मछुआरों को मिलेगा सीधा लाभ, लीन पीरियड (जून–अगस्त) में ₹5,000 मासिक सहायता और मत्स्य बीमा योजना का वादा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बेगूसराय जिले के एक तालाब में नाव पर चढ़कर मछली पकड़ी। साधारण कुर्ता-पायजामा पहने राहुल गांधी ने हाथों से जाल फेंका और मछुआरा समुदाय के लोगों के साथ पानी में खड़े होकर उनकी समस्याओं को करीब से समझा। इस मौके पर विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और पूर्व मंत्री मुकेश साहनी भी उनके साथ थे। आइये जानते हैं उन्होंने मछुआरों के लिए किस योजना का वादा किया।

लीन पीरियड में हर परिवार को 5,000 रुपये मासिक सहायता

महागठबंधन ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में मछुआरा समुदाय के लिए कई ठोस वादे किए हैं। सबसे बड़ा वादा लीन पीरियड (प्रजनन अवधि) के दौरान हर परिवार को 5,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता का है। जून, जुलाई और अगस्त – इन तीन महीनों में मछली पकड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। इस दौरान कुल 15,000 रुपये सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा होंगे। बिहार में यह पहला मौका होगा जब लीन पीरियड को आर्थिक सहायता से जोड़ा गया है।

ये भी पढ़ें – आर्या परियोजना के तहत किसानों और युवाओं को मिला बकरी पालन का प्रशिक्षण, बढ़ेगा रोजगार का मौका

मत्स्य पालन बीमा योजना को मिलेगा नया जीवन

वर्तमान में मत्स्य पालन बीमा योजना कागजों तक सीमित है। महागठबंधन ने वादा किया है कि सत्ता में आने पर इस योजना को पूरी तरह लागू किया जाएगा। नाव डूबने, जाल फटने, मछली बीमारी से मरने या प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर तुरंत मुआवजा दिया जाएगा। बीमा प्रीमियम का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी, ताकि मछुआरों पर बोझ न पड़े।

हर प्रखंड में मछली बाजार और ट्रेनिंग सेंटर

मछुआरों की सबसे बड़ी शिकायत बाजार तक पहुंच की है। महागठबंधन ने हर प्रखंड में मछली बाजार खोलने का वादा किया है। इन बाजारों में कोल्ड स्टोरेज, वजन मशीन और सीधे खरीदारों की सुविधा होगी। बिचौलियों का खेल खत्म होगा। साथ ही प्रत्येक प्रखंड में मत्स्य पालन ट्रेनिंग सेंटर शुरू किए जाएंगे। यहां आधुनिक जाल, मछली बीज, फीड और खेत-तालाब एकीकृत पालन की ट्रेनिंग दी जाएगी। अनुदान पर जाल, नाव और ऑक्सीजन पंप भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

तालाब-नदी पुनर्जीवन, परंपरागत मछुआरों को प्राथमिकता

बिहार की नदियां और तालाब लगातार सूखते और गंदे होते जा रहे हैं। महागठबंधन की सुसंगत जलाशय नीति के तहत गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक सहित सभी प्रमुख नदियों की सफाई और तालाबों की गहराई बढ़ाने का काम होगा। तालाबों के आवंटन में परंपरागत मछुआरों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। बाहर के ठेकेदारों का दखल पूरी तरह रोका जाएगा।

ये भी पढ़ें – मछली-झींगा पालन हुआ सस्ता, बढ़ जाएगा घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट, पढ़ें डिटेल

बिहार में मछुआरा समुदाय की स्थिति

बिहार में मछली पकड़ने और पालन से जुड़े परिवारों की संख्या 15 लाख से अधिक है। लीन पीरियड में कमाई पूरी तरह बंद हो जाती है। अधिकांश परिवार कर्ज लेते हैं, जिसका सूद चुकाने में साल भर लग जाता है। मछली बाजार दूर होने से 40-50 फीसदी मुनाफा रास्ते में खर्च हो जाता है। तालाबों का आवंटन ठेकेदारों के हाथ में होने से स्थानीय मछुआरे बेरोजगार हो रहे हैं।

चुनावी माहौल में मछुआरा वोट अहम

बिहार विधानसभा चुनाव का पहला चरण 6 नवंबर से शुरू हो रहा है। मल्लाह, निषाद, सहनी समुदाय के वोट कई सीटों पर निर्णायक हैं। महागठबंधन ने इन वादों से इस वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। राहुल गांधी का तालाब में उतरना और मुकेश साहनी का साथ इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

पिछले कई चुनावों में मछुआरों से बड़े-बड़े वादे हुए, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदली। इस बार महागठबंधन का दावा है कि ये वादे घोषणा पत्र के नहीं, बल्कि कार्ययोजना के हैं। अब नतीजे 10 नवंबर को आएंगे, तब पता चलेगा कि तालाब का जाल वोट तक पहुंचा या नहीं।

ये भी पढ़ें – सरकार ने शुरू की ‘भ्रमण दर्शन कार्यक्रम योजना’ बिहार में मछली पालक सीखेंगे आधुनिक तकनीक!

Author

  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

    View all posts

Leave a Comment