रबी सीजन में फूलगोभी की खेती करने वाले किसानों के लिए एक गंभीर चुनौती सामने आई है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर सहित कई जिलों में डायमंड बैक मोथ (Plutella xylostella) का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। यह कीट फसल की पत्तियों को पूरी तरह चट कर देता है, जिससे पौधे कंकाल जैसे दिखने लगते हैं और पैदावार बुरी तरह प्रभावित होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार तापमान में बदलाव और बढ़ोतरी इस कीट के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाती है, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है। यदि समय रहते उपाय न अपनाए गए तो फसल का 80 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।
कीट कैसे नुकसान पहुंचाता है
डायमंड बैक मोथ का मुख्य हमला इसके लार्वा (इल्ली) से होता है। लार्वा कोमल पत्तियों को खाकर उनमें छेद कर देता है और धीरे-धीरे पूरी पत्ती को नष्ट कर देता है। शुरुआती चरण में छोटे छेद दिखते हैं, लेकिन प्रकोप बढ़ने पर पत्तियां सिर्फ नसों का ढांचा बचती हैं। यह कीट फूलगोभी के गोभी वाले हिस्से को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे बाजार मूल्य घट जाता है। विशेषकर शीतकालीन और वसंतकालीन फसल में तापमान बढ़ने पर इसका प्रकोप बढ़ जाता है।
रोकथाम और नियंत्रण के उपाय
कृषि विभाग और विशेषज्ञों की सलाह है कि एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) अपनाकर इस कीट पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है। सबसे प्रभावी तरीका ‘ट्रैप क्रॉप’ तकनीक है — फूलगोभी की हर तीन पंक्तियों के बाद एक पंक्ति सरसों बोएं। यह कीट सरसों की ओर आकर्षित होता है और मुख्य फसल को छोड़ देता है। सरसों की पंक्तियों पर नियमित निगरानी करें और वहां कीट दिखने पर उन्हें नष्ट कर दें।
जैविक नियंत्रण के लिए 4 प्रतिशत नीम तेल का घोल बनाकर छिड़काव करें। यह उपाय 15 दिनों के अंदर कीटों की संख्या काफी कम कर देता है और पर्यावरण के लिए सुरक्षित है। यदि संक्रमण अधिक हो तो अच्छी गुणवत्ता वाले सिस्टमिक कीटनाशकों का उपयोग करें, लेकिन अनुशंसित मात्रा और समय पर ही। खेत की साफ-सफाई बनाए रखें, पुरानी फसल अवशेष हटाएं और फसल चक्रण अपनाएं ताकि कीट का चक्र टूटे।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि नियमित खेत निगरानी सबसे महत्वपूर्ण है। शुरुआती लक्षण दिखते ही जैविक या ट्रैप क्रॉप तरीके अपनाएं। इससे फसल को 90 प्रतिशत तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
फूलगोभी की फसल अब बढ़ रही है, इसलिए खेतों की जांच तुरंत शुरू करें। यदि लक्षण दिखें तो निकटतम कृषि केंद्र से सलाह लें। सही समय पर कार्रवाई से पैदावार बचाई जा सकती है.
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