मध्य प्रदेश सरकार ने आदिवासी और वन पट्टाधारक किसानों को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 16 जिलों में सब्जी खेती पर 90% तक भारी सब्सिडी देने का फैसला किया है। यह पहल वन भूमि पर निर्भर किसानों की आय बढ़ाने और जीवन स्तर सुधारने का लक्ष्य रखती है। इसके साथ ही, सभी किसानों के लिए शून्य ब्याज पर फसल ऋण योजना को 2025-26 के लिए बढ़ा दिया गया है। इससे छोटे किसानों को खेती में निवेश आसान होगा। आइए जानते हैं कि योजना के तहत कौन लाभ लेगा, कैसे आवेदन करें, और क्या फायदे होंगे।
वन क्षेत्रों में सब्जी खेती को बढ़ावा, आय दोगुनी
मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में वन पट्टा धारकों को पारंपरिक खेती से बाहर निकालने के लिए यह सब्सिडी शुरू की गई है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार, योजना से टमाटर, लौकी, करेला, फूलगोभी, ब्रोकली, शिमला मिर्च और सहजन जैसी उच्च मूल्य वाली सब्जियों की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। एक हेक्टेयर में 90% सब्सिडी (कुल लागत 1-2 लाख से अधिक) मिलेगी, जो बीज, खाद, सिंचाई उपकरण और ग्रीनहाउस कवर पर लागू होगी। इससे किसान कम लागत में शुरू कर सकेंगे और बाजार में अच्छे दाम पा सकेंगे। पशुपालन और कृषि विभाग का कहना है कि यह योजना वन क्षेत्रों की बंजर भूमि को उत्पादक बनाएगी।
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16 जिलों में 90% सब्सिडी, ट्रेनिंग भी मुफ्त
यह योजना चार संभागों – नर्मदापुरम, बैतूल, जबलपुर, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, भोपाल और सीहोर – के 16 जिलों में लागू होगी। इन जिलों के आदिवासी और वन पट्टाधारक किसान परिवार मुख्य लाभार्थी हैं। सब्सिडी के साथ आधुनिक खेती, फसल प्रबंधन और मार्केटिंग पर ट्रेनिंग भी दी जाएगी। उदाहरण के लिए, छिंदवाड़ा के आदिवासी किसान शिमला मिर्च की खेती से प्रति एकड़ 50,000-70,000 रुपये की अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे। योजना का बजट 500 करोड़ रुपये से अधिक है, जो 2025-26 में खर्च होगा। छोटे किसानों (2-5 एकड़) को प्राथमिकता मिलेगी।
फसल ऋण पर शून्य ब्याज
सब्सिडी के साथ सरकार ने सभी किसानों के लिए सहकारी बैंकों से शून्य ब्याज पर अल्पकालिक फसल ऋण को 2025-26 के लिए जारी रखा है। खरीफ 2025 के ऋण की चुकौती अंतिम तिथि 28 मार्च 2026 और रबी 2025-26 के लिए 15 जून 2026 तय की गई है। समय पर चुकाने पर 4% अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी मिलेगी। इससे किसान बिना ब्याज के बीज-खाद खरीद सकेंगे। मध्य प्रदेश में 50 लाख से अधिक किसान इस योजना से जुड़े हैं, और यह सब्जी खेती के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी।
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MPFSTS पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
योजना का लाभ लेने के लिए आदिवासी या वन पट्टाधारक होना जरूरी है, और भूमि वन विभाग से प्रमाणित हो। छोटे-मझोले किसान (5 हेक्टेयर तक) प्राथमिकता में। आवेदन MPFSTS पोर्टल (mpfsts.mp.gov.in) पर ऑनलाइन करें। स्टेप्स: रजिस्ट्रेशन → फॉर्म भरें → दस्तावेज अपलोड (आधार, बैंक पासबुक, वन पट्टा, मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट) → सबमिट। चयन लॉटरी या मेरिट से होगा। ऑफलाइन नजदीकी उद्यानिकी केंद्र पर भी आवेदन। प्रक्रिया 15-30 दिनों में पूरी होती है, और सब्सिडी DBT से खाते में आती है। अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तक। हेल्पलाइन 0755-2551400 पर कॉल करें।
सब्जी खेती से मुनाफा कैसे बढ़ाएँ
इस योजना का पूरा फायदा उठाने के लिए पहले मिट्टी परीक्षण करवाएँ और उच्च मूल्य वाली सब्जियाँ चुनें। ट्रेनिंग में ड्रिप इरिगेशन और जैविक खाद सीखें। बाजार लिंकेज के लिए स्थानीय मंडी या FPO से जुड़ें। शून्य ब्याज ऋण से बीज-उपकरण खरीदें। योजना से प्रति एकड़ 30,000-50,000 रुपये की बचत संभव है। आदिवासी किसान भाई, जल्द आवेदन करें यह आपकी आय का नया स्रोत बनेगी।
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