मौसम तेजी से बदल रहा है। सर्दियों का असर अब कम होने लगा है और गर्मी की हल्की दस्तक भी महसूस होने लगी है। ऐसे समय में किसान भाई जायद की फसल की तैयारी शुरू कर देते हैं, खासकर कद्दू कुल वाली सब्जियों की। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। मऊ जिले में उद्यान विभाग ने जायद सीजन की सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सहयोग राशि यानी अनुदान की व्यवस्था शुरू की है। इसका फायदा उन किसानों को मिलेगा जो नेनुआ, लौकी, खीरा, तोरई और करेला जैसी सब्जियों की खेती करना चाहते हैं।
मऊ के जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि अभी तक एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना में जनपद के लिए साग-भाजी का लक्ष्य तय था, जो जायद के मौसम में कद्दू कुल की सब्जियों के लिए रखा गया है। अब इसी के साथ सरकार ने मुख्यमंत्री राज्य उद्यानिकी विकास मिशन योजना भी शुरू कर दी है, जिसे 13 जनवरी को लागू किया गया है। इस योजना में मऊ जिले को भी शामिल किया गया है और किसानों को हाइब्रिड सब्जियों की खेती के लिए मदद दी जाएगी।
50 हेक्टेयर लक्ष्य
उद्यान विभाग के अनुसार मऊ जिले के लिए कुल 50 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें सामान्य श्रेणी के लिए 40 हेक्टेयर और अनुसूचित जाति के किसानों के लिए 10 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका मतलब है कि सीमित संख्या में ही किसानों को लाभ मिलेगा, इसलिए समय पर आवेदन करना जरूरी है। इस योजना का उद्देश्य जायद सीजन में सब्जियों का उत्पादन बढ़ाना और किसानों को बाजार के हिसाब से उच्च गुणवत्ता वाली हाइब्रिड सब्जियों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।
सब्जी की खेती पर ₹24000/हेक्टेयर सहायता
सब्जी की खेती करने वाले किसानों को ₹24000 प्रति हेक्टेयर तक की सहायता दी जाएगी। खास बात यह है कि यह पैसा सिर्फ नकद नहीं होगा, बल्कि इसके तहत खेती के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। उद्यान विभाग शंकर साग-भाजी के बीज, प्लास्टिक के क्रेट्स, जैविक खाद और दवा किसानों को उपलब्ध कराएगा। इसका फायदा यह होगा कि किसान को शुरुआती खर्चा कम करना पड़ेगा और खेती सही तरीके से शुरू हो सकेगी। जायद सब्जियों की खेती में यही शुरुआत सबसे अहम होती है, क्योंकि गर्मी बढ़ते ही पानी और पोषण का प्रबंधन चुनौती बन जाता है।
मशरूम उत्पादन पर ₹100000 की सहायता
इस योजना में सिर्फ सब्जियों की खेती ही नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कुछ अतिरिक्त कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। जो किसान छप्पर विधि से मशरूम उत्पादन करना चाहते हैं, उन्हें 1 छप्पर यूनिट बनाने के लिए ₹100000 की सहायता दी जा रही है। ग्रामीण इलाकों में मशरूम उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि इसमें कम जगह में अच्छा मुनाफा मिलता है। छप्पर यूनिट बनने के बाद किसान साल भर उत्पादन कर सकते हैं, जिससे नियमित आय की संभावना बढ़ती है।
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वर्मी बेड और केंचुआ खाद पर भी अनुदान
किसानों के लिए वर्मी कम्पोस्ट और केंचुआ खाद की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए योजना में वर्मी बेड और पाली बैग में केंचुआ खाद तैयार करने का लक्ष्य भी दिया गया है। किसान भाई उद्यान विभाग से इस काम के लिए भी अनुदान ले सकते हैं। वर्मी कम्पोस्ट का फायदा यह होता है कि खेत की मिट्टी की सेहत सुधरती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है। साथ ही किसान इसे बाजार में बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं।
कौन ले सकता है योजना का लाभ
उद्यान विभाग ब्लॉक स्तर पर किसानों का चयन कर रहा है। ऐसे किसान जिनके पास 8 बिस्वा से 16 बिस्वा तक खेती की जमीन है, वे इस योजना के लिए पात्र माने गए हैं। यानी यह योजना खासतौर पर छोटे और मध्यम किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, ताकि वे भी हाइब्रिड सब्जियों की खेती अपनाकर बेहतर कमाई कर सकें।
आवेदन कैसे करें
योजना का लाभ लेने के लिए किसान को उद्यान विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन के समय खेत की नकल और आधार कार्ड अनिवार्य रखा गया है। चयन प्रक्रिया ब्लॉक स्तर पर होगी, इसलिए किसान को जल्द से जल्द आवेदन करना चाहिए। जैसे ही लक्ष्य पूरा हो जाएगा, उसके बाद नए किसानों को शामिल करना मुश्किल हो सकता है। किसान चाहें तो अपने ब्लॉक के उद्यान निरीक्षक या जिला उद्यान कार्यालय से संपर्क करके पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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