में पटना और मुजफ्फरपुर में 6400-6700 रुपये तक हैं। कुल मिलाकर ज्यादातर उत्पादक राज्यों में भाव MSP से नीचे या बराबर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भाव गिरने की मुख्य वजह सरकारी खरीद में कमी और बाजार में स्टॉक ज्यादा होना है। अगर खरीद बढ़ी तो भाव MSP के आसपास पहुंच सकते हैं।
किसानों की मांग
किसान संगठन सरकार से MSP पर पूरी खरीद करने और भावांतर योजना को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। कई जगहों पर किसान प्रदर्शन भी कर रहे हैं। सरकार ने कहा है कि खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
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