मध्य प्रदेश के रीवा जिले के किसान भाई अब नेपियर घास की खेती से घर भर रहे हैं। इसे हाथी घास भी कहते हैं, और यह पशुओं के लिए किसी अमृत से कम नहीं। एक बार लगाने पर यह पांच साल तक उगती रहती है, हर दो-तीन महीने में कटाई हो जाती है। रीवा के कुछ किसानों ने पुणे की एक रिसर्च फर्म से 250 ग्राम वाजरा-नेपियर घास के बीज मंगवाए, और अब वे महीने के 15-20 हजार रुपये कमा रहे हैं। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अतेंद्र गौतम बताते हैं कि यह घास दूध उत्पादन बढ़ाती है, लागत घटाती है, और सूखे-बंजर खेतों में भी फल-फूल देती है।
नेपियर घास की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है क्योंकि यह पौष्टिक और उत्पादक है। पशु इसे खाने से स्वस्थ रहते हैं, दूध ज्यादा निकलता है। डॉ. गौतम ने बताया कि रीवा के किसानों ने इसे अपने खेत में लगाया और पशुओं को चारा दिया। नतीजा यह हुआ कि दूध की मात्रा बढ़ गई, और खर्च भी कम हो गया। इस वैरायटी की पत्तियों में धार और ऑक्सीलेट्स कम हैं, जबकि विटामिन और TDN वैल्यू ज्यादा। यानी पचने वाले पोषक तत्व भरपूर, जो पशु के स्वास्थ्य को मजबूत बनाते हैं।
दूध उत्पादन में इजाफा, जेब में भी फायदा
किसानों का अनुभव बताता है कि नेपियर घास ने उनकी जिंदगी बदल दी। पहले महंगे चारे पर निर्भरता थी, अब खुद की घास से पशु मस्त हैं। एक किसान ने साझा किया कि महीने में 15-20 हजार का फायदा हो रहा है, बिना ज्यादा मेहनत के। यह घास 55-60% ऊर्जा तत्व और 8-10% प्रोटीन से भरपूर है। पशुपालक भाई कहते हैं कि इससे दूध की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। रीवा जैसे इलाकों में जहां बारिश अनियमित है, यह घास वरदान साबित हो रही है।
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आसान खेती, कोई झंझट नहीं
नेपियर घास की खेती रबी कटाई के बाद खरीफ में या फरवरी-मार्च में शुरू करें। ज्यादा बारिश वाले इलाकों से लेकर सूखाग्रस्त बंजर जमीन तक कहीं भी उग सकती है। किसान खेत की मेड़ों पर भी इसे लगा सकते हैं। एक बार बुवाई करने पर यह खुद-ब-खुद फैल जाती है, पांच साल तक चलती है। हर दो-तीन महीने में ऊंचाई 15 फुट पहुंच जाती है, फिर कटाई कर लें। निराई-गुड़ाई, रासायनिक खाद या कीटनाशक की जरूरत न के बराबर। बस शुरुआत में अच्छी सिंचाई दें।
रीवा के किसानों ने देखा कि एक बीघा में हर तीन महीने कटाई से 20 टन से ज्यादा घास मिल जाती है। साल भर में इससे एक लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है। डॉ. गौतम सलाह देते हैं कि वाजरा-नेपियर जैसी हाइब्रिड वैरायटी चुनें, जो ज्यादा पैदावार देती है।
बोनस कमाई का मौका
नेपियर घास सिर्फ चारे तक सीमित नहीं। रिसर्च चल रही है कि इससे सीएनजी और कोयला बनाने की तकनीक विकसित हो। अगर यह सफल हुई तो किसानों को चारा बेचने के अलावा ऊर्जा उत्पादन से भी आय होगी। कम खर्च में शानदार कमाई, यही इस घास की ताकत है। पशुपालन करने वाले भाई इसे अपनाएं, तो दूध बिक्री के साथ-साथ घास बेचकर भी फायदा।
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