इस सीजन करें पीली शिमला मिर्च की खेती, मार्केट में बंपर डिमांड, घर बैठे सस्ते में मंगवाएं बीज

Yellow Capsicum farming: बाजार में पीली शिमला मिर्च की मांग दिन-ब-दिन बढ़ रही है, और किसान भाई इसे घर के बगीचे या छोटे खेत में उगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) ने पीली कैप्सिकम के बीज को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया है सिर्फ 70 रुपये में 1 ग्राम का पैकेट, जो घर बैठे डिलीवर हो जाएगा। यह बीज गुणवत्ता वाले हैं और कम मेहनत में अच्छी पैदावार देते हैं।

अगर आप सर्दियों में कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो यह वैरायटी आपके लिए सही है। एनएससी की इस पहल से छोटे किसान और घरेलू बागवानी करने वाले आसानी से ताजी और स्वस्थ सब्जी उगा सकेंगे। आइए, जानते हैं कैसे शुरू करें खेती और क्या हैं इसके फायदे।

पीली शिमला मिर्च की वैरायटी

राष्ट्रीय बीज निगम की पीली कैप्सिकम वैरायटी कम खर्च में ज्यादा उत्पादन देने वाली है। यह हाइब्रिड बीज हैं, जो गमलों, ग्रो बैग्स या खेतों में आसानी से उगाए जा सकते हैं। फल चमकदार पीले रंग के होते हैं, मोटे और मीठे स्वाद वाले, जिनका वजन 150-200 ग्राम तक पहुंचता है। एनएससी के बीज रोग प्रतिरोधी हैं, जो कीटों और फफूंद से कम प्रभावित होते हैं।

1 ग्राम के पैकेट में करीब 200-250 बीज होते हैं, जो 50-100 पौधों के लिए पर्याप्त हैं। बाजार में इसकी कीमत 100-150 रुपये प्रति किलो तक मिलती है, जिससे घरेलू स्तर पर भी अच्छा मुनाफा हो सकता है। एनएससी के अनुसार, यह वैरायटी गर्मियों में अच्छी तरह पनपती है और 2 महीने में फल देने लगती है। बिहार जैसे राज्यों में जहां सब्जी की मांग ज्यादा है, वहां यह किसानों के लिए नया विकल्प बन रही है।

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बीज कहां से मंगवाएं

किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एनएससी ने पीली कैप्सिकम के बीज को ऑनलाइन उपलब्ध कराया है। mystore.in पर जाकर एनएससी येलो कैप्सिकम सीड सर्च करें, और 70 रुपये में 1 ग्राम का पैकेट ऑर्डर करें। यह पैकेट घर पर डिलीवर हो जाएगा, बिना किसी अतिरिक्त शिपिंग चार्ज के। वेबसाइट पर क्यूआर कोड स्कैन करके भी खरीद सकते हैं।

एनएससी के बीज प्रमाणित हैं, जो 85-90% अंकुरण दर देते हैं। बिहार के छोटे किसान जैसे पटना के रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि ऐसे सस्ते बीज से उनकी लागत आधी हो गई, और अब वे बाजार में बेचकर 20-25 हजार रुपये प्रति सीजन कमा रहे हैं। यह योजना छोटे पैमाने पर खेती करने वालों के लिए खास है, जहां बड़े निवेश की जरूरत नहीं पड़ती।

खेती का आसान तरीका, गमलों में भी उगाएं

पीली शिमला मिर्च की खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले बीजों को गर्म पानी में 30 मिनट भिगोएं, फिर नर्सरी में बो दें। 16-34 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए आदर्श है, इसलिए मध्य जुलाई से जनवरी तक बुवाई करें। गमलों या ग्रो बैग्स में उगाने के लिए 12-15 इंच गहरा कंटेनर लें, जिसमें मिट्टी, रेत, वर्मी कंपोस्ट और कोकोपीट का मिश्रण भरें। पौधों के बीच 30-45 सेंटीमीटर की दूरी रखें, ताकि जड़ें फैल सकें। पूर्ण सूर्य की रोशनी वाली जगह चुनें, और हल्की सिंचाई करें – मिट्टी नम रहे लेकिन ज्यादा गीली न हो।

बुवाई के 7-10 दिन बाद अंकुरण शुरू हो जाएगा, और 25-30 दिन बाद रोपाई करें। कीटों से बचाव के लिए नीम का घोल छिड़कें। कुल मिलाकर, 2 महीने में फल तैयार हो जाते हैं, और प्रति पौधा 1-2 किलो तक उपज मिलती है। बिहार के गंगा मैदानी इलाकों में यह वैरायटी अच्छी तरह जमती है, जहां मिट्टी उपजाऊ होती है।

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पीली शिमला मिर्च के फायदे

यह सब्जी न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर से भरपूर है, जो इम्यूनिटी बढ़ाती है और पाचन सुधारती है। बाजार में इसकी मांग सलाद, सब्जी और प्रोसेस्ड फूड में ज्यादा है, इसलिए किसान अच्छा दाम कमा सकते हैं। घरेलू बागवानी में उगाकर परिवार को ताजी सब्जी मिलती है, और अतिरिक्त बेचकर कमाई भी हो जाती है। एनएससी के बीज से उपज ज्यादा होती है, जो 20-30 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है। बिहार के किसानों के लिए यह इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि यहां सब्जी बाजार बड़ा है और परिवहन आसान। कुल मिलाकर, यह वैरायटी कम पानी और मेहनत में ज्यादा फायदा देती है, जो छोटे किसानों के लिए आदर्श है।

क्यों अपनाएं यह वैरायटी

पीली शिमला मिर्च की खेती से किसान पारंपरिक फसलों से हटकर नया प्रयोग कर सकते हैं। एनएससी की इस सस्ती पेशकश से छोटे स्तर पर शुरू करना आसान हो गया है। बिहार और उत्तर भारत के इलाकों में जहां गर्मी और ठंड दोनों मौसम हैं, वहां यह वैरायटी साल भर फल दे सकती है। बाजार में इसकी कीमत बढ़ रही है, क्योंकि स्वास्थ्य जागरूक लोग इसे पसंद कर रहे हैं। अगर आप बगीचे में जगह तलाश रहे हैं, तो आज ही बीज ऑर्डर करें। यह न केवल आपके खेत को रंगीन बनाएगी, बल्कि जेब को भी हरा-भरा रखेगी।

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