अगर जनवरी का महीना निकल रहा है और आपका खेत अब भी खाली पड़ा है, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इस समय भी किसान एक ऐसी सब्जी की खेती कर सकते हैं, जो कम समय में तैयार होती है और जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है। हम बात कर रहे हैं भिंडी की खेती की, जो जनवरी के मध्य से फरवरी तक बोई जाए तो बेहद फायदे का सौदा साबित होती है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय बोई गई भिंडी की फसल लगभग 45 से 50 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस मौसम में कीटों का प्रकोप कम रहता है और फल की गुणवत्ता भी बेहतर मिलती है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।
जनवरी–फरवरी की भिंडी क्यों देती है ज्यादा मुनाफा
इस समय मौसम न ज्यादा ठंडा होता है और न ही ज्यादा गर्म, जिससे भिंडी के पौधों की बढ़वार संतुलित रहती है। तापमान अनुकूल होने के कारण फूल और फल गिरने की समस्या कम होती है। कई प्रगतिशील किसान जनवरी में भिंडी की बुवाई कर फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत से तुड़ाई शुरू कर देते हैं, जब बाजार में भिंडी की आवक सीमित रहती है। कम सप्लाई और अच्छी मांग के कारण किसानों को बेहतर भाव मिल जाता है, जिससे कम समय में अच्छी आमदनी संभव हो जाती है।
जनवरी–फरवरी के लिए कौन-सी किस्में रहेंगी बेहतर
कृषि क्लिनिक के विशेषज्ञ नवनीत रेवापाटी के अनुसार इस मौसम में भिंडी की उन्नत और रोग-प्रतिरोधी किस्मों का चयन करना बेहद जरूरी है। जनवरी–फरवरी के लिए अर्का अनामिका, अर्का अभय, क्रांति, वर्षा उपहार, पंजाब पद्मिनी, पंजाब-8, काशी प्रगति, काशी विकास, पुसा सावनी और पुसा A-4 जैसी किस्में उपयुक्त मानी जाती हैं। इन किस्मों में फल अच्छे आकार के बनते हैं, तुड़ाई लंबे समय तक चलती है और उत्पादन भी ज्यादा मिलता है। सही देखभाल के साथ इन किस्मों से लागत के मुकाबले मुनाफा कहीं बेहतर निकलता है।
मिट्टी और खेत की तैयारी से तय होती है पैदावार
भिंडी की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसमें पानी निकासी की सही व्यवस्था हो। खेत की पहली जुताई गहरी करनी चाहिए ताकि पिछली फसल के अवशेष पूरी तरह नष्ट हो जाएं। इसके बाद 2 से 3 बार हल्की जुताई करके खेत को भुरभुरा बना लेना चाहिए। अच्छी तरह तैयार खेत में बीज जमाव बेहतर होता है और पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है।
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गोबर खाद और बीज उपचार से बढ़ेगी उपज
विशेषज्ञों के अनुसार भिंडी की अच्छी पैदावार के लिए अंतिम जुताई के समय प्रति एकड़ 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर खाद खेत में मिलाना बेहद फायदेमंद रहता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को शुरुआती पोषण मिलता है। बीज की मात्रा 2 से 3 किलो प्रति एकड़ पर्याप्त होती है। बुवाई से पहले बीजों को कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा से उपचारित करना जरूरी है, ताकि अंकुरण के बाद फसल शुरुआती रोगों से सुरक्षित रहे। कतार से कतार की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 से 30 सेंटीमीटर रखने से पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है।
कम लागत में जल्दी तैयार होने वाली फसल
जनवरी के आखिर में खाली पड़े खेतों के लिए भिंडी की खेती एक बेहतरीन विकल्प साबित होती है। यह फसल करीब डेढ़ महीने में तुड़ाई देने लगती है और अगर देखभाल सही रहे तो लंबे समय तक ताजा फल देती रहती है। कीट प्रकोप कम होने से दवाओं पर खर्च भी सीमित रहता है और शुद्ध मुनाफा बढ़ जाता है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में किसान रबी सीजन के बाद खाली खेतों में भिंडी की खेती अपनाकर लगातार कमाई कर रहे हैं।
सही समय, सही किस्म और सही तकनीक है सफलता की कुंजी
अगर किसान जनवरी–फरवरी में सही किस्म का चयन करें, खेत की तैयारी ठीक से करें और बीज उपचार व पोषण पर ध्यान दें, तो भिंडी की खेती से कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। जिन किसानों के खेत इस समय खाली हैं, उनके लिए भिंडी की खेती एक ऐसा मौका है जिसे चूकना नहीं चाहिए।
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