गांठ गोभी की खेती ठंडी मौसम में देगी बंपर पैदावार, सिर्फ 50 दिन में 80,000 रुपये तक कमाई

Updated: 23 Nov 2025, 05:57 PM

उत्तर भारत के किसान भाइयों के लिए नवंबर का अंतिम सप्ताह और दिसंबर का पहला पखवाड़ा गांठ गोभी की देर वाली बुवाई का सबसे उत्तम समय है। मौसम विभाग ने 23 नवंबर 2025 को जारी अपने पूर्वानुमान में बताया है कि दिसंबर के पहले हफ्ते से रात का तापमान 10-12 डिग्री और दिन का तापमान 20-22 डिग्री के आसपास रहेगा। यही तापमान गांठ गोभी की गांठें बनाने के लिए सबसे आदर्श माना जाता है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के वैज्ञानिकों की नवीनतम सलाह भी यही है कि अभी बुवाई की जाए तो जनवरी के अंत और फरवरी में जब बाजार में गांठ गोभी की सबसे ज्यादा कमी रहती है, उस समय सबसे ऊंचे दाम मिलेंगे। एक एकड़ में 20-25 टन तक पैदावार लेकर 1.5 से 2 लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई संभव है।

गांठ गोभी क्यों है इस समय सबसे ज्यादा मुनाफे वाली फसल

वर्तमान में दिल्ली, लुधियाना, अमृतसर, जयपुर और पटना की मंडियों में अच्छी क्वालिटी की गांठ गोभी 30 से 45 रुपये किलो तक बिक रही है। सर्दी में लोग इसे सलाद, सब्जी, पराठा और अचार में भरपूर इस्तेमाल करते हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने से इसकी मांग हर साल बढ़ रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि अभी बुवाई करने पर फसल ठीक उसी समय तैयार होगी जब बाजार में दूसरी सब्जियों की आवक कम होती है और दाम अपने चरम पर होते हैं।

जलवायु और बुवाई का समय

गांठ गोभी की खेती ठंडी और नम जलवायु में सबसे सफल रहती है। गांठ बनने के समय तापमान 15-20 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, तभी इसकी गांठे ठोस और आकर्षक बनती हैं। अधिक तापमान पर गांठें ढीली और खराब हो जाती हैं। इस फसल की बुवाई अलग-अलग मौसम के हिसाब से की जाती है। जल्दी किस्में मई-जून में नर्सरी में लगाई जाती हैं और अगस्त-सितंबर में रोपाई की जाती है। मुख्य किस्मों की बुवाई अगस्त से अक्टूबर तक होती है, जबकि देर की किस्मों की नर्सरी सितंबर-अक्टूबर में तैयार की जाती है।

मिट्टी की तैयारी

गांठ गोभी को बलुई दोमट या साधारण दोमट मिट्टी सबसे अच्छी लगती है। खेत की तीन बार गहरी जुताई करें। आखिरी जुताई से पहले 10 टन प्रति एकड़ अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट जरूर मिलाएं। अगर खाद कम है तो कम से कम 8 टन भी चलेगा, लेकिन जितनी ज्यादा जैविक खाद डालेंगे, गांठें उतनी ही साफ और चमकदार बनेंगी। जल निकास का विशेष ध्यान रखें। गांठ गोभी को पानी रुकना बिल्कुल पसंद नहीं है, जरा सा पानी रुका और जड़ें सड़ने का खतरा शुरू हो जाता है। मिट्टी का पीएच 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए। अगर मिट्टी ज्यादा अम्लीय है तो 200-300 किलो प्रति एकड़ चूना मिलाएं।

अभी लगाने के लिए सबसे अच्छी उन्नत किस्में

  • पूसा कार्तिक संकर (हाइब्रिड) – गांठें बिल्कुल गोली जैसी, सफेद और भारी
  • स्नोबॉल-16 – देर वाली, ठंड में भी अच्छी गांठ बनाती है
  • पंत शुभ्रा – गांठें सख्त और चमकदार
  • गोल्डन एकड़ – बाजार में सबसे ज्यादा पसंद की जाती है
  • हाइब्रिड व्हाइट क्वीन – पैदावार सबसे ज्यादा, 25 टन तक संभव

ये सभी किस्में कृषि विश्वविद्यालयों और ICAR द्वारा प्रमाणित हैं। बीज हमेशा विश्वसनीय दुकान या सरकारी केंद्र से ही लें।

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नर्सरी, रोपाई और पौधों की दूरी

अभी भी नर्सरी तैयार की जा सकती है। एक एकड़ के लिए 400-500 ग्राम बीज पर्याप्त है। नर्सरी में बीज को 1 सेमी गहराई पर बोएं और ऊपर से हल्की मिट्टी या गोबर की खाद की पतली परत चढ़ाएं। नर्सरी को आधी छाया में रखें ताकि तेज धूप से पौधे न झुलसें। 4 से 5 सप्ताह में जब पौधों में 4-5 सच्ची पत्तियाँ आ जाएँ, तब मुख्य खेत में रोपाई करें। रोपाई 45×60 सेमी या 60×60 सेमी की दूरी पर करें। जितनी ज्यादा दूरी रखेंगे, गांठें उतनी ही बड़ी और भारी बनेंगी।

खाद और उर्वरक प्रबंधन

फसल को अच्छी पैदावार देने के लिए खाद और उर्वरक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गोबर की खाद के साथ नत्रजन, फॉस्फोरस और पोटाश की उचित मात्रा खेत में डालनी चाहिए। नत्रजन की आधी मात्रा रोपाई के समय और बाकी दो बार टॉप ड्रेसिंग में दी जाती है। इसके अलावा बोरॉन और मोलिब्डेनम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व गांठ की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं।

सिंचाई

गांठ गोभी को नियमित नमी की जरूरत होती है। हर सात से दस दिन पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए। खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे पौधे सड़ने लगते हैं। ड्रिप इरिगेशन प्रणाली अपनाने से पानी और खाद दोनों की बचत होती है और पैदावार भी बढ़ती है।

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खरपतवार नियंत्रण और रोग नियंत्रण

इस फसल में खरपतवार समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समय-समय पर निराई-गुड़ाई करनी जरूरी है। किसान चाहें तो जरूरत पड़ने पर अनुशंसित खरपतवारनाशी का भी प्रयोग कर सकते हैं।

गांठ गोभी पर एफिड, डायमंडबैक मॉथ और पत्ताखोर कीट अक्सर हमला करते हैं। इसके अलावा ब्लैक रॉट, क्लब रूट और लीफ ब्लाइट जैसी बीमारियाँ भी नुकसान पहुँचाती हैं। इनसे बचाव के लिए जैविक तरीके जैसे नीम तेल का छिड़काव और Bt स्प्रे कारगर हैं। आवश्यकता पड़ने पर वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार दवाइयों का उपयोग करना चाहिए। फसल चक्र अपनाने और गोभी परिवार की फसलें लगातार न बोने से भी रोग का दबाव कम होता है।

कब करें कटाई

फसल की कटाई तब करनी चाहिए जब गांठें ठोस और सफेद हों। अगर इन्हें देर तक खेत में छोड़ दिया जाए तो गांठें ढीली और खराब हो जाती हैं। मैदानों में इसकी औसत पैदावार 15 से 20 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलती है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादन 20 से 30 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुँच जाता है।

गांठ गोभी की खेती किसानों के लिए ठंडी मौसम में एक भरोसेमंद विकल्प है। सही समय पर बुवाई, संतुलित खाद, नियमित सिंचाई और रोग नियंत्रण अपनाने से किसान भाई अच्छी पैदावार ले सकते हैं। अगर किसान ऑफ-सीजन में इसका उत्पादन करें तो उन्हें बाजार में ऊँचे दाम मिलते हैं और मुनाफा भी दोगुना हो सकता है।

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  • Shashikant

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