अखरोट की खेती किसानों के लिए मुनाफे का शानदार जरिया है, और ICAR-Central Institute of Temperate Horticulture (CITH), श्रीनगर द्वारा विकसित सीआईटीएच प्रोलीफिक किस्म इसे और भी खास बनाती है। यह लेट्रल बियरिंग किस्म अपनी बंपर पैदावार और उत्कृष्ट गिरी की गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। किसानों के अनुभव बताते हैं कि यह किस्म पारंपरिक अखरोट की किस्मों से दोगुनी उपज देती है। इससे प्रति हेक्टेयर 4-5 टन अखरोट मिल सकता है, जो किसानों की आय को बढ़ाता है। आइए जानें कि यह किस्म क्यों है खास और इसे कैसे उगाएँ।
CITH Prolific की खासियत
सीआईटीएच प्रोलीफिक एक लेट्रल बियरिंग अखरोट की किस्म है, जिसमें 50% से ज्यादा फल शाखाओं के किनारे लगते हैं। यह विशेषता एक ही पेड़ पर अधिक फल उत्पादन सुनिश्चित करती है। इसके पेड़ मध्यम आकार के होते हैं और हिमालयी जलवायु, जैसे जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश, के लिए उपयुक्त हैं। किसानों के अनुभव बताते हैं कि इसकी गिरी हल्के रंग की, मोटी, और आसानी से निकलने वाली होती है, जिसमें 49% से अधिक रिकवरी दर है। वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, यह किस्म ठंडी और नम जलवायु में बेहतर फलती है, लेकिन सही देखभाल से अन्य क्षेत्रों में भी उगाई जा सकती है।
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बंपर उत्पादन क्षमता
CITH Prolific को MDP प्रणाली (6 मीटर x 6 मीटर दूरी पर रोपण) के तहत उगाने पर प्रति हेक्टेयर 4-5 टन अखरोट की पैदावार मिलती है। यह पारंपरिक किस्मों की तुलना में लगभग दोगुनी है, जो औसतन 2 टन प्रति हेक्टेयर देती हैं। किसानों के अनुभव बताते हैं कि इसकी उच्च उपज बाज़ार में अच्छा मुनाफा दिलाती है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, इस किस्म की गिरी का वजन और गुणवत्ता इसे निर्यात के लिए भी उपयुक्त बनाती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिलती है।
गिरी की गुणवत्ता
सीआईटीएच प्रोलीफिक की गिरी अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए मशहूर है। यह हल्के रंग की, भरी हुई, और मोटी होती है, जो बाज़ार में ऊँचे दामों पर बिकती है। एक किलो अखरोट से लगभग आधा किलो गिरी मिलती है, जो 49% से अधिक रिकवरी दर दर्शाती है। किसानों के अनुभव बताते हैं कि इसकी गिरी का स्वाद और बनावट इसे बेकरी, मिठाई, और ड्राई फ्रूट उद्योग में लोकप्रिय बनाती है। वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, यह गिरी पोषक तत्वों से भरपूर है, जिसमें प्रोटीन, ओमेगा-3, और एंटीऑक्सिडेंट्स शामिल हैं।
रोपण और मिट्टी की तैयारी
इसके पौधे लगाने के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी चुनें, जिसका pH 6 से 7 के बीच हो। रोपण से पहले खेत को अच्छे से जोतें और प्रति हेक्टेयर 10-15 टन गोबर की खाद डालें। 6×6 मीटर की दूरी पर पौधे लगाएँ, ताकि पेड़ों को पर्याप्त जगह और धूप मिले। किसानों के अनुभव बताते हैं कि सर्दियों (नवंबर-दिसंबर) में रोपण करने से पौधे मजबूत बनते हैं। वैज्ञानिक सलाह के अनुसार, जैव उर्वरक जैसे जायटॉनिक पोटाश डालने से जड़ें मजबूत होती हैं।
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देखभाल और पानी का प्रबंध
सीआईटीएच प्रोलीफिक की देखभाल आसान है। पौधों को हफ्ते में 2-3 बार पानी दें, लेकिन मिट्टी को ज्यादा गीला न करें। गर्मियों में पानी बढ़ाएँ और सर्दियों में कम करें। नीम का तेल (5 मिली प्रति लीटर पानी) छिड़ककर कीटों से बचाएँ। हर 3-4 महीने में गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डालें। किसानों के अनुभव बताते हैं कि समय-समय पर टहनियों की छँटाई करने से फल उत्पादन बढ़ता है। वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, ड्रिप इरिगेशन का उपयोग पानी की बचत करता है और पैदावार बढ़ाता है।
अखरोट के स्वास्थ्य लाभ
CITH Prolific अखरोट खाने के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। यह ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर है, जो हृदय रोगों के जोखिम को कम करता है। इसके एंटीऑक्सिडेंट्स दिमागी स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं और याददाश्त बढ़ाते हैं। यह वजन नियंत्रण में मदद करता है, क्योंकि यह लंबे समय तक पेट भरा रखता है। अखरोट रक्तचाप और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है, साथ ही त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद है। किसानों के अनुभव बताते हैं कि इसकी गिरी बाज़ार में स्वास्थ्यवर्धक ड्राई फ्रूट के रूप में मांग में रहती है।
सीआईटीएच प्रोलीफिक अखरोट की खेती शुरू करने के लिए ICAR-CITH या प्रमाणित नर्सरी से पौधे लें। शुरुआत में छोटे स्तर पर खेती करें और परिणाम देखकर बढ़ाएँ। मिट्टी की जाँच करवाएँ और जैव उर्वरक का उपयोग करें। ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग जैसी तकनीकों को अपनाएँ। किसानों के अनुभव बताते हैं कि सही देखभाल से यह किस्म 5-7 साल में पूरी तरह उत्पादन शुरू करती है। बाज़ार में इसकी गिरी की मांग को देखते हुए, यह किसानों के लिए सुनहरा अवसर है।
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