गर्मी में तोरई से होगी जबरदस्त कमाई! काशी श्रेया वैरायटी से एक हेक्टेयर में 250 क्विंटल तक पैदावार

Kashi Shreya Tori Variety: तोरई (Sponge Gourd) ऐसी सब्जी है जो बाजार में लगातार अच्छा दाम देती रहती है। गर्मियों में इसकी मांग बहुत तेज रहती है और अगर सही वैरायटी का चुनाव किया जाए तो एक एकड़ से भी अच्छी कमाई हो सकती है। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी उन्नत वैरायटी की जो बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती के लिए बहुत उपयुक्त है, काशी श्रेया (Kashi Shreya) तोरई। ये वैरायटी ICAR-Indian Institute of Vegetable Research (IIVR), वाराणसी द्वारा विकसित की गई है।

काशी श्रेया तोरई वैरायटी की मुख्य विशेषताएं

काशी श्रेया वैरायटी की सबसे बड़ी खासियत है उसकी उच्च पैदावार और लंबे समय तक फल देने की क्षमता। ये वैरायटी बुवाई के 45-50 दिन में पहली तुड़ाई शुरू कर देती है और कुल फसल चक्र 120-140 दिन का होता है। फल लंबे (25-35 सेमी), पतले, हल्के हरे रंग के और चमकदार होते हैं। औसत फल का वजन 180-220 ग्राम तक रहता है। फल की छिलका पतली और मुलायम होती है, जिससे बाजार में अच्छा दाम मिलता है।

ये वैरायटी अच्छी पैदावार वाली है। अच्छी देखभाल और प्रबंधन से प्रति हेक्टेयर 200 से 250 क्विंटल तक उत्पादन आसानी से मिल जाता है। पौधे मजबूत, बेल लंबी और फल क्लस्टर में लगते हैं, जिससे तुड़ाई आसान होती है। ये वैरायटी गर्मी सहन करने वाली है और पाउडरी मिल्ड्यू, डाउनी मिल्ड्यू और फ्रूट फ्लाई जैसे रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधक क्षमता रखती है। ये उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य गर्म इलाकों में बहुत सफल साबित हुई है।

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बड़े पैमाने पर खेती के लिए क्यों चुनें काशी श्रेया

तोरई की खेती में सबसे बड़ा फायदा तब मिलता है जब फसल जल्दी तैयार हो और लंबे समय तक उत्पादन दे। काशी श्रेया वैरायटी मार्च-अप्रैल में बुवाई करने पर मई-जून में बाजार में तोरई पहुंचाती है, जब भाव 30-60 रुपये किलो तक रहते हैं। फसल लंबी चलती है, जिससे किसान को लगातार कमाई मिलती रहती है। NSC के प्रमाणित बीज होने से अंकुरण दर 85-90 प्रतिशत से ज्यादा रहती है और पैदावार भरोसेमंद मिलती है।

बड़े खेत में खेती के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

बड़े पैमाने पर तोरई की खेती के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तैयारी करें। खेत में 2-3 जुताई करें और 15-20 टन गोबर खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें। मिट्टी बलुई दोमट या दोमट होनी चाहिए, जिसमें जल निकासी अच्छी हो। pH 6.0 से 7.5 के बीच रखें।

बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर 1.5 से 2 किलो काफी होती है। NSC से प्रमाणित काशी श्रेया बीज लें। बीज को थिरम या कैप्टान (2 ग्राम प्रति किलो) से उपचारित करें। बुवाई मार्च के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह में करें। पंक्ति से पंक्ति 2-2.5 मीटर और पौधे से पौधे 60-90 सेमी दूरी रखें। गड्ढों में 2-3 बीज डालें और बाद में पतला करें। नर्सरी में बोकर 15-20 दिन में रोपाई भी कर सकते हैं।

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सिंचाई नियमित लेकिन हल्की रखें। पहली सिंचाई बुवाई के 7-10 दिन बाद। फूल आने पर पानी थोड़ा बढ़ाएं, लेकिन ज्यादा न होने दें। खाद के लिए बेसल में 80-100 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फॉस्फोरस और 60 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर डालें। टॉप ड्रेसिंग में बाकी नाइट्रोजन दें। फूल आने पर पोटाश ज्यादा दें ताकि फल मोटे और ज्यादा लगें।

तुड़ाई फल 10-12 इंच लंबे होने पर हर 2-3 दिन में करें। ज्यादा बड़े होने से फल फाइबरयुक्त हो जाते हैं और बाजार में कम दाम मिलता है। अच्छी पैदावार से 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिल सकती है। बाजार में भाव 20-50 रुपये किलो तक रहता है, तो अच्छा मुनाफा होता है।

NSC से प्रमाणित बीज कैसे प्राप्त करें

NSC सरकारी कंपनी है, इसलिए बीज प्रमाणित, उच्च अंकुरण दर वाले और भरोसेमंद मिलते हैं। काशी श्रेया तोरई के 5 ग्राम पैकेट मात्र 35 रुपये में उपलब्ध है। बड़े पैमाने पर खेती के लिए 1 किलो या ज्यादा मात्रा में ऑर्डर कर सकते हैं। ऑनलाइन ऑर्डर करने के लिए लिंक: https://mystore.in/en/product/nsc-sponge-gourd-kashi-shreya-5-gm

किसान भाइयो, काशी श्रेया से तोरई उगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। ये वैरायटी वैज्ञानिक रूप से विकसित है, बाजार में डिमांड वाली है और कम खर्च में ज्यादा उत्पादन देती है।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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