मकर संक्रांति के बाद मौसम में बदलाव साफ दिखने लगा है। ठंड अब धीरे-धीरे ढलान पर है और बागवानी में भी हलचल शुरू हो गई है। बहुत से इलाकों में आम के पेड़ों पर बौर आने लगे हैं, जिससे बागवान खुश हैं। लेकिन दूसरी तरफ कई किसान परेशान भी हैं, क्योंकि कई बागों में कुछ पेड़ों पर बौर आ रहा है, जबकि कुछ पेड़ों पर सिर्फ पत्तियां ही दिख रही हैं। कहीं एक ही बाग में कुछ पेड़ों में खूब बौर है और कुछ बिल्कुल खाली हैं। यह देखकर किसानों का सिर चकरा रहा है कि आखिर यह कौन-सा रोग है और इसका इलाज क्या है।
अगर आपके बाग में भी यही समस्या है तो घबराने की जरूरत नहीं है। एक्सपर्ट का कहना है कि यह आम के पेड़ का कोई “रोग” नहीं है, बल्कि एक प्रकार का डिसऑर्डर है, जिसे Alternate Bearing यानी एकांतरण फलन कहा जाता है। अच्छी बात यह है कि इसे सही प्रबंधन से काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है और जिन पेड़ों में बौर नहीं आया है, उनमें भी बौर लाया जा सकता है।
क्यों कुछ पेड़ों में बौर नहीं आता? क्या है एकांतरण फलन (Alternate Bearing)
बालाघाट जैसे कई इलाकों में आम के पेड़ों पर बौर नहीं आने की शिकायतें सामने आई हैं। इस पर उद्यानिकी विभाग की एक्सपर्ट लेषा सुल्खे बताती हैं कि यह समस्या एकांतरण फलन की वजह से होती है। इस डिसऑर्डर में आम का पेड़ एक साल भर-भरकर फल देता है, लेकिन अगले साल वही पेड़ कमजोर होकर लगभग खाली रह जाता है। मतलब अगले सीजन में बौर बहुत कम आता है या कई बार बिल्कुल नहीं आता। किसान इसे रोग समझ लेते हैं, लेकिन असल में यह फसल लेने के बाद पेड़ के अंदर पोषण असंतुलन का नतीजा होता है।
इसका सीधा नुकसान यह होता है कि बाग की कुल उत्पादन क्षमता हर साल बराबर नहीं रहती। किसान एक साल बहुत अच्छा उत्पादन लेता है, लेकिन अगले साल आमदनी गिर जाती है।
एकांतरण फलन की असली वजह: CN Ratio बिगड़ना
एक्सपर्ट के मुताबिक इस समस्या की सबसे बड़ी वजह खेत में CN Ratio यानी Carbon:Nitrogen ratio का बिगड़ना है। आम की अच्छी फ्लावरिंग और बौर के लिए CN ratio का सही संतुलन होना जरूरी है। वैज्ञानिक रूप से आम के बाग में CN Ratio 10:1 को आदर्श माना जाता है। जब यह अनुपात बिगड़ता है, तब पेड़ ज्यादा पत्ते और बढ़वार की तरफ चला जाता है और बौर बनने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है।
कुछ पेड़ों में यह समस्या वंशानुगत भी होती है, यानी पेड़ की किस्म में ही tendency होती है कि वह एक साल ज्यादा फल दे और अगले साल कम। कई बार मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, लगातार एकतरफा उर्वरक, और पानी की कमी भी इस डिसऑर्डर को और बढ़ा देती है।
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CN Ratio ठीक होगा तो बौर वापस आएगा
अगर आपके बाग में कुछ पेड़ों पर बौर नहीं आया है, तो सबसे पहले ध्यान CN ratio पर देना चाहिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसान भाई कार्बन आधारित उर्वरकों का उपयोग करके इस असंतुलन को काफी हद तक सुधार सकते हैं। खेत में सूखी पत्तियां इकट्ठा करके हल्का धुआं देना भी एक पारंपरिक तरीका माना जाता है, जिससे पेड़ तक कार्बन पहुंचती है और CN ratio संतुलित होने लगता है। जब पेड़ के अंदर कार्बन बढ़ता है, तो फ्लावरिंग और बौर आने की संभावना बढ़ जाती है।
यहां किसान को यह भी समझना जरूरी है कि अगर नाइट्रोजन ज्यादा दी गई, तो पेड़ सिर्फ पत्ते उगाएगा। इसलिए इस समय जरूरत है सही संतुलन की, ना कि ज्यादा यूरिया देने की।
किस्म का चुनाव भी जरूरी
एक्सपर्ट यह भी बताते हैं कि यदि किसान नया बाग लगाने की सोच रहे हैं तो वे ऐसी किस्में चुनें, जिनमें एकांतरण फलन की समस्या कम होती है। कई दक्षिण भारतीय किस्मों में यह समस्या कम देखी जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि बाकी किस्में खराब हैं, लेकिन नए बाग के लिए किस्म चुनते समय यह एक बड़ा फैक्टर बन सकता है।
ट्रेनिंग-प्रूनिंग और सिंचाई
बाग में लगातार उत्पादन बनाए रखने के लिए पेड़ की training और pruning बहुत जरूरी है। इसका मतलब है कि पेड़ की अनावश्यक, कमजोर और अंदर की तरफ बढ़ रही शाखाओं को हटाया जाए। जब शाखाएं कम और मजबूत होंगी, तो उपलब्ध पोषक तत्व सही जगह पहुंचेंगे और पेड़ की ऊर्जा सही तरीके से बौर बनाने में लगेगी।
साथ ही पानी की कमी के कारण भी पेड़ पोषक तत्व ठीक से नहीं ले पाता। इसलिए किसानों को पेड़ के आसपास थाला बनाकर सिंचाई की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। थाला बनाकर देने से पानी जड़ों तक जाता है, मिट्टी में नमी बनी रहती है और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।
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