मूंग की अगेती खेती किसानों के लिए कम समय में मुनाफा कमाने का अच्छा मौका बनती जा रही है। जनवरी के तीसरे सप्ताह से फरवरी के दूसरे सप्ताह तक इसकी बुवाई करके किसान रबी और खरीफ के बीच खाली समय का सही उपयोग कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मूंग ऐसी दलहनी फसल है जिसमें पानी कम लगता है और फसल बहुत जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे लागत भी सीमित रहती है।
कम लागत में जल्दी तैयार होने वाली फसल
मूंग की खासियत यही है कि यह लगभग दो महीने में पककर तैयार हो जाती है। सही देखभाल में फसल 60 से 65 दिनों में कटाई योग्य हो जाती है। एक एकड़ में इसकी खेती पर खर्च बहुत ज्यादा नहीं आता, जबकि आमदनी अच्छी मिल जाती है। यही वजह है कि छोटे और मध्यम किसान भी इसकी अगेती खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
खेत की तैयारी और बुवाई का सही समय
बेहतर पैदावार के लिए खेत की तैयारी बहुत जरूरी होती है। जनवरी के आखिरी दिनों या फरवरी की शुरुआत में खेत की दो से तीन गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाया जाता है। इसके बाद खेत को समतल करना जरूरी होता है ताकि पानी बराबर फैले और पौधों की बढ़वार एकसार हो सके। विशेषज्ञों के अनुसार इसी समय की गई बुवाई से फसल का विकास बेहतर होता है।
उन्नत किस्में देती हैं ज्यादा उत्पादन
अगर किसान अच्छी किस्म का चुनाव करें तो पैदावार और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं। अगेती खेती के लिए SML-668, IPM 02-14 और PDM 139 जिसे बंसी गोल्ड भी कहा जाता है, अच्छी मानी जाती हैं। ये किस्में जल्दी पकने वाली हैं और रोगों का असर भी इनमें अपेक्षाकृत कम देखा जाता है। प्रति एकड़ आठ से दस किलो बीज पर्याप्त रहता है।
खाद, सिंचाई और खरपतवार पर ध्यान जरूरी
मूंग की अच्छी फसल के लिए संतुलित खाद जरूरी होती है। एक एकड़ में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की सही मात्रा देने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। बुवाई के समय डीएपी और पोटाश डालना लाभकारी माना जाता है। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के तुरंत बाद सही दवा का छिड़काव करना जरूरी होता है, जिससे शुरुआती अवस्था में फसल को नुकसान न हो। पहली सिंचाई आमतौर पर बुवाई के 25 से 30 दिन बाद पर्याप्त रहती है।
पैदावार और बाजार में अच्छा भाव
अगेती मूंग की औसत उपज चार से छह क्विंटल प्रति एकड़ तक मिल जाती है। मौजूदा समय में बाजार में मूंग दाल के अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिससे किसानों को बढ़िया आमदनी हो रही है। खर्च निकालने के बाद भी अच्छी-खासी बचत संभव है। इसके अलावा कटाई के बाद बचे अवशेषों से कंपोस्ट खाद बनाकर किसान अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, कम समय, कम पानी और सीमित लागत में तैयार होने वाली अगेती मूंग की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक भरोसेमंद विकल्प बन सकती है, खासकर उन किसानों के लिए जो साल भर खेत से लगातार कमाई चाहते हैं।
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