मध्य प्रदेश के किसान भाई पहले ही बेमौसम बारिश से परेशान हैं, ऊपर से बिजली कंपनी का नया आदेश आ गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने साफ कह दिया कि कृषि फीडरों पर 10 घंटे से ज्यादा बिजली दी तो संबंधित अधिकारियों की सैलरी कट जाएगी। यह फरमान रबी बुवाई के बीच आया है, जब सिंचाई के लिए बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत है। किसानों में हड़कंप मच गया है, तो विपक्ष ने सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगा दिया।
कंपनी ने 3 नवंबर को परिपत्र जारी किया, जिसमें राज्य सरकार के निर्देशों का हवाला देकर कहा गया कि कृषि फीडरों पर आपूर्ति सख्ती से 10 घंटे तक ही सीमित रखें। अगर कहीं तकनीकी खराबी, मौसम की मार या लोड बढ़ने से ज्यादा बिजली चली गई, तब भी इसे उल्लंघन माना जाएगा। मीटर रीडिंग के आधार पर सिर्फ 15 मिनट की छूट है, उसके बाद कार्रवाई। यह पुराने आदेश (2020) का अपडेटेड वर्जन है, जो अब और सख्त हो गया।
अधिकारियों पर सख्ती का पैमाना
आदेश में साफ लिखा है कि अगर किसी फीडर पर एक दिन भी 10 घंटे से ज्यादा बिजली पहुंची, तो ऑपरेटर की एक दिन की सैलरी कटेगी। अगर दो दिन लगातार ऐसा हुआ, तो जूनियर इंजीनियर का वेतन प्रभावित होगा। पांच दिन तक चला तो डिप्टी जीएम, और सात दिन तक तो जीएम स्तर तक के अफसरों की सैलरी पर चाकू चलेगा। मॉनिटरिंग जीएम स्तर पर होगी, और हर महीने रिपोर्ट हेडक्वार्टर भेजनी पड़ेगी। कंपनी का कहना है कि इससे बिजली की बर्बादी रुकेगी और संसाधनों का सही इस्तेमाल होगा।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। बरसात ने खेतों को गीला कर दिया है, पंप चलाने की जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में 10 घंटे की सीमा से किसान परेशान हैं। एक किसान ने बताया कि रात को बिजली कट जाती है, दिन में भी लोड शेडिंग हो रही है। अब यह डर कि कहीं अफसर ज्यादा बिजली देकर अपनी सैलरी न गंवा दें।
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किसानों में बढ़ रही बेचैनी
यह आदेश भोपाल, ग्वालियर, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, रायसेन, हरदा, विदिशा, अशोकनगर, गुना, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी और दतिया जैसे जिलों में लागू होगा। इन इलाकों में खरीफ की फसलें अभी कटाई के चरण में हैं, और रबी की बुवाई शुरू हो चुकी है। एक तरफ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 3 नवंबर को ही ‘समाधान योजना’ लॉन्च की, जिसमें बकाया बिलों पर सरचार्ज माफ करने का वादा किया। लेकिन अगले ही दिन यह फरमान आ गया, जिससे किसानों को लगा कि सरकार का दोहरा चेहरा है।
कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। पार्टी का कहना है कि बीजेपी सरकार खुद को किसान हितैषी बताती है, लेकिन बिजली जैसी बुनियादी सुविधा पर पाबंदी लगा रही है। विपक्षी नेता बोले कि सरप्लस बिजली का दावा करने वाली सरकार किसानों को रात में बिजली देने से काहिल क्यों हो रही है। किसान संगठनों ने भी विरोध जताया और कहा कि यह आदेश खेती को ठप कर देगा।
सरकार का क्या कहना है
बिजली कंपनी के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने सफाई दी कि यह आदेश ऊर्जा संरक्षण के लिए है। राज्य में बिजली की मांग बढ़ रही है, और कृषि फीडरों पर लोड ज्यादा होने से ग्रिड पर दबाव पड़ता है। लेकिन किसान भाईयों का दर्द समझा जाए तो यह साफ है कि मौसम की मार में सिंचाई बिना रुके चलनी चाहिए। सरकार को चाहिए कि जल्द ही इस पर पुनर्विचार करे, वरना रबी की बुवाई प्रभावित हो जाएगी। किसान भाई धैर्य रखें, लेकिन अपनी आवाज बुलंद करें। नजदीकी बिजली ऑफिस में शिकायत करें या विधायक से बात करें।
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