मिजोरम के किसानों के लिए राहत और कमाई बढ़ाने वाली बड़ी खबर सामने आई है। मिजोरम सरकार फरवरी महीने से राज्य में स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली मुख्य फसलों की खरीद शुरू करने जा रही है। इस खरीद में अदरक, हल्दी, सूखी झाड़ू की डंडियां और मिर्च शामिल हैं। मिजोरम एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के को-चेयरमैन के.सी. लालमलसावमजौवा ने बताया कि सरकार किसानों की उपज को निश्चित दर पर खरीदेगी, जिससे बाजार में दाम गिरने पर भी किसानों को नुकसान नहीं होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार पहले ही धान यानी बिना छिलके वाले चावल की खरीद नवंबर से शुरू कर चुकी है और यह प्रक्रिया मार्च तक जारी रहेगी। यानी राज्य में इस समय किसानों की उपज को सरकारी सपोर्ट प्राइस पर खरीदने की व्यवस्था लगातार मजबूत की जा रही है।
कब से कब तक होगी खरीद
सरकारी योजना के अनुसार अदरक की खरीद फरवरी से मई तक चलेगी। सूखी झाड़ू की डंडियों की खरीद फरवरी से मार्च तक होगी, जबकि हल्दी और मिर्च की खरीद फरवरी से अप्रैल तक की जाएगी। सरकार ने यह समय इसलिए तय किया है ताकि फसल कटाई के बाद किसान आसानी से तय स्थानों पर अपनी उपज बेच सकें और उन्हें तत्काल भुगतान मिल सके।
सरकारी खरीद का फायदा यह होगा कि किसान को व्यापारियों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें मंडी में भाव गिरने का डर कम होगा। खासकर अदरक और मिर्च जैसी फसलों में बाजार में उतार-चढ़ाव काफी तेज रहता है।
MSP रेट क्या तय किया गया है
को-चेयरमैन लालमलसावमजौवा ने बताया कि सरकार राज्य के फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘हैंडहोल्डिंग योजना’ के तहत खरीदी जाने वाली फसलों के लिए अधिकतम समर्थन मूल्य (MSP) तय कर रही है। अदरक के लिए MSP ₹50 प्रति किलोग्राम, सूखी झाड़ू की डंडियों के लिए ₹80 प्रति किलोग्राम और मिर्च के लिए ₹350 प्रति किलोग्राम रखा गया है। वहीं हल्दी के लिए ₹20 प्रति किलोग्राम और धान के लिए ₹30 प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य तय किया गया है।
सरकार के मुताबिक यह रेट किसानों को एक “सेफ्टी नेट” देगा, ताकि न्यूनतम दाम सुनिश्चित हो सके और छोटे किसानों की आय स्थिर बनी रहे।
SCC सेंटर पर ही होगी सरकारी खरीद
सरकार ने साफ किया है कि इस बार बफर स्टॉक की व्यवस्था नहीं की जाएगी। सभी मुख्य फसलें राज्य में अलग-अलग हिस्सों में बनाए गए सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर्स (SCCs) पर ही खरीदी जाएंगी। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को नियंत्रित रखना और फसल का सही रिकॉर्ड बनाए रखना है।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ उन्हीं किसानों की उपज खरीदी जाएगी जो स्थानीय रूप से खेती करते हैं। बाहर से लाई गई फसलें स्वीकार नहीं की जाएंगी। यानी खरीद का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो मिजोरम में पंजीकृत किसान हैं।
किसानों के खाते में DBT से भुगतान
सरकार ने किसानों को भुगतान देने के तरीके को भी स्पष्ट किया है। अधिकतम समर्थन मूल्य की राशि DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिशियरी ट्रांसफर के जरिए सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और भुगतान में देरी का खतरा भी कम होगा।
खरीद व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्यभर में अदरक के लिए 64 SCCs और सूखी झाड़ू की डंडियों के लिए 13 SCCs बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर खरीद की निगरानी के लिए सरकार सुपरवाइजर और असिस्टेंट सुपरवाइजर तैनात करेगी। उन्हें किसान सोसाइटी के नेता भी सहायता देंगे ताकि प्रक्रिया सही तरीके से चले।
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बिना सोसाइटी पंजीकरण नहीं बिकेगी फसल
सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की किसान सोसाइटी में रजिस्ट्रेशन जरूर करा लें। नियम यह है कि किसान अपने क्षेत्र के बाहर किसी SCC में फसल नहीं बेच सकेगा। यानी जहां का रजिस्ट्रेशन होगा, वहीं का SCC उसके लिए मान्य होगा।
हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि किसान अगर चाहे तो तय सपोर्ट प्राइस से अधिक दाम मिलने पर अपनी फसल दूसरी प्राइवेट एजेंसियों को बेच सकता है। यानी सरकार MSP को न्यूनतम सुरक्षा के रूप में दे रही है, बाध्यता के रूप में नहीं।
ऑर्गेनिक अदरक की बढ़ती मांग
राज्य कृषि और किसान कल्याण विभाग की विशेष सचिव रामदिनलियानी ने कहा कि मिजोरम की अदरक ऑर्गेनिक क्वालिटी की वजह से देश के कई हिस्सों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। उन्होंने बताया कि कई खरीदारों ने रुचि दिखाई है, लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण सरकार ने अभी तक किसी बड़े खरीदार के साथ समझौता नहीं किया है।
यह स्थिति किसानों के लिए दोहरा फायदा भी बन सकती है। एक तरफ सरकार का MSP सपोर्ट रहेगा, दूसरी तरफ यदि बाजार में अच्छी कीमत मिलती है तो किसान निजी एजेंसियों को बेचकर ज्यादा मुनाफा कमा सकता है।
पिछली बार अदरक पर ₹137.72 करोड़ खर्च
अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री लालदुहोमा के नेतृत्व वाली ZPM सरकार के चुनावी वादों में फसलों की सरकारी खरीद शामिल थी। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने पिछले साल अदरक की खरीद के लिए सपोर्ट प्राइस के रूप में लगभग ₹137.72 करोड़ खर्च किए थे। इसी दौरान सरकार ने किसानों से 48,602.29 क्विंटल सूखी झाड़ू की डंडियां भी खरीदी थीं, जिस पर लगभग ₹2 करोड़ खर्च हुआ। साथ ही 1,400 क्विंटल से ज्यादा धान भी लगभग ₹50 लाख में खरीदा गया था।
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