सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए नई उम्मीद जगी है। अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान ICRISAT ने ICAR और राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (RARI) के साथ मिलकर दुनिया का पहला तीन-तरफा बाजरा हाइब्रिड RHB 273 विकसित किया है। यह हाइब्रिड 4 जनवरी 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जारी 184 उन्नत फसल वैरायटी में शामिल है। यह सूखा, उच्च तापमान और कम पानी वाली स्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करता है, जिससे खाद्यान्न और पशु चारे की सुरक्षा मजबूत होगी।
तीन-तरफा हाइब्रिड क्या है और क्यों है खास
पारंपरिक बाजरा हाइब्रिड दो पैरेंट लाइनों से बनते हैं, लेकिन RHB 273 तीन पैरेंट लाइनों से तैयार किया गया है। इससे उच्च पैदावार, सूखा सहनशीलता और बेहतर चारा गुणवत्ता को एक साथ जोड़ा जा सका है। यह दुनिया में बाजरा का पहला ऐसा हाइब्रिड है। ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि बाजरा सूखा प्रभावित एशिया और अफ्रीका के क्षेत्रों में जीवनरेखा है। यह उच्च तापमान और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देता है। ICRISAT-ICAR की साझेदारी से कई ‘दुनिया का पहला’ और ‘भारत का पहला’ बाजरा वैरायटी विकसित हुई हैं, और RHB 273 इस क्रम में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सूखा क्षेत्रों में फायदे और पैदावार
यह हाइब्रिड A1 सूखा जोन (वार्षिक वर्षा 400 मिमी से कम) के लिए उपयुक्त है, जैसे राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के इलाके। 2022-2024 के तीन साल के फील्ड ट्रायल में 30 स्थानों पर औसत अनाज पैदावार 2230 किलो प्रति हेक्टेयर रही, जो स्थानीय वैरायटी से 13-27% और लोकप्रिय HHB 67 Improved से 28% ज्यादा है। सूखा, गर्मी और रोग जैसे डाउनी मिल्ड्यू, ब्लास्ट और स्मट से सहनशीलता अच्छी है। अनाज के साथ चारा भी उच्च गुणवत्ता का मिलता है, जिससे पशुपालन करने वाले किसानों को अतिरिक्त लाभ होगा। ICAR-IIMR की निदेशक डॉ. तारा सत्यवती ने बताया कि A1 बेल्ट में इस हाइब्रिड को अपनाने से उत्तर-पश्चिम भारत में बाजरा उत्पादन मजबूत होगा और खाद्यान्न, पोषण तथा चारा सुरक्षा में योगदान देगा।
किसानों के लिए सलाह
यह हाइब्रिड अब A1 सूखा जोन में खेती के लिए अधिसूचित है। राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के कम वर्षा वाले क्षेत्रों के किसान इसे अपनाकर लाभ उठा सकते हैं। ICRISAT के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस.के. गुप्ता के अनुसार तीन-तरफा हाइब्रिड जैविक और अजैविक तनावों से बेहतर अनुकूलन देते हैं। 2019 से चले प्रयासों का नतीजा अब सामने है। किसान स्थानीय कृषि केंद्र या बीज वितरकों से संपर्क करके बीज प्राप्त करें। कम पानी और कम इनपुट में उच्च पैदावार से आय बढ़ेगी।
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